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शिक्षक दिवस के उपलक्ष पर विचारों की प्रस्तुति विषय पर  प्रतियोगिता का आयोजन

स्वरूपानंद महाविद्यालय के शिक्षा विभाग द्वारा शिक्षक दिवस के उपलक्ष पर विचारों की प्रस्तुति विषय पर विद्यार्थियों द्वारा अपने-अपने विचार लिखित और मौखिक रूप में प्रस्तुत करने की प्रतियोगिता का आयोजन किया गया जिसमें शिक्षा विभाग के  विद्यार्थियों ने  बड़ी संख्या में भाग लिया. संयोजिका डॉ रचना पांडे ने इस कार्यक्रम को आयोजित कराने के उद्देश्य पर प्रकाश डालते हुए बताया कि वर्तमान परिपेक्ष में विद्यार्थियो मे शिक्षकों के प्रति समर्पण की भावना कितनी है और वह अपने शिक्षकों के बारे में क्या सोचते हैं यह जानने की आवश्यकता है क्योंकि विद्यार्थी अब अपने शिक्षकों के प्रत्यक्ष संपर्क में ना आकर अप्रत्यक्ष रूप से शिक्षा प्राप्त कर रहे हैं इन्हीं सब बातों को ध्यान में रखकर विद्यार्थियों द्वारा विचारों की प्रस्तुति प्राप्त किया गया
महाविद्यालय सीओओ डॉ दीपक शर्मा ने इस कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि शिक्षा का कार्य शिक्षक और विद्यार्थी के द्वारा ही संभव हो पाता है और दोनों के बीच का जो संबंध है वह स्वस्थ और धनात्मक होना चाहिए

प्राचार्य डॉ हंसा शुक्ला ने कहा कि शिक्षक दिवस सिर्फ शिक्षकों के लिए ही नहीं बल्कि उन सभी लोगों के लिए मनाना चाहिए जो हमें कहीं ना कहीं प्रत्यक्ष या अप्रत्यक्ष रूप से शिक्षा देते हैं चाहे वह नैतिक शिक्षा हो या व्यावहारिक शिक्षा  यह कार्यक्रम विद्यार्थियों के विचारों को समझने का एक अच्छा माध्यम है. उप-प्राचार्य एवं विभागाध्यक्ष डॉ अज़रा हुसैन ने शिक्षा विभाग के विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि सभी विद्यार्थी शिक्षक बनने जा रहे हैं और वह स्वयं अपने शिक्षकों के प्रति क्या सोचते हैं इसको समझना बहुत जरूरी है क्योंकि भविष्य में वह खुद अपने विद्यार्थियों से किस व्यवहार की अपेक्षा करेंगे

इस प्रतियोगिता में प्रथम स्थान यमुना बीएड चतुर्थ सेमेस्टर द्वितीय स्थान श्याम सुंदर एम एड द्वितीय सेमेस्टर तृतीय स्थान टिकेंद्र साहू एमएड- चतुर्थ सेमेस्टर प्राप्त किया. प्रथम पुरस्कृत छात्रा कुमारी यमुना ने अपने कविता के माध्यम से अपने विचारो की प्रस्तुति दी… भूत भविष्य वर्तमान की बातें ,वो हमको है बोध कराते, डगमगाते हुए  इन कदमों को, पल लेते  संभल गुरूजी. द्वितीय पुरस्कृत छात्र शयाम सुन्दर ने  अपने विचारो में शिक्षक की महिमा महान होती है शिक्षक के बिन अधूरी वसुन्धरा रहती है शिक्षक से ही  अर्जुन और युधिष्ठिर जैसे नाम है  शिक्षकों की निंदा करने से दुर्योधन बदनाम है

तृतीय  पुरस्कृत छात्र टिकेंद्र  ने  अपने विचारो में कहा की आदर्शों की मिशाल  बनकर बाल जीवन संवारता शिक्षक, सादाबहार फूल सा खिल कर महकता और महकाता शिक्षक. निर्णायक के रूप में श्रीमती गीता सिंह ,श्री शंकराचार्य विद्यालय एवं डॉ दुर्गा शर्मा , विभागाध्यक्ष हिंदी सेठ रतनचंद सुराना, महाविद्यालय दुर्ग रही

प्राचार्य

डॉ हंसा शुक्ला

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