Thursday, August 5संस्थापक, प्रधान संपादक, स्वामी श्री नवनीत जगतरामका जी
Shadow

विशेष लेख : वंशवाद सदियों से चली रही परंपरा, दक्षिण भारत में सही तो उत्तर में राजनीति

रायपुर 22 जून 2021 आज के दौर में वंशवाद को अमूमन हर क्षेत्र में देखा जा रहा है, पर वंशवाद प्रणाली आज की नहीं ये तो सदियों से चली आ रही परंपरा है, फर्क बस इतना है कि आजकल डिजिटल मीडिया का दौर है तो इंटरनेट के माध्यम से किसी भी विषय पर जमकर दुष्प्रचार किया जा सकता है।

सिने जगत में वंशवाद

आइये चलते है दक्षिण भारत की और जहां कन्नड़, तेलगु, तमिल, मलयालम सिनेमा में तो तीन-चार पीढ़ियों के कलाकार उम्दा अभिनय कर रहे और नाम भी खूब कमा रहे है।

उदाहरण  – मनन (दयालु) हिंदी डब

dayaalu-movie

मनन एक तेलगु फिल्म है जिसमे सुपरस्टार नागार्जुन के बेटे नागा चैतैन्य व चैतैन्य की पत्नी सामंथा, नागार्जुन के सुपुत्र अखिल चैतन्य व उनके पिता यानी नागा चैतैन्य के दादा श्री नागेवश्वर राव दक्षिण भारत के प्रख्यात सितारे रहे है। इस फिल्म में पूरे परिवार ने दमदार अभिनय किया है और दक्षिण भारत के बॉक्स ऑफिस में जबरदस्त कमाई भी हुई है.

ध्वनि भानुशाली यूट्यूब पर महशूर गायिका है जो टी सीरीज प्रेजिडेंट विनोद भानुशाली की सुपुत्री है, ध्वनि भानुशाली बहुत ही मधुर गाती है और 1 बिलियन से भी ज्यादा व्यूज मिले है उनके वीडियो को यूट्यूब पर.

आखिर राजा का ही बेटा क्यों बनता है राजा

भारतीय संस्कृति के अनुसार पिता अपने पुत्र अथवा पुत्री को अपनी कला व गुण संस्कार के रूप देता है, जैसे कुम्हार अपने पुत्र को अपने से भी अच्छे घड़े बनाना सिखाता है, किसान अपने पुत्र अथवा पुत्री को किसानी के सारे तरीके बताता है, पंडित अपने बेटे को पंडिताई सिखाता है उसी प्रकार एक राजा भी अपने बेटे को महाराजा के रूप में देखना चाहता है, उसे सारे तौर तरीके बताये जाते है।

कारण सब अपने वंश की कला और पहचान को संजोये रखना चाहते है। हैरान ना हो तो, आज भी ये प्रणाली जोर-शोर से चल रही है अक्सर डॉक्टर का बेटा डॉक्टर मिलेगा, CA की पुत्री CA ही मिलती है। एक दो अपवाद इसलिए देखे जाते क्यूंकि कही न कही परवरिश में कमी रह जाती है या वो संस्कार नहीं मिल पाते जो मिलने थे.

राजनीति में वंशवाद

राजनीति में वंशवाद एक पार्टी विशेष तक सीमित बिलकुल भी नहीं है, उदहारण स्वरुप तमिलनाडु के मुख्यमंत्री श्री एम के स्टालिन पूर्व मुख्यमंत्री श्री करूणानिधि जी के सुपुत्र है. उन्हें तमिलनाडु की जनता ने उनके उपनाम या उनके पिता से नहीं उनके बरसो से चली आ रही कार्यशैली को देख कर बहुमत से जिताया है। झारखण्ड के मुख्यमंत्री श्री हेमंत सोरेन के पिताश्री शिब्बू सोरेन भी मुख्यमंत्री रहे है, उन्हें भी राज्य की जनता ने अपनाया है, सालो से हेमंत सोरेन भी राज्य की राजनीति में संघर्ष कर रहे है।

उद्योग जगत में वंशवाद

इतने उद्योगों में जैसे टाटा समूह, बिरला,  रिलायंस (अम्बानी) सभी में बरसो से वंशवाद कायम है जिसकी वजह है उनके पुत्र अथवा पौत्रो का काबिल एवं हुनरमंद होना। जरा सोचिये, धीरूभाई अम्बानी द्वारा स्थापित रिलायंस को उनके पुत्र मुकेश अम्बानी जी से बेहतर कोई संभाल सकता है क्या।

लोग अपनी बरसो की कला या हुनर को आगे नहीं बढ़ाएंगे, सिर्फ वंशवाद के कारण तो संस्कृति पर भी इसका प्रभाव पड़ेगा। पर इसका ये मायने कतई नहीं है की आप कोई नया हुनर या कला को नहीं अपनाये, सीखिये जो मन कर पर अपने पारिवारिक कला में निपुणता लाना आवश्यक है, क्या पता बुरे वक्त पर आपका पुश्तैनी कार्य ही आपके भविष्य को सँवार दे. 

वंशवाद या आपका उपनाम आपकी पहचान है, कार्य या प्रभार उपनाम से नहीं हुनर से मिलता है जो आपके पिता या माता आपको बचपन से देते आ रहे है.

श्री बिशेष कुमार दुदानी

पत्रकार / लेखक के विचार अपने निजी है।

पोर्टल/समाचार पत्र विज्ञापन हेतु संपर्क : +91-9229705804
Advertise with us

Leave a Reply

Your email address will not be published. Required fields are marked *