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गरियाबंद : 16 जुलाई 2021 न्यूज़ बुलिटिन

गरियाबंद : 16 जुलाई 2021 न्यूज़ बुलिटिन

राजिम-गरियाबंद
मनरेगा का साथ मिला तो मेहनती महेश का जीवन बदल गया : मछली पालन के साथ साग-सब्जी उत्पादन कर लेते है दोहरा लाभ मेहनती हाथों को जब किसी का सहारा मिल जाता है, तो वे जीवन बदलने का सपना भी आसानी से पूरा कर लेते है। मेहनती और अपने काम के प्रति दृढ़ विश्वासी महेश को जब मनरेगा का साथ मिला तो उनकी आमदनी बढ़ गई और जीवन को भी अपने सांचे में ढालने लग गया। महात्मा गांधी राष्ट्रीय ग्रामीण रोजगार गारंटी योजना से हो रहे आजीविका संवर्धन के कार्यो ने कई परिवारों की जिंदगी बदल दी है। जीवन-यापन के साधनों को सशक्त कर इसने लोगों की आर्थिक उन्नति के द्वार खोले है। कोविड-19 से निपटनें एवं लागू देशव्यापी लॉक-डाउन के दौर में भी, महात्मा गांधी नरेगा से निर्मित संसाधनों ने हितग्राहियों की आजीविका को अप्रभावित रखा है। नए संसाधनों ने उन्हे इस काबिल भी बना दिया है कि अब विपरीत परिस्थितियों में वे दूसरों की मदद कर रहे है।...
जशपुर : मुख्यमंत्री आज 283.70 करोड़ की विकास कार्यो का वर्चुअल लोकार्पण और भूमि पूजन करेगें

जशपुर : मुख्यमंत्री आज 283.70 करोड़ की विकास कार्यो का वर्चुअल लोकार्पण और भूमि पूजन करेगें

छत्तीसगढ़ न्यूज़, जशपुर
जशपुरनगर. मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल आगामी 14 जून 2021 को वर्चुअल के माध्यम से लगभग जशपुर जिले में 283.70 करोड़ की लागत से विभिन्न निर्माण कार्यो का लोकार्पण और भूमि पूजन करेगें और मुख्यमंत्री शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों से चर्चा भी करेगें। मुख्यमंत्री शासन की विभिन्न योजनाओं से लाभान्वित हितग्राहियों से चर्चा भी करेगें मुख्यमंत्री आगामी 14 जून को जशपुर जिले में निर्माण एवं विकास के 377 कार्यो का लोकार्पण करेगें जिसकी लागत राशि 81.95 करोड़ है। इनमें सिंथेटिक हॉकी टर्फ स्टेडियम का निर्माण लागत राशि 544.00 लाख, जशपुर विकासखंड में शासकीय अधिकारियों कर्मचारियों आवासीय भवनों निर्माण लागत राशि 976.00 लाख, सुगाजोरी से सहसपुर पहुंच मार्ग कार्य लागत राशि 536.18 लाख, कुनकुरी विकासखंड में शासकीय अधिकारियों कर्मचारियों आवासीय भवनों निर्माण लागत राशि 488.00 लाख, अंकिरा पहुंच मार्...
विशेष लेख : स्टोकास्टिक कंप्यूटिंग – एक नया शोध क्षेत्र

विशेष लेख : स्टोकास्टिक कंप्यूटिंग – एक नया शोध क्षेत्र

यूनिवर्सिटी न्यूज़
वर्ष १९६५ में, दुनिया के विभिन्न हिस्सों में अनुसंधान टीमों ने, काफी स्वतंत्र रूप से, कंप्यूटर के एक नए रूप की खोज की,  जो पैटर्न और गहन शिक्षण को पहचानने में उपयोगी हो सकता है। इसे "स्टोकेस्टिक कंप्यूटर" कहा जाता था। यह मानव मस्तिष्क की तरह समानांतर प्रसंस्करण करता है और कंप्यूटिंग तकनीकों के परिवार के लिए एक नया अतिरिक्त है। स्टोकेस्टिक कंप्यूटिंग को पारंपरिक बाइनरी कंप्यूटिंग के कम लागत वाले विकल्प के रूप में प्रस्तावित किया गया था। यह अलग है क्योंकि यह डिजीटल संभावनाओं के रूप में सूचना का प्रतिनिधित्व करता है और संसाधित करता है। यह बहुत कम कठिन गणना इकाइयों का उपयोग करता है। जो कैलक्यूलेशन करने के लिए एक पारंपरिक बाइनरी कंप्यूटिंग लगभग ३० तर्क द्वार लेता है, वही स्टोकास्टिक कंप्यूटर केवल 1 तर्क द्वार का उपयोग करता है! डिजिटल सर्किटरी में गुणा और जोड़ के लाखों गणना की जरूरत पड़ती ह...