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पुलिस स्मृति दिवस : खाकी के भीतर धड़कती सांसो से ही हमारी जान में जान है

पुलिस स्मृति दिवस : खाकी के भीतर धड़कती सांसो से ही हमारी जान में जान है

विशेष लेख
प्रायः पुलिस कर्मी को अपना फ़र्ज पूरा करते देखते रहने के बावजूद अक्सर उनकी आलोचनाएं ज्यादा करते हैं, उन पर आरोप भी मढ़ते हैं जिनमें से कुछ सच लेकिन अधिकांशतः गलत होते हैं। पर हम भूल जाते हैं कि ये लोग कितना कठिन काम करते हैं। आज के दिन हमें उनकी सेवा को उस नजरिये से देखने की जुरूरत है कि हमारी पुलिस आम लोगों की जान माल की रक्षा करने में अपनी जिंदगी से किस तरह से सहर्ष समझौता कर लेते हैं और वक्त-ब-वक्त अपनी जिंदगी न्यौछावर करने से भी नहीं चूकतेश्। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू जी के इस उद्गार को पुलिस के लिए पहला सम्मान माना जा सकता है। मौका था जयपुर राजस्थान में पुलिस स्मारक के लोकार्पण का और तारीख थी साल 1963 के 05 नवंबर का। बहरहाल अगली कड़ी में आज पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर हमर छत्तीसगढि़या पुलिस को सब ले बढि़या होने की तर्ज पर सम्मान करने की जुरूरत और जिम्मेदारी हम छत्तीसगढ...
विशेष लेख- शिक्षक दिवस : शिक्षा की रोशनी ने दृष्टिबाधित गोपेन्द्र के जीवन में लाया उजियारा

विशेष लेख- शिक्षक दिवस : शिक्षा की रोशनी ने दृष्टिबाधित गोपेन्द्र के जीवन में लाया उजियारा

chhattisgarh, Education & Jobs, india
शिक्षा एक ऐसा माध्यम है जिससे देश का भविष्य निर्माण होता है। समाज को गतिशील बनाकर विकास का आधार प्रदान करने के साथ व्यक्तित्व के विकास में भी शिक्षा के योगदान को भुलाया नहीं जा सकता। शिक्षा एक ऐसी रोशनी है जो किसी के अंधकारमय जिंदगी को संवार कर उजाले की ओर सही दिशा में ले जाती है। कुछ ऐसी ही कहानी गोपेन्द्र सोनकर की है। भले ही वह अपनी आंखों से देख नहीं पाता। लेकिन गांव के स्कूल में मिली शिक्षा ने उसकी जिंदगी को संवार दिया है। दृष्टिबाधित होने के बावजूद गोपेन्द्र ने अपनी पढ़ाई पूरी की। अब अपनी योग्यता की बदौलत वह उसी स्कूल में शिक्षक बनकर गांव के बच्चों को पढ़ाने जाने वाला है  जहां उसने अपनी पढ़ाई शुरू की थी। खास बात यह भी है कि इसी विद्यालय में गोपेन्द्र सोनकर के पिता श्री ढालेन्द्र सोनकर प्रधानपाठक है। रायपुर जिले के आरंग विकासखण्ड अंतर्गत ग्राम पंचायत कागदेही निवासी गोपेन्द्र सोनकर ने शि...
142वीं जयंती 31 जुलाई 2021 के मौके पर खास पेशकश प्रेमचंद की कहानियों में भारत दर्शन कितना उजला, कितना धुंधला?

142वीं जयंती 31 जुलाई 2021 के मौके पर खास पेशकश प्रेमचंद की कहानियों में भारत दर्शन कितना उजला, कितना धुंधला?

