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दुर्ग भिलाई : विधिक साक्षरता जागरूकता का शिविर ऑनलाइन आयोजित होगा

दुर्ग भिलाई। कोरोना संक्रमण काल की अवधि को देखते हुए फिजिकल रूप से विधिक साक्षरता शिविर आयोजित नहीं किया जा रहा है समाज में बढ़ते अपराधों को देखते हुए विधिक रूप से जागरूक किया जाना अति आवश्यक प्रतीत हो रहा है इन्हीं परिस्थितियों को ध्यान में रखते हुए राजेश श्रीवास्तव जिला एवं सत्र न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के मार्गदर्शन एवं निर्देशन पर दिनांक 16 से 2021 से 16 2021 दुर्ग जिले के विभिन्न विद्यालयों के विद्यार्थियों को जिला शिक्षा विभाग के समन्वय से ऑनलाइन विधिक जागरूकता शिविर किया जा रहा है ऑनलाइन विधिक जागरूकता शिविर के इस कड़ी में आज ब्लॉक धमधा के दो शासकीय विद्यार्थियों में नीलू सिंह अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश दुर्ग के द्वारा विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किए गए

उन्होंने बताया कि अच्छी शिक्षा जीवन में बहुत से उद्देश्य को प्रदान करती है जैसे व्यक्ति को बढ़ावा सामाजिक स्तर में बढ़ावा समाजिक मुद्दों के बारे में जागरूक करना और पर्यावरण समस्या को सुलझाने के लिए हल करना और अन्य सामाजिक मुद्दे विद्या एक ऐसा है जिसे ना तो कोई चुरा सकता है और ना ही कोई छीन सकता है यह एक यह एकमात्र ऐसा धन है जो बांटने पर कम नहीं होता बल्कि इसके विपरीत बढ़ता ही जाता है हमने देखा होगा कि हमारे समाज में जो शिक्षित व्यक्ति होते हैं

उनका एक अलग ही मान सम्मान होता है और लोग उन्हें हमारे समाज में इज्जत भी जैसे हैं इसलिए हर व्यक्ति चाहता है कि वह एक साक्षर हो प्रशिक्षित हो इसलिए आज के समय में हमारे जीवन में पढ़ाई का बहुत अधिक महत्व हो गया है इसलिए आपको यह याद रखना है कि शिक्षा हमारे लिए बहुत जरूरी है इसकी वजह से हमें हमारे समाज में सम्मान मिलता है जिससे हम समाज में उठाकर जी सकते हैं उन्होंने बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के बारे में एवं बाल विवाह से हो रही परेशानियों के संबंध में जानकारी प्रदान की उन्होंने बताया कि बाल विवाह बच्चों के अधिकारों का अतिक्रमण करता है जिससे उन पर

हिंसा शोषण तथा यौन शोषण का खतरा बना रहता है बाल विवाह लड़कियों और लड़कों दोनों पर असर डालता है लेकिन इसका प्रभाव लड़कियों पर अधिक पड़ता है बाल विवाह प्रतिषेध अधिनियम के अंतर्गत 21 वर्ष से कम आयु के पुरुष तथा 18 वर्ष से कम आयु की महिलाओं के विवाह को बाल विवाह की श्रेणी में रखा जाएगा
इस अधिनियम के अंतर्गत बाल विवाह को दंडनीय अपराध माना गया है साथ ही बकवास करने वाले वयस्क पुरुष रविवार को संपन्न कराने वाले को इस अधिनियम के तहत 2 वर्ष के कठोर कारावास की या ₹100000 का जुर्माना या दोनों से किया जा सकता है किसी महिला को कारावास नहीं किया जाएगा इस अधिनियम के अंतर्गत विवाह को करने का प्रावधान है समाज की समानता और भेदभाव का उदाहरण है शिक्षा से बचा जा सकता है
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