ट्यूशन फीस की आड़ में एडमिशन, स्पोटर्स और कंप्यूटर फीस वसूल रहे स्कूल

निजी स्कूलों पर मनमानी फीस वसूली करने के लगने वाले आरोप जांच में सच होते दिख रहे हैं। शहर के कुछ नामचीन स्कूलों ने छात्रों से ट्यूशन फीस के साथ कई प्रकार के शुल्क वसूल लिए हैं। जांच दल ऐसे स्कूलों से बढ़ाकर ली गई फीस लौटाने का पत्र लिखित में ले रहे हैं। कोरोना काल में अभिभावकों के कामकाज के साथ कमाई पर असर पड़ा है।

रेगुलर अध्यापन बंद होने के बावजूद कतिपय निजी स्कूलों के द्वारा ऑनलाइन पढ़ाई के नाम पर ज्यादा शुल्क लेने का आरोप लगाते पालक और छात्र संगठन लगातार घेराव-प्रदर्शन कर ज्ञापन सौंप रहे हैं। दूसरी ओर प्राइवेट स्कूल अपने शिक्षकों व स्टाफ को सैलरी न दे पाने का तर्क दे रहे हैं। इन विवादों के बीच जिला शिक्षा अधिकारी ने शिक्षा विभाग के अधिकारियों के 18 दल गठित किए हैं, जो पूरे मामले की पड़ताल कर रहे हैं। दो सितंबर को गठित इन दलों को वैसे तो तीन दिन के भीतर अपनी जांच रिपोर्ट प्रस्तुत करने कहा गया था लेकिन मंगलवार तक एक भी दल की रिपोर्ट शिक्षा विभाग को नहीं मिली है।

शासन का आदेश केवल ट्यूशन फीस लेने का है जबकि कुछ बड़े प्राइवेट स्कूलों ने इसकी आड़ में एडमिशन, कंप्यूटर और स्पोटर्स फीस की भी वसूली कर ली है। एक ही छात्र से कई क्लास में एडमिशन फीस ली गई है। यही नहीं सत्र 2020-21 के लिए बढ़ाई गई ट्यूशन फीस में भी खामियां पकड़ में आई हैं। स्कूलों ने मनमाने तरीके से इसे बढ़ा लिया है जबकि एक सत्र में ट्यूशन फीस में अधिकतम 10 फीसद की बढ़ोत्तरी करने का प्रावधान होने की बात अधिकारी कर रहे हैं। खेल शुल्क समेत दीगर शुल्कों की वसूली भी कर ली गई है। ऑनलाइन शिक्षा देने के नाम पर बड़ी रकम वसूलने की बात अधिकारी कह रहे हैं। यहां उल्लेखनीय है कि कोरोना के चलते मार्च के दूसरे पखवाड़े से सभी स्कूल बंद हैं। कुछ पालकों ने पिछले सत्र की फीस भी अदा नहीं की है। शिक्षा सत्र में अब तक स्कूल बंद होने से कई स्कूल आर्थिक समस्याओं से जूझ रहे हैं। पिछले दो माह में बच्चों के अभिभावकों को मोबाइल पर मैसेज भेजकर कुछ स्कूलों ने नए सत्र की फीस ले ली है। पालक इसे लेकर मोर्चा खोले हुए हैं।

दूसरे काम में खर्च कर रहे शुल्क

अनेक स्कूलों की जांच में यह गड़बड़ी पाई गई है कि छात्रों से शिक्षा के एवज में ली जाने वाली राशि को उन्होंने दीगर कामों में खर्च कर दिया है। उल्लेखनीय है कि प्राइवेट स्कूलों का संचालन नो प्रॉफिट नो लॉस के कंसेप्ट पर होना चाहिए। अभिभावकों का आरोप है कि कुछ स्कूलों ने इसे व्यवसाय में बदल दिया है। जांच अधिकारी ऐसे स्कूलों के मासिक टर्नओवर की फाइल देखकर दंग हो गए हैं। कुछ ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि बड़ी गड़बड़ी है। ऐसे स्कूलों ने बड़ी रकम दूसरे कार्यों में खर्च की है।

सात बिंदुओं पर हो रही जांच

1. वर्ष 2019-20 तथा 2020-21 की शुल्क दर।

2. स्कूलों के द्वारा पिछले सालों के लंबित शुल्क के बारे में क्या कार्यप्रणाली अपनाई गई है?

3. कोरोना काल में जब अध्यापन बंद है तो क्या संस्थाओं के द्वारा पालकों से ऑनलाइन तथा स्मार्ट क्लास के नाम पर शिक्षण शुल्क के अतिरिक्त शुल्क लिया जा रहा है?

4. शाला परिसर से पुस्तकें व अन्य शैक्षणिक सामग्रियों के विक्रय की जांच।

5. संस्थाओं द्वारा किन-किन कक्षाओं में प्रवेश शुल्क लिया जा रहा है?

6. शालाओं द्वारा लिए जा रहे शुल्क की रसीद बुक, लेजर बुक, कैश बुक एवं मदवार व्यय विवरण पंजी समेत संधारित अभिलेखों की जांच।

7. क्या इन स्कूलों के द्वारा आरटीई के तहत प्रवेशित बच्चों से शुल्क लिया जा रहा है?

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