Saturday, November 27संस्थापक, प्रधान संपादक, स्वामी श्री नवनीत जगतरामका जी
Shadow

विशेष लेख

विशेष वेबिनार : डिजिटल मीडिया आचार संहिता का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कायम रखना –  संयुक्‍त सचिव श्री विक्रम सहाय

विशेष वेबिनार : डिजिटल मीडिया आचार संहिता का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कायम रखना – संयुक्‍त सचिव श्री विक्रम सहाय

राष्ट्रीय, विशेष लेख
केन्द्रीय सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय द्वारा डिजिटल मीडिया आचार संहिता 2021 का उद्देश्य अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता को कायम रखते हुए ओटीटी प्लेटफार्म पर प्रसारित होने वाली सामग्री को गुणवत्ता के स्तर पर बनाये रखना है । यह बात सूचना एवं प्रसारण मंत्रालय के संयुक्त सचिव, श्री विक्रम सहाय ने पत्र सूचना कार्यालय-पश्चिम क्षेत्र (छत्‍तीसगढ़, मध्‍यप्रदेश और राजस्‍थान) द्वारा डिजीटल मीडिया आचार संहिता-2021 पर आयोजित एक विशेष वेबिनार को संबोधित करते हुए कही । इस वेबिनार में आचार संहिता के भाग 3 से जुड़े प्रावधानों के बारे में जानकारी देते हुए श्री सहाय ने बताया कि आचार संहिता का उद्देश्य किसी को दंडित करना नहीं है, उन्होंने बताया कि पिछले कुछ वर्षो में डिजिटल मीडिया की भूमिका काफी बड़ी है और पिछले 6 वर्षो में इंटरनेट डेटा का इस्तेमाल 43 प्रतिशत तक बढ़ चुका है । उन्होने बताया कि ओटी...
राज्यपाल अनुसुइया उइके : देश के स्वतंत्रता आंदोलन में जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास

राज्यपाल अनुसुइया उइके : देश के स्वतंत्रता आंदोलन में जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास

छत्तीसगढ़ न्यूज़, राष्ट्रीय, विशेष लेख
आज जो हम खुली हवा में जो सांस ले रहे हैं, आजादी के महान नायकों के बलिदान के फलस्वरूप हो पाया है। हमें इसकी कीमत समझनी चाहिए। हर नागरिक को राष्ट्र के प्रति समर्पण भाव से कार्य करना चाहिए और देश को विघटित करने का प्रयास करने वाले तत्वों से सचेत रहना चाहिए। देश के स्वतंत्रता आंदोलन में जनजातीय समाज का गौरवशाली इतिहास रहा है। यह बात राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके ने आज जनजाति कल्याण केन्द्र महाकोशल, बरगांव द्वारा ‘‘स्वतंत्रता आंदोलन एवं जनजातीय समाज’’ विषय पर आयोजित वेबिनार को संबोधित करते हुए कही। राज्यपाल जनजाति कल्याण केन्द्र महाकोशल द्वारा ‘‘स्वतंत्रता आंदोलन एवं जनजातीय समाज’’ विषय पर आयोजित वेबिनार में शामिल हुई राज्यपाल ने कहा कि देश की आजादी में जनजातियों की भूमिका महत्वपूर्ण रही है। सन 1857 से पहले स्वतंत्रता आंदोलन से लेकर आजादी तक अंग्रेजों के खिलाफ लगातार संघर्षों का दौर जारी ...
तकनीकी छलांग मोबिलिटी का भविष्य – शेयर्ड, कनेक्टेड और इलेक्ट्रिक : अमिताभ कांत

तकनीकी छलांग मोबिलिटी का भविष्य – शेयर्ड, कनेक्टेड और इलेक्ट्रिक : अमिताभ कांत

विशेष लेख
चेतक, स्पेक्ट्रा, बुलेट, यज्‍दी, लूना, राजदूत - ये नाम दशकों से भारतीय परिवारों का एक अभिन्न हिस्‍सा रहे हैं। हिमाचल प्रदेश के पहाड़ी इलाकों से लेकर केरल के हरे-भरे मेड़ तक, सर्व-उद्देश्यीय दोपहिया वाहन एक सर्वव्यापी सांस्कृतिक का प्रतीक रहा है। आवागमन के एक आसान और द्रुतगामी साधन के रूप में इसने सामाजिक संपर्क को सुविधाजनक बनाया। यह 80 और 90 के दशक के दौरान भारत का सर्वोत्कृष्ट पारिवारिक वाहन रहा है। सहस्राब्दी के मोड़ पर धीरे-धीरे दोपहिया वाहन लड़कियों और लड़कों द्वारा समान रूप से व्यक्तिगत स्वतंत्रता को व्यक्त करने का एक साधन बन गए जो एक उज्ज्वल, समझदार और आगे की ओर बढ़ते हुए देश की छवि को दर्शाता है। ओला द्वारा हाल ही में तमिलनाडु के कृष्णागिरी जिले में दुनिया के सबसे बड़े ई-स्कूटर विनिर्माण संयंत्र का उद्घाटन करने की घोषणा पिछले कुछ वर्षों के दौरान दोपहिया वाहनों के प्रत...
विशेष लेख : इंसानी ज़ज्बा से लबरेज़ बदायूं पुलिस का यह मिसाल छ.ग.पुलिस के लिए भी नज़ीर बने – सुरेंद्र वर्मा

