रायपुर : सरकार की मंशा सभी निरस्त दावों पर पुनर्विचार कर पात्र दावाकर्ताओं को वनाधिकार पत्र वितरित करना: डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम

आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास मंत्री डॉ. प्रेमसाय सिंह टेकाम ने कहा है कि राज्य सरकार की मंशा है कि सभी निरस्त दावों पर पुनर्विचार करके निर्धारित प्रक्रिया का पालन करते हुए सभी पात्र दावाकर्ताओं को वनाधिकार पत्र प्रदान किया जाए। डॉ. टेकाम ने इस आशय के विचार विगत दिवस वन अधिकार मान्यता अधिनियम-2006 के क्रियान्वयन के संबंध में आयोजित जनपद पंचायत सदस्यों के प्रशिक्षण सह कार्यशाला में वयक्त किए। ठाकुर प्यारेलाल पंचायत एवं ग्रामीण विकास संस्थान निमोरा में वीडियो कांफ्रेसिंग के माध्यम से प्रशिक्षण कार्यशाला में रायपुर, बेमेतरा और दुर्ग को छोड़कर शेष 25 जिलों में गठित उपखण्ड स्तरीय समितियों में नवनिर्वाचित एवं नामनिर्देशित जनपद पंचायत के 97 सदस्य उपस्थित थे। डॉ. टेकाम वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग में अपने निज निवास कार्यालय से शामिल हुए।

डॉ. टेकाम ने जनपद पंचायत के सदस्यों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान में राज्य शासन इस अधिनियम को गंभीरता से ले रहा है। अब तक प्रदेश में लगभग 8 लाख 46 हजार से अधिक व्यक्तिगत और सामुदायिक वन अधिकार दावों में से लगभग 4 लाख 47 हजार वन अधिकार पत्र वितरित किए जा चुके है। इसके साथ ही लगभग 3 लाख 85 हजार दावे निरस्त भी हुए है। उन्होंने कहा कि शासन की मंशा है कि सभी निरस्त दावों पर पुनर्विचार कर निर्धारित प्रक्रिया अनुसार सभी पात्र दावाकर्ताओं को वन अधिकार पत्र वितरित किए जाए। डॉ. टेकाम ने कहा कि सामुदायिक वन अधिकार पत्रों के प्रकरणों के निराकरण में गति लाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक संबंधित ग्राम में न्यूनतम 4 से 5 सामुदायिक वन अधिकार प्रदान किए जाएं।

सचिव आदिम जाति तथा अनुसूचित जाति विकास विभाग श्री डी.डी. सिंह ने कार्यशाला को संबोधित करते हुए वन अधिकार की मूलभूत जानिकारियों से अवगत कराया। उन्होंने अपेक्षा की कि नवनिर्वाचित सदस्य निचले स्तर पर क्रियान्वयन में अपनी सक्रिय भूमिका का निर्वाहन करेंगे, ताकि जिलों में विशेषकर ग्राम स्तर पर इस अधिनियम के क्रियान्वयन में आने वाली कठिनाईयों को दूर किया जा सके।

प्रशिक्षण में विशेष कर्तव्यस्थ अधिकारी मुख्यमंत्री सचिवालय श्री एस.एल.कुंजाम, विभाग के उपायुक्त श्री संजय गौड़, पेसा समन्वयक श्री प्रखर जैन, विशेषज्ञ श्री आलोक शुक्ला द्वारा वन अधिकार अधिनियम एवं नियमों के क्रियान्वयन का समाधानकारक उत्तर भी दिया गया। प्रशिक्षण सहभागियों ने इस प्रशिक्षण को अपने फीडबैक में बहुत उपयोगी बताया। प्रशिक्षण में श्री अश्वनी कांगे कांकेर ने भी अपने अनुभव साझा किए।