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स्वरूपानंद महाविद्यालय में ‘‘वर्तमान परिपेक्ष्य में योग एवं खेल का महत्व’’ विषय पर राष्ट्रीय वेबिनार

स्वामी श्री स्वरूपांनद सरस्वती महाविद्यालय हुडको भिलाई में खेल विभाग द्वारा ‘‘वर्तमान परिपेक्ष्य में योग एवं खेल का महत्व’’ विशय पर राष्ट्रीय वेबिनार का आयोजन किया गया। कार्यक्रम में मुख्य वक्ता के रूप में प्रो. अनुरोध सिंह सिसोदिया निर्देशक यू.जी.सी. एन.आर.डी.सी. एलएनआईपीई ग्वालियर व डाॅ. चंदन कुमार पासवान स.प्रा. शारीरिक शिक्षा पंचभुरा महाविद्यालय बानपुरा विश्वविद्यालय पंश्चिम बंगाल थे।
कार्यक्रम के उद्धेश्यों पर प्रकाश डालते हुये डाॅ. शमा ए. बेग विभागाध्यक्ष माईक्रोबायोलाजी ने कहा खेल और योग एक सिक्के के दो पहलू है खेल जहा शारीरिक विकास के लिये आवश्यक है वही योग मानसिक स्वास्थ्य व सर्वागींण विकास के लिये आवश्यक है। शरीर के स्वस्थ रहने से सामाजिकता व भावनात्मकता का विकास होता है।

वेबीनार के संयोजक श्री मुरलीमनोहर तिवारी क्रीडा अधिकारी ने कहा कि भारतीय संस्कृति में योग का महत्व प्राचीन समय से है आज कोरोना पेंडमिक में योग का महत्व पुनः परिलक्षित हो रहा है दिन के आधा घंटे अगर हम योग और खेल को दे तो हम निश्चित ही शारीरिक एवं मानसिक रूप स्वस्थ रहेंगे।

महाविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डाॅ. दीपक शर्मा ने अपने उद्बोधन में कहा कोविड-19 के कारण सब घर में है दिन भर घर में रहने के कारण डिप्रेशन के शिकार हो रहे है बच्चे अधिक समय तक मोबाईल में लगे रहते है इससें उनके स्वास्थ्य पर प्रतिकूल प्रभाव पढ़ रहा है बच्चे खेलना भूल गये है उन्होने खेला एवं योग को दैनिक जीवन का हिस्सा बनाने बात कही।

प्राचार्य डाॅ. हंसा शुक्ला ने बताया खेलने के लिये आवश्यक नहीं है हमें किसी खेल में महारत हासिल हो बल्कि हम पारंपरिक एवं बचपन में खेले जाने वाले खेलो को खेल कर भी स्वस्थ्य रह सकते है खेल से शरीर में स्फूर्ति आती है व मन एकाग्रचित होता है। खेल से व्यक्ति में समन्वय और नेतृत्व कौशल का विकास होता है। पहले यह धारणा थी ‘पढ़ोगें लिखोगें तो बनोगे नवाब, खेलोगें कुदोगें तो होंगे खराब’ अब यह धारणा बदली है अब खेल में भी कैरियर व रोजगार की अपार संभावनायें है।

मुख्य वक्ता डाॅ. अनुरोध सिसोदिया ने स्वस्थ जीवन के लिये योग का महत्व विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा स्वस्थ शरीर का कोई विकल्प नहीं है जिसका आहार-विहार, सोना-जागना सही है वही स्वस्थ है इसलिए कहा गया है ‘‘पहला सुख निरोगी काया’’ योग व्यक्ति के सर्वागींण विकास के लिये आवश्यक है योग से चित की वृतियों का परिष्कार होता है उन्होंने बताया योग कसरत नहीं है अगर यह कसरत होता तो ‘नट’ सबसे बड़ा योगी होता। उन्होंने स्वस्थ रहने के लिये भोजन, पानी पर ध्यान देने की बात कही व अष्ठांग के बिना योग बिना पंख के पक्षी के समान है बताया। उन्होने कहा अगर हम यम-नियम का पालन नहीं कर रहे है तो योग में जा ही नहीं सकते उन्होंने अनुलोम विलोम का महत्व बताते हुये कहा बहत्तर हजार नाड़ियों के शोधन के लिये अनुलोम विलोम आवश्यक है तनाव में रहने से शरीर पर नकारात्मक प्रभाव पड़ता है इसलिये हमें चिंता नहीं चिंतन करने की आवश्यकता है हम हमेशा परमेश्वर के कैमरे की निगरानी में है यह हमेंशा याद रखना चाहिये।

डाॅ. चंदन कुमार पासवान ने खेल हमारे दैनिक जीवन का हिस्सा है विषय पर अपने विचार व्यक्त करते हुये कहा पहले हम  घर के बाहर व अंदर खेलते थे इस कारण शारीरिक व मानसिक रूप से स्वस्थ रहते थे आज के समय में 200 मिलियन से अधिक बच्चे ओवर वेट है तनाव व अवसाद से ग्रस्त व ह्रदय रोग से पीड़ित है अगर हमें स्वस्थ रहना है तो अपने दैनिक क्रियाकलाप मे खेल को आत्मसात करना होगा खेल से आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता का विकास होता है आज कोविड-19 के कारण बैठ कर कार्य करने की प्रवृत्ति 28 प्रतिशत बढ़ गयी है अपाच्य खाना बढ़ गया है इससे हमारे पाचन तंत्र पर बुरा प्रभाव पड़ता है हम सोशल डेस्टेंसिंग का पालन करते हुए अपने नियमित व्यायाम रख सकते है चाहे तो छत में भी कसरत सकते है।

कार्यक्रम में अंचल के विभिन्न महाविद्यालयो के विद्यार्थियों व शोधार्थियों ने भाग लिया। कार्यक्रम में मंच संचालन व धन्यवाद ज्ञापन डाॅ. शमा ए. बेग विभागाध्यक्ष माईक्रोबायोलाजी ने किया।

प्राचार्य
डाॅ. हंसा शुक्ला

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