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स्वरुपानंद महाविद्यालय में अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के उपलक्ष्य में विचारों की अभिव्यक्ति प्रतियोगिता का आयोजन

स्वामी श्री स्वरुपानंद सरस्तवती महाविद्यालय हुडको, भिलाई में अंतर्राष्ट्रीय बालिका दिवस के अवसर पर ‘बालिका शिक्षा स्वास्थ्य एवं पोषण’ विषय पर विचारों की अभिव्यक्ति के अवसर कार्यक्रम का आयोजन शिक्षा विभाग, महिला सेल एवं आई.क्यू.ए.सी. के संयुक्त तात्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम की संयोजिका स.प्रा. उषा साहू ने कार्यक्रम के उद्देश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि किशोरियों की वर्तमान और आगामी पीढ़ी के सहयोग के लिए प्रेरणा का समय है। बालिकाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देना। उनके अधिकारों का संरक्षण करना। बी.एड. तृतीय सेमेस्टर की सीमा गंधर्व ने बेटियों से भेदभाव न करे। एक साथ बढ़ने का मौका दे सभी क्षेत्रों में बढने का समान अवसर दे। उन्हें रोके नहीं। हम देश के बालिकाओं को शिक्षित किये बिना देश को सशक्त नहीं बना सकते।

बालिकाओं की रक्षा में शिक्षा महत्वपूर्ण भूमिका निभाती है। एम.एड. तृतीय सेमेस्टर के विद्यार्थी श्याम सुंदर पटनायक ने कहा पहली बार अन्तर्राष्ट्रीय बालिका दिवस 11 अक्टूबर 2012 को मनाया गया था। बालिकाओं के सशक्तिकरण को बढ़ावा देना। बालिका के शिक्षा स्वास्थ्य एवं पोषण पर विशेष ध्यान देने की आवश्यकता पर बल दिया। बी.एड. तृतीय सेमेस्टर की छात्रा सुजाता बॉस ने कहा बालिकाओं के प्रति होने वाले भेदभाव को दूर करने की आवश्यकता है इसके लिए समाज में बालिकाओं के अधिकारों के प्रति जागरुकता उत्पन्न करने की आवश्यकता है जिससे बालिकाओं को एक समान अवसर मिलेगा और वे निरंतर प्रगति के पथ पर अग्रसर होंगे।

महाविद्यालय के सीओओ डॉ. दीपक शर्मा ने कहा बालिकाओं के सामने आने वाली चुनौतियों और उनके अधिकारों के संरक्षण के बारे में जागरुकता बढ़ाई जानी चाहिये। आधुनिक युग में लड़कियों को उनके अधिकार देने और उनके प्रति लोगों को जागरुक करने के लिए प्रयास कियो जा रहे है।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा यह दिवस किशोरियों के सहयोग में प्राप्त करने वाली उपलब्धियों को पहचानने तथा किशोरियों की वर्तमान और आगामी पीढ़ी के सहयोग के लिए प्रेरणा देने का समय है। ताकि वे सतत् विकास लक्ष्यों की प्राप्ति में अपनी क्षमताओं के माध्यम से महत्वपूर्ण भूमिका निभा सके।

महाविद्यालय की उपप्राचार्य डॉ. अज़रा हुसैन ने कहा बालिका शिक्षा और भागीदारी सुनिश्चित करना। हमें अपने घरों से ही बालिकाओं की शिक्षा स्वास्थ्य एवं पोषण पर ध्यान देने की आवश्यकता है।
सहायक प्राध्यापक डॉ. पूनम निकुंभ ने कहा ‘यत्र नार्थस्तु पूज्यन्ते, रमन्ते तत्र देवता’ सृष्टि की शुरुआत से महिलाओं का सम्मान किया जा रहा है।

लेकिन युग और सदियॉं बीतने के साथ महिलाओं के प्रति लोगों की सोच बदलती चली गई बाल विवाह, दहेज प्रथा, कन्या भू्रण हत्या जैसी समस्याएं अभी भी समाज में व्याप्त है। दुनिया भर में बेटियों के प्रति दोहरापन देखा जाता है।
प्रतियोगिता की निर्णायक डॉ. दुर्गावती मिश्रा के द्वारा निर्णय दिया गया। इस प्रतियोगित का परिणाम निम्न प्रकार से है-
प्रथम स्थान:- श्याम सुंदर पटनायक – एम.एड. तृतीय सेमेस्टर
द्वितीय स्थान:- सुजाता बोस – बी.एड. तृतीय सेमेस्टर
तृतीय स्थानः- सीमा गंधर्व – बी.एड. तृतीय सेमेस्टर रही।
कार्यकम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन संयोजिका श्रीमती उषा साहू ने किया।

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