विशेष लेख
नवाब वह होता है, जिसके पास कोई मुल्क हो, हमारे पास मुल्क कहां ?‘‘ बे-मुल्क भी नवाब होते हैं ? ‘‘ यह किसी कहानी का नाम हो जाए तो बुरा नहीं, मगर अपने लिए यह घमंड पूर्ण है। चार पैसे पास नहीं और नाम नवाबराय । इस नवाबी से प्रेम भला, जिसमें ठंडक भी है, संतोष भी। अपनी मुसीबतों पर इस तरह हंसते हुए प्रेमचंद जी ने अपने नवाब को निरर्थक ठहराया। हिंदी साहित्य के कालजयी पत्रिका ‘‘हंस‘‘के मई, 1937 के अंक में प्रकाशित सुदर्शन जी और प्रेमचंद जी के बीच हुए संवाद तब के वक्त में हुआ रहा जब 1909 के दौर में प्रेमचंद की कहानी सोज़े वतन, ज़माना प्रेस, कानपुर की प्रतियां अंग्रेज सरकार ने बगावती लेख मानकर जप्त कर ली थीं। तब उर्दू अख़बार ज़माना के संपादक मुंशी दयानारायण निगम जी ने नवाबराय नाम की जगह प्रेमचंद के नाम से लिखना सुझाये थे। और उसी दौर में सुदर्शन जी ने प्रेमचंद से सवाल किये थे कि आपने नवाबराय नाम क्यूं छो...
1 जुलाई डाॅक्टर्स डे  : महात्मा बुद्ध और गांधी जी की छबि से मिलती जुलती है गांधीगंज के डाॅ.राजू की सूरत और सीरत

1 जुलाई डाॅक्टर्स डे : महात्मा बुद्ध और गांधी जी की छबि से मिलती जुलती है गांधीगंज के डाॅ.राजू की सूरत और सीरत

विशेष लेख
गुजिश्ता दौर से ही रायगढ़ को ख्याति दिलाने में सियासतदार राजा चक्रधरसिंह जी संगीत सम्राट केे नाम से मशहूर तो हैं ही, शास्त्रीय कत्थक नृत्य शैली में रायगढ़ घराना भी राजा साहब के वजह से ही माकूल हुआ है, दूसरी कड़ी में दानवीर किरोड़ीमल जी के बाद जिले को ख्याति दिलाने में मृत्यु पर्यन्त तक उ़द्योगो द्वारा प्रदूषण फैलाये जाने जल दोहन के खिलाफत करने तथा बेहतर पर्यावरण माहौल मुहैया कराने वास्ते सक्रिय रहे गांधीवादी विचार के कट्टर अनुयायी, देश की आजादी संग्राम के सेनानी और रायगढ़ से निर्वाचित प्रथम विधायक स्वर्गीय श्री रामकुंमार अग्रवाल जी को बतौर जननायक का नाम बेहद ही शउर से लिया जाता है। इन्हीं फ्रीडम फाईटर के सुपुत्र हैं गांधीगंज के डाॅ. राजू अग्रवाल निहायत ही कुदरती अदबी और शाहीनी इंसानियत से लबरेज़ हैं, तभी तो निखालिस घरेलु परिवेश में चल रहे इनके क्लिनिक में शक्त अशक्त मरीजों के हूजूम के बीच इनकी प...
विशेष लेख : इंसानी ज़ज्बा से लबरेज़ बदायूं पुलिस का यह मिसाल छ.ग.पुलिस के लिए भी नज़ीर बने – सुरेंद्र वर्मा

विशेष लेख : इंसानी ज़ज्बा से लबरेज़ बदायूं पुलिस का यह मिसाल छ.ग.पुलिस के लिए भी नज़ीर बने – सुरेंद्र वर्मा

विशेष लेख
एक राष्ट्रीय अखबार के पन्ने के हाशिये पर छपी एक खबर की संवेदनशीलता हरेक पाठक के मन में कौतूहल मचाई होगी, यह दावा कमतर हो सकती है। लेकिन खुद के भाव विव्हलतावश इंटरनेट सर्फिग के जरिये जनपद बदायूं के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री सिद्धार्थ वर्मा से इस न्युज टाॅपिक पर टेलिफोनिक बात करने में कामयाब हो ही गया। शुरूवात में ही छत्तीसगढ़ प्रदेश में इस खबर को पढ़ाने की बात सुनकर श्री सिद्धार्थ अपनी खुशी को हालांकि दबा गये लेकिन सबब जानकर थोड़ी देर बात खुद और अपने मातहतों के मौके की तस्वीर भेजकर अपनी प्रसन्न्ता जाहिर भी की। मौके की एक तस्वीर से यह स्पष्ट है कि एक खाकी वर्दीधारी अपने हाथों के सेज में उठाकर एक वृद्धा को इलाज के लिए ले जाने को तत्पर है और वहीं पर ग्रामीण जन खड़े ख़़ड़े नजारे को देख रहे हैं पर मददगार कोई नहीं हुआ। खबर के मुताबिक ग्राम बिशारतगंज जिला बरेली (उ.प्र.) के रहने वाले ग्रामीण रामना...