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शिक्षक दिवस, 05 सितंबर 2021 के मौक़े पर आई.जी.श्री दाॅगी की जीवनी पर खास पेशकश शिक्षक से महानिरीक्षक तक केवल परीक्षा ही परीक्षा: तब श्रवण पुत्र बन पाए हैं

शिक्षक से महानिरीक्षक बनने के जज्बे को यथार्थ में साबित करना, और अपने समकक्ष तीन अफ़सरों के अलावा दीगर नामचीन पुलिस अधिकारियों के बीच मुकद्दर का सिकंदर कहलाने का श्रेय हासिलात करने की कवायद आसमां से तारे तोड़ लाने जैसे मिसाल को मुक्कम्मल बनाने वाले छत्तीसगढ़ बिलासपुर रेंज के आई.जी.श्री रतन लाल डांगी का नाम बेहद अदब और शउर के साथ लिया जाता है। फिलहाल दो पुलिस रेंज बिलासपुर और सरगुजा के आई.जी. यानि 10 जिलों क्रमशः बिलासपुर, मुंगेली, जीपीएम, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ, अंबिकापुर, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया के सुपरविजन आफिसर तो हैं ही गुजिश्ता 15 अगस्त को घोषित चार नये जिलों में से सक्ती, सारंगढ़ और मनेन्द्रगढ़ जिले की नई तस्वीर बनाने की साझी जिम्मेदारी भी इन पर है। राजस्थान की जमीन पर जन्म होने के बाद अपनी तकदीर को उंचा बनाने का हौसला और छत्तीसगढ़ की धरती में कदमपोशी की तवारीख से लेकर अब तक के सेवा काल में खुद को बुलंदियों तक पहुंचाने वाले श्री रतन लाल डांगी के साधारण से असाधारण बनने का सफर बेहद मुश्किल भरे तजुर्बो से अटा पड़ा है। 51 साल उम्र के पायदान पार करने के बाद भी उर्जा से लबालब श्री रतन लाल डांगी योगासन के जरिए आईकान भी हैं,

मोटिवेशनल पर्सन के बतौर बेहद लोकप्रिय भी हैं। सोशल मीडिया में इनके फाॅलोअर्स की तादाद तकरीबन पचास लाख से भी ज्यादा हैै। श्री डांगी का जन्म 01 अगस्त, 1973 को राजस्थान के नागौर जिले के एक पिछड़े गांव मलास (भाखरी) में हुआ। मां श्रीमति भंवरी देवी और पिता श्री श्रवण लाल के चार संतानों में से रतन सबसे छोटे हैं। गांव के ही सरकारी स्कूल से प्रायमरी शिक्षा लेने के बाद माध्यमिक शिक्षा ग्रहण करने के लिए पीपलाद के सरकारी स्कूल में दाखिला लिये । श्री डांगी रोजाना आठ किलोमीटर पैदल आना जाना करते थे। हायर सेकेंडरी स्कूल की शिक्षा तहसील मुख्यालय परबतसार में ग्रहण किये। श्रमिक परिवार में होने के कारण रोजी रोटी की समस्या भी रही लेकिन शिक्षित होने के मंसूबे को पूरा करने में उन्होने जैसे तैसे विषम परिस्थितियों से तालमेल बिठाते हुए काॅलेज की पढ़ाई के साथ साथ टीचर्स ट्रेनिंग भी पूरी की और 20-21 साल के आयु में ही एक सरकारी स्कूल में शिक्षक की नौकरी पाने में सफल रहे। 6 साल तक शिक्षक की नौकरी करते हुए अजमेर के एमडीएम यूनिवर्सिटी से प्राईवेट छात्र के बतौर बी.ए. एम.ए. उत्तीर्ण हुए।

राजस्थान पब्लिक सर्विस कमीशन की प्रतियोगी परीक्षा देकर पहले प्रयास में विक्रय कर निरीक्षक बने दो साल के अंतराल के बाद दूसरी कोशिश में नायब तहसीलदार के पद पर सलेक्ट हुए। इसके साथ ही श्री डांगी का आगे बढ़ना का जज्बा कायम रहा और देश के प्रतिष्ठित संघ लोक सेवा आयोग की प्रतियोगी परीक्षा के अपने अंतिम प्रयास में साल 2003 में 226वां रैंक हासिल करने के साथ ही भारतीय पुलिस सेवा का तमगा प्राप्त करने का लक्ष्य पाने में कामयाब हुए । इस तरह एक शिक्षक से अधीक्षक बने और पुलिस अधीक्षक के निहित कर्तव्यों का बखूबी निर्वहन करते करते अनेकानेक उपलब्धियां अर्जित किये और रफ्ता रफ्ता पुलिस के महानिरीक्षक के पद पर आज श्री डाॅगी सुशोभित होकर सोशल पुलिसिंग, आॅनेस्ट पुलिसिंग, सर्वहारा हितैषी पुलिसिंग और दबंग पुलिसिंग के क्षेत्र में परचम लहराते हुए नजर आ रहे हैं। इस तरह श्री डांग जी की अब तक की जीवन संघर्ष और विभिषिका की गाथा की भांति है, जीवन में संघर्षशील गरीब युवाओं के लिए उनकी यह बाॅयोग्राॅफी प्रेरणादायी हो सकती है इस स्वर्णिम उपलब्ध्यिों का श्रेय अपने माता-पिता और अपनी धर्मपत्नी जी के सहयोगात्मक प्रेरणा स़्त्रोत को देते हुए आई.जी. श्री डांगी युवाओें के बीच पनपी इस धारणा और भ्रम को भी तोड़ने में सफल रहे हैं

कि अनपढ़ और मजदूर माता-पिता की संतान भी देश के सर्वोच्च सेवा के पदों मेें पहुंचने में कामयाबी हासिल कर सकते हैं। श्री डांगी हरेक शख्स को अपनी दिेनचर्या में व्यायाम, खेल अभ्यास और योगासनों को अपनाने की सलाह देते हैंे। जिससे कि शारीरिक और मानसिक स्तर पर फिट रहने से ही हरेक किसी को भी सामने आई परेशानियों का आसानी से हल करने की ताकत मिलती है। महात्मा गौतम बुध्द के आराध्य श्री डांगी का मानना है कि हरेक का जन्म किसी विशेष कारण और किसी विशेष सफलता प्राप्त करने के मकसद से हुआ है, सफलता लेने को जन्म सि़द्ध अधिकार मानना चाहिए इस अधिकार को प्रकृति भी नहीं छीन सकती, कोशिश-दर-कोशिश की जानी चाहिए, कामयाबी कदम जरूर चुमेगी। सिविल लाईन बिलासपुर स्थित आई.ज.ी. बंगले के मुख्य प्रवेश द्वार के समीप गौतम बुद्ध की लगी वाॅल पेंटिग को आते जाते निहारते निहारते श्री डाॅगी जी के दर्शन में तथागत जैसी निश्छल मुस्कान और परम आनंद का भाव तो झलकता है ही साथ ही उनके संदेश में भी बुद्ध के आध्यात्मिक भाव के सीरत भी समाहित हैें।

 

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