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कोण्डागांव : मक्का प्रसंस्करण प्लांट हेतु मक्का क्रय के लिये नई रणनीति होगी तैयार

कोण्डागांव, 11 अगस्त 2021/* बुधवार को कलेक्ट्रेट सभाकक्ष भवन में मां दंतेश्वरी मक्का प्रसंस्करण एवं विपणन सहकारी समिति कोकोड़ी की आमसभा कलेक्टर पुष्पेन्द्र कुमार मीणा की अध्यक्षता में आयोजित की गई थी। इस सभा में समिति के सदस्यों, अंशधारी ग्रामीणों तथा कृषकों के साथ विभागीय अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इस बैठक में मक्का प्रोसेसिंग प्लांट द्वारा स्टार्च के स्थान पर इथेनाॅल निर्माण की स्थापना, डूबत व्यय की प्रतिपूर्ति हेतु शासन द्वारा की जाने वाली सहायता, निर्माण संस्था के चयन, अंकेक्षकों की नियुक्ति, सदस्यता प्रदाय किये जाने, पुनः टेण्डर की प्रक्रिया एवं लाभांशों के वितरण के संबंध में चर्चा की गई।

*सहकारी माॅडल द्वारा बने प्लांट से अन्य कृषक भी होंगे प्रेरित-कलेक्टर*
इस अवसर पर कलेक्टर ने कहा कि यह मक्का प्रसंस्करण प्लांट अपने आप में एक माॅडल प्लांट के रूप में बनकर उभरेगा। इसके निर्माण में कृषकों द्वारा सहकारी तौर पर किये गये प्रयास से राज्य के अन्य हिस्सों में भी कृषकों को प्रेरणा मिलेगी और वे भी खाद्यान्नों के प्रसंस्करण कर अधिक से अधिक लाभ प्राप्ति हेतु प्रेरित होंगे। इसके साथ ही उन्होंने कहा कि जिला प्रशासन द्वारा रबी एवं खरीफ फसल वर्ष में मक्के की खरीदी हेतु राज्य शासन से अनुमोदन किया था। जिसे कैबिनेट द्वारा मंजूरी प्राप्त हो गई है। अब मक्के की खरीदी हेतु नई प्रणाली विकसित की जायेगी ताकि हर किसान से मक्का उपार्जित किया जा सके। मक्का प्रसंस्करण प्लांट का निर्माण प्रारंभ होने के आठ महीनों में बनकर तैयार हो जायेगा। जिसके पश्चात् प्लांट की खपत एवं अतिरिक्त मक्के की खरीदी हेतु नवीन व्यवस्था का निर्माण किया जायेगा।

*डूबंत व्यय की प्रतिपूर्ति हेतु राज्य शासन को दिया जायेगा प्रस्ताव*
इस अवसर पर आमसभा में आये कृषकों द्वारा लाभांश वितरण के संबंध में पूछे जाने पर कलेक्टर द्वारा बताया गया कि कृषकों द्वारा प्लांट निर्माण हेतु दिया गये अंश की 6.83 करोड़ रूपये की राशि को समिति द्वारा बैंक में सावधि जमा के रूप में रखा गया है। इसके पश्चात् कृषकों द्वारा स्टार्च उत्पादन हेतु बनी संरचनाओं के विषय पर चिंता व्यक्त की गई। जिसपर समिति के प्रबंध संचालक केएल उईके ने बताया कि अब तक 13.71 करोड़ रूपये की राशि निर्माणों में व्यय की गई है। जिसमें तकनीकी सलाहकार एजेंसी की फीस, बाउण्ड्री वाॅल निर्माण व्यय, भूमि समतलीकरण व्यय, प्लांट मशीनरी एवं बाॅयलर निर्माण व्यय शामिल हैं। इनमे से भूमि समतलीकरण, प्लांट मशीनरी एवं बाॅयलर निर्माण हेतु किये गये व्ययों को इथेनाॅल में ही प्रयुक्त कर लिया जायेगा एवं ऐसे निर्माण जिनकी प्रतिपूर्ति संभव नहीं है उन डूबंत व्ययों के वहन हेतु राज्य शासन को आमसभा के निर्णयानुसार प्रस्ताव दिया जायेगा।

*इथेनाॅल निर्माण से पांच वर्षों में 88 करोड़ का होगा लाभ*
कृषकों द्वारा स्टार्च के स्थान पर इथेनाॅल उत्पादन से प्लांट को होने वाले लाभों के संबंध में भी पूछा गया। जिसपर प्रबंध संचालक ने बताया कि तीन वर्ष पूर्व जब प्लांट स्थापना का निर्णय लिया गया था तब से अब तक राष्ट्रीय एवं अंतर्राष्ट्रीय बाजारों में स्टार्च का मूल्य अधिक था परन्तु बढ़ती प्रतिस्पर्धा से इसकी मांग घट गई एवं प्लांट निर्माण हेतु ऋण प्राप्ति में भी दिक्कतें आ रही थी। जिससे प्लांट को घाटा होने की संभावना थी। जिसके उलट इथेनाॅल प्लांट में भारत सरकार के दिशा निर्देशानुसार कम ब्याज दरों एवं सरल किश्तों में ऋण बैंकों द्वारा प्राप्त होने के साथ ही भारत सरकार की पेट्रोल में इथेनाॅल मिश्रण हेतु बनी नवीन नीति अनुसार होने वाले लाभों के अतिरिक्त पेट्रोलियम तेल उत्पादक कम्पनियों द्वारा निर्मित इथेनाॅल को सीधे प्लांट से उठाये जाने से ट्रांसपोर्टेशन का खर्च भी बचेगा एवं कम्पनियों द्वारा भुगतान भी 21 दिनों में किया जायेगा जिससे प्रारंभिक वर्ष से ही अंशधारियों को लाभ प्राप्त होगा। आकड़ों के विश्लेषण द्वारा विशेषज्ञों ने बताया है कि आगामी पांच वर्षों में प्लांट को 88 करोड़ का लाभ प्राप्त होगा। जिसका वितरण अंशधारियों को लाभांश के रूप में किया जायेगा। वर्तमान में मक्के की उपलब्धता के आधार पर 80 किलो लीटर प्रतिदिन की क्षमता के संयंत्र की स्थापना की जायेगी। जिसे