विशेष लेख : इंसानी ज़ज्बा से लबरेज़ बदायूं पुलिस का यह मिसाल छ.ग.पुलिस के लिए भी नज़ीर बने – सुरेंद्र वर्मा

विशेष लेख
एक राष्ट्रीय अखबार के पन्ने के हाशिये पर छपी एक खबर की संवेदनशीलता हरेक पाठक के मन में कौतूहल मचाई होगी, यह दावा कमतर हो सकती है। लेकिन खुद के भाव विव्हलतावश इंटरनेट सर्फिग के जरिये जनपद बदायूं के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री सिद्धार्थ वर्मा से इस न्युज टाॅपिक पर टेलिफोनिक बात करने में कामयाब हो ही गया। शुरूवात में ही छत्तीसगढ़ प्रदेश में इस खबर को पढ़ाने की बात सुनकर श्री सिद्धार्थ अपनी खुशी को हालांकि दबा गये लेकिन सबब जानकर थोड़ी देर बात खुद और अपने मातहतों के मौके की तस्वीर भेजकर अपनी प्रसन्न्ता जाहिर भी की। मौके की एक तस्वीर से यह स्पष्ट है कि एक खाकी वर्दीधारी अपने हाथों के सेज में उठाकर एक वृद्धा को इलाज के लिए ले जाने को तत्पर है और वहीं पर ग्रामीण जन खड़े ख़़ड़े नजारे को देख रहे हैं पर मददगार कोई नहीं हुआ। खबर के मुताबिक ग्राम बिशारतगंज जिला बरेली (उ.प्र.) के रहने वाले ग्रामीण रामना...
विशेष लेख : वंशवाद सदियों से चली रही परंपरा, दक्षिण भारत में सही तो उत्तर में राजनीति

विशेष लेख : वंशवाद सदियों से चली रही परंपरा, दक्षिण भारत में सही तो उत्तर में राजनीति

विशेष लेख
रायपुर 22 जून 2021 आज के दौर में वंशवाद को अमूमन हर क्षेत्र में देखा जा रहा है, पर वंशवाद प्रणाली आज की नहीं ये तो सदियों से चली आ रही परंपरा है, फर्क बस इतना है कि आजकल डिजिटल मीडिया का दौर है तो इंटरनेट के माध्यम से किसी भी विषय पर जमकर दुष्प्रचार किया जा सकता है। सिने जगत में वंशवाद आइये चलते है दक्षिण भारत की और जहां कन्नड़, तेलगु, तमिल, मलयालम सिनेमा में तो तीन-चार पीढ़ियों के कलाकार उम्दा अभिनय कर रहे और नाम भी खूब कमा रहे है। उदाहरण  - मनन (दयालु) हिंदी डब मनन एक तेलगु फिल्म है जिसमे सुपरस्टार नागार्जुन के बेटे नागा चैतैन्य व चैतैन्य की पत्नी सामंथा, नागार्जुन के सुपुत्र अखिल चैतन्य व उनके पिता यानी नागा चैतैन्य के दादा श्री नागेवश्वर राव दक्षिण भारत के प्रख्यात सितारे रहे है। इस फिल्म में पूरे परिवार ने दमदार अभिनय किया है और दक्षिण भारत के बॉक्स ऑफिस में जबरदस्त कमाई...
विशेष लेख : अनुकम्पा के नियम हुए जब शिथिल : बेबस परिवारों की दूर हुई मुश्किल

विशेष लेख : अनुकम्पा के नियम हुए जब शिथिल : बेबस परिवारों की दूर हुई मुश्किल

रायपुर, राष्ट्रीय, विशेष लेख
रायपुर, 22 जून 2021 / वह चाहे मधु हो या योगिता, नंदिता हो, या फिर ओमप्रकाश, शिवानी, समीक्षा, मीरा मतलाम...किसी ने अपना पिता खोया तो किसी ने अपना पति.. कोरोना महामारी ने इन परिवारों का घर उजाड़ दिया। अनमोल रिश्तों के धागों में बंधे एक ही परिवार के सदस्यों की मौत ने इन सभी को कभी न भूलने वाला ऐसा गहरा जख्म दिया कि आज भी उसे याद कर पीड़ित परिवार सिहर जाते है। कोरोना से हमेशा के लिए मौत की नींद सो गए वे लोग जो घर के मुखिया थे, सरकारी नौकरी में थे और  जिन पर पूरे परिवार की जिम्मेदारी थी, अचानक से हुई उनकी मौत परिवार के लिए किसी सदमा से कम नहीं था। एक तरफ घर के कमाऊ सदस्य के एकाएक मौत का सबकों गम था तो दूसरी तरफ अनुकम्पा नियुक्ति को लेकर वर्षों पुरानी पेचीदगी। अनुकम्पा नियुक्ति में 10 प्रतिशत का सीमा बंधन होने की वजह से चौतरफा मुसीबत से घिरे परिवारों के पास सिवाए आंसू बहाने कुछ न था। ऐसे में प्...