Tuesday, July 27संस्थापक, प्रधान संपादक, स्वामी श्री नवनीत जगतरामका जी
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श्रृंखला यादव की पुण्यतिथि, भिलाई की बेटी को नहीं मिला अभी तक न्याय

कभी-कभी सच में आश्चर्य होता है कि हम सब मनुष्य है या नहीं है ?
इस देश की न्याय व्यवस्था पर गहरा शोक तो होता ही है…. दुख और पीड़ा एक साथ मन में घर जाते हैं जब मैं देखती हूं एक नन्ही सी लड़की (जिसकी कहीं कोई गलती नहीं) उसे बेदर्दी से कत्ल किया जाता है और उसकी मां को जी भर के रोने का भी समय नहीं दिया जाता।
उसकी मां को पोस्टर लेकर, कैंडल लेकर, चिट्ठियां लिख कर सड़कों पर निकलना पड़ता है ….अपनी लड़की के लिए न्याय की गुहार लगाते हुए।
नेता,मंत्री,पुलिस,जज, वकील सब आंखें मूंद लेते हैं ।सबको उस आरोपी के 5 दिन के नाबालिग होने के अधिकारों की याद आ जाती है परंतु यह लड़की जो अपने जीवन के सारे अधिकार छोड़कर किसी की विकृत मानसिकता का शिकार हो गई इसके अधिकारों की याद करने की  किसी को जरूरत नहीं रहती।
हम सबको शर्म से डूब मरना चाहिए
जब-जब ममता यादव को हम पोस्टर लेकर सड़क के कोने में खड़ा देखते हैं
हम सबको शर्म से डूब मरना चाहिए
जब जब हम ममता यादव और उसके पति को चिट्ठियां ले लेकर नेताओं के दरवाजे पर जाता देखें
हम सब को शर्म आनी चाहिए
 जब सारे सबूतों के और साक्ष्यों के मिलने के बाद गिरफ्तार आरोपी को कोर्ट से जमानत दे दी जाती है
 हम सब को शर्म आनी चाहिए
जब ममता यादव जी को किसी चौक के नाम को श्रृंखला का नाम देने के लिए  बोर्ड खुद बनवाना पड़े
हम सब को शर्म आनी चाहिए
जब हम एक मां को पूरी तरह चीख चीख कर रोने का भी मौका ना दें
हम सब को शर्म आनी चाहिए
जब ममता जी बच्चियों को जागरूक करने के लिए खुद स्कूलों के सामने अभियान चलाएं
आज श्रृंखला को गए 1 साल हो गए
1 साल के 365 दिन के  24 घंटो के एक-एक क्षण ममता जी की जो मौत हुई उस मौत का जिम्मेदार कौन है ?
बच्चे की इस दुनिया में आने की खबर से लेकर उसके एक-एक क्षण बढ़ने की बातों को याद करते हुए  बच्ची के पिता जो दुख से मूक हो गए..उनकी अव्यक्त पीड़ा का जिम्मेदार कौन है?
श्रृंखला के भाई-बहन ,सारे रिश्तेदार जब आरोपी को जमानत पर खुलेआम दांत निकाल कर घूमते देखते हैं तब उनकी आंखों में से जो खून निकल आता है उसका जिम्मेदार कौन है ?
मैं सारी महिलाओं से कहना चाहूंगी अपने बच्चों की परवरिश पर ध्यान देने के साथ उनके पल पल का हिसाब रखें
हमारे सपने पूरे नहीं होते तो मत होने दीजिए लेकिन बच्चे की हर कारगुजारी पर अपनी तीखी नजर डाल के रखिए
वह क्रिमिनल माइंड वाला लड़का 3 दिन तक अपनी गाड़ी की डिक्की में कुल्हाड़ी लेकर घूमता है और किसी लड़की का खून करने का प्लान करता है उसके चेहरे की तरफ क्या उसके मां ने 3 दिन में एक बार भी नहीं देखा ???
मेरे बेटे में कुछ बदलाव आ रहा है इस विषय पर उन्होंने एक बार भी नहीं सोचा ???
और तो और इतने बड़े एक नृशंस घृणित कार्य को अंजाम देने के बाद आराम से घर आकर खाना खाकर सो रहा है तब भी उसमें कोई बदलाव उसकी मां को नहीं दिखा ??
इसकी जिम्मेदार तो वह औरत ही हुई जिसने उसे पैदा किया ,उसे पाला और उसकी हरकतों पर ध्यान नहीं दिया !
आश्चर्य !उस लड़के की मां अभी तक शर्म से नहीं मरी?
बल्कि उसके पिता उसकी जमानत करवा रहे हैं…. उसे घर में रख रहे हैं।
 मेरे गले में आंसुओं का गोला अटक रहा है और उसमें दुख कम और क्रोध इतना ज्यादा है …..
कि कम से कम मैं ममता जी से तो नहीं कह पाऊंगी कि
 धैर्य रखिए…. एक दिन सब ठीक हो जाएगा
श्रृंखला की नन्ही परियों सी सखियों ने यह वीडियो बनाया है। इसे देखें …फेसबुक पर शेयर करें और एक बार और हम शर्मिंदा हों कि इन बच्चियों को भविष्य के सपनो की जगह न्याय मांगना पड़ रहा है….

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