Tuesday, September 21संस्थापक, प्रधान संपादक, स्वामी श्री नवनीत जगतरामका जी
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142वीं जयंती 31 जुलाई 2021 के मौके पर खास पेशकश प्रेमचंद की कहानियों में भारत दर्शन कितना उजला, कितना धुंधला?

142वीं जयंती 31 जुलाई 2021 के मौके पर खास पेशकश प्रेमचंद की कहानियों में भारत दर्शन कितना उजला, कितना धुंधला?

विशेष लेख
नवाब वह होता है, जिसके पास कोई मुल्क हो, हमारे पास मुल्क कहां ?‘‘ बे-मुल्क भी नवाब होते हैं ? ‘‘ यह किसी कहानी का नाम हो जाए तो बुरा नहीं, मगर अपने लिए यह घमंड पूर्ण है। चार पैसे पास नहीं और नाम नवाबराय । इस नवाबी से प्रेम भला, जिसमें ठंडक भी है, संतोष भी। अपनी मुसीबतों पर इस तरह हंसते हुए प्रेमचंद जी ने अपने नवाब को निरर्थक ठहराया। हिंदी साहित्य के कालजयी पत्रिका ‘‘हंस‘‘के मई, 1937 के अंक में प्रकाशित सुदर्शन जी और प्रेमचंद जी के बीच हुए संवाद तब के वक्त में हुआ रहा जब 1909 के दौर में प्रेमचंद की कहानी सोज़े वतन, ज़माना प्रेस, कानपुर की प्रतियां अंग्रेज सरकार ने बगावती लेख मानकर जप्त कर ली थीं। तब उर्दू अख़बार ज़माना के संपादक मुंशी दयानारायण निगम जी ने नवाबराय नाम की जगह प्रेमचंद के नाम से लिखना सुझाये थे। और उसी दौर में सुदर्शन जी ने प्रेमचंद से सवाल किये थे कि आपने नवाबराय नाम क्यूं छो...