Saturday, July 24संस्थापक, प्रधान संपादक, स्वामी श्री नवनीत जगतरामका जी
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18 जून : वीरांगना झाँसी की रानी लक्ष्मीबाई का बलिदान दिवस

रायपुर। खूब लड़ी मर्दानी वह तो झाँसी वाली रानी थी. वर्ष 1835 18 नवंबर को झाँसी की रानी लक्ष्मी बाई जी का काशी में जन्म हुआ था, वो बचपन से ही तलवार बाजी, घुड़सवारी, तीरंदाजी आदि युद्ध कला में निपुण हो गयी थी.

उनका उपनाम मणिकर्णिका था, सब उन्हें मनु बाई के नाम से पुकारते थे. वर्ष 1850 में झाँसी के राजा गंगाधर राव से उनका का विवाह हुआ। फिर कुछ ही वर्षो में महाराजा का निधन हो गया था फिर भी महारानी घबराई नहीं,  दत्तक पुत्र को अंग्रेज़ो ने राजगद्दी के अस्वीकृत कर दिया।

फिर क्या था झाँसी की रानी ने अपनी तलवार उठाई और अंग्रेज़ो के खिलाफ युद्ध छेड़ दिया। वे अकेले ही अपनी पीठ के पीछे दामोदर राव को कसकर घोड़े पर सवार हो, अंगरेजों से युद्ध करती रहीं। अंग्रेज़ भी उनकी बहादुरी का लोहा मान चुके थे और घबराते थे।

18 जून 1858 को ग्वालियर का अंतिम युद्ध हुआ और रानी ने अपनी सेना का कुशल नेतृत्व किया। अंततः उन्होंने वीरगति प्राप्त की। ऐसी महान भारत को गौरवान्वित करने वाली झांसी की रानी वीरांगना रानी लक्ष्मीबाई वास्तविक अर्थ में आदर्श वीरांगना थीं।

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