रायपुर स्मार्ट सिटी : अब नाले के पानी से गैस बनाकर ठेलों, गुमटियों और वेंडिंग जोन में सप्लाई की जाएगी

रायपुर | अगस्त 2018 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने नाले के पानी से निकलने वाली गैस से चाय बनाने का जिक्र किया था। अब उसी को बड़े प्रोजेक्ट के रूप में रायपुर स्मार्ट सिटी लिमिटेड शुरू करने जा रहा है। इसके जरिए बड़े नालों में बहने वाले सीवरेज के पानी से मीथेन गैस बनाई जाएगी। इसे रसोई गैस के रूप में इस्तेमाल किया जाएगा और इसकी सप्लाई ठेलों, गुमटियों और वेंडिंग जोन में करने की संभावना है। फिलहाल इसे पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में रायपुर के मारवाड़ी श्मशान घाट के पास शुरू किया गया है।

मीथेन गैस के व्यवसायिक उपयाेगिता को लेकर प्रयोग

दरअसल, स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सीवरेज से निकलने वाली मीथेन गैस के व्यवसायिक उपयोग की संभावनाओं पर काम किया जा रहा है। इसी के तहत पायलेट प्रोजेक्ट के रूप में रायपुर के मारवाड़ी श्मशान घाट के पास मीथेन गैस पैदा करने का प्रयोग किया गया है। अधिकारियों के मुताबिक, प्रयोग सफल होने पर बहते नाले के पास संचालित चाय ठेलो, गुमटियों व अन्य वेडिंग जोन में ईंधन गैस के रूप में इसका उपयोग किया जा सकता है। गैस बनाने की यह प्रक्रिया अत्यधिक सरल और न्यूनतम व्यय पर आधारित है।

इस तरह से कर रहे हैं प्रयोग

नाले से 60-70 प्रतिशत मीथेन गैस निकलती है। प्रोजेक्ट के तहत फिलहाल दो प्लास्टिक के ड्रमों का सेट बनाया गया है। इन ड्रमों को एक अलग केस में रखा गया और फिर रस्सियाें और तारों से बांधकर खुले नाले में डुबो दिया गया। इससे ड्रमों के अंदर गैस एकत्र होने लगती है। इसके बाद गैस के दबाव से ड्रम ऊपर उठने लगते हैं। इस गैस को लोहे की पाइपों की मदद से निकाल कर स्टोव से जोड़ा जाएगा।

एक वाल्व की मदद से गैस को आवश्यकता अनुसार इस्तेमाल किया जा सकता है। यह प्रक्रिया अत्यंत ही सरल और न्यूनतम लागत पर आधारित है। इसमें सीवरेज में मिश्रित मीथेन को पृथक कर इसका उपयोग रसोई गैस के रूप में किया जा सकता है। लघु व्यवसायी स्वयं इसका निर्माण कर ईंधन गैस पर होने वाले व्यय को कम कर सकेंगे।

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