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विशेष लेख : इंसानी ज़ज्बा से लबरेज़ बदायूं पुलिस का यह मिसाल छ.ग.पुलिस के लिए भी नज़ीर बने – सुरेंद्र वर्मा

एक राष्ट्रीय अखबार के पन्ने के हाशिये पर छपी एक खबर की संवेदनशीलता हरेक पाठक के मन में कौतूहल मचाई होगी, यह दावा कमतर हो सकती है। लेकिन खुद के भाव विव्हलतावश इंटरनेट सर्फिग के जरिये जनपद बदायूं के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री सिद्धार्थ वर्मा से इस न्युज टाॅपिक पर टेलिफोनिक बात करने में कामयाब हो ही गया। शुरूवात में ही छत्तीसगढ़ प्रदेश में इस खबर को पढ़ाने की बात सुनकर श्री सिद्धार्थ अपनी खुशी को हालांकि दबा गये लेकिन सबब जानकर थोड़ी देर बात खुद और अपने मातहतों के मौके की तस्वीर भेजकर अपनी प्रसन्न्ता जाहिर भी की। मौके की एक तस्वीर से यह स्पष्ट है कि एक खाकी वर्दीधारी अपने हाथों के सेज में उठाकर एक वृद्धा को इलाज के लिए ले जाने को तत्पर है और वहीं पर ग्रामीण जन खड़े ख़़ड़े नजारे को देख रहे हैं पर मददगार कोई नहीं हुआ।

खबर के मुताबिक ग्राम बिशारतगंज जिला बरेली (उ.प्र.) के रहने वाले ग्रामीण रामनाथ अपनी पत्नी शारदा गुजिश्ता दो दशक पहले से गांव बरौलिया आकर यहां के एक मंदिर में पूजापाठ के जरिये अपना भरण पोषण करते रहे। ईश्वर की लीला की विसंगति देखिए इस दंपत्ति के दो पुत्रों में से एक साधु सन्यासी बन खानाबदोश हो मां-बाप का साथ छोड़ गया तो दूसरा नशाखोर होकर दर-दर भटक रहा। कोविेड के संक्रमण काल के दौर में वृद्ध दंपत्ति को दाना पानी मुहैया न होने के परिणिती में ये दंपत्ति पिछले तीन-चार हफ्तों से बीमार पड़े रहे र्। इंट भट्टा के खंडहर नुमा हो चुके जर्जर खाली टीन शेड के खोली की जमीन में लावारिस पड़े रहने से चूहों और कीड़ों के कुतरने से शरीर में घाव फोड़े होते गये । फोड़ों से मवाद पीप रिसता गया और बदबू फैलती रही।

लेकिन गांव वालों का मर्म नहीं पसीजा इलाज करने की व्यवस्था बनाने के बजाय पुलिस को खबर कर दी। गांव वालों से मिली खबर से बदायू थाना प्रभारी अनिरूद्ध सिंह ने अपने मातहत सब इंसपेक्टर के.पी.सिंह को अन्य स्टाॅफ के साथ मौके के लिए रवाना किया। सब इंसपेक्टर सिंह और स्टाफ के द्वारा मौके का जायजा लेकर तेज संड़ाध के बीच बुजुर्ग दंपत्ति के जीवित होने और प्राथमिक उपचार की सामग्री पहुंचाने की सूचना पाकर सर्किल आफिसर अनिरूद्ध सिंह स्वयं मौके पर पहुंचे और हालात की जानकारी पुलिस अधीक्षक श्री सिद्धार्थ वर्मा को देकर जरूरी हिदायतें हासिल किये ।

चंूंकि सब इंसपेक्टर के.पी.सिंह दुर्गन्ध को सहन नहीं कर चक्कर खाकर असहाय हो गये तब सर्किल आफिसर वृद्धा हो स्वयं गोद में उठाया और बाकी स्टाॅफ रामनाथ को सहारा देकर दंपत्ति को सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र लेकर पहुंचे । मौजूद चिकित्सको और मेडिकल स्टाॅफ द्वारा बजुर्गो का इलाज करने से पीछे हटते देख कर सी.ओ और स्टाॅफ ने बुजुर्गो के फोड़ों को खुद धो कर अस्पताल से मरहम पट्टी बांधे और दिन भर की कवायद के बाद गुरूवार शाम को इन बुजुर्गो को जिला स्थित एक वृद्धाश्रम में आसरा दिलाये। इस सारे वाक्यात के सामने आने के बाद बदायूं पुलिस के खाकी का रंग और भी चमकीला हो गया और देश के नागरिकों के सामने पुलिस का यह सेवाभावी मिसाल नतमस्तक योग्य हो गया।

सुरेंद्र वर्मा

लेखक के विचार निजी है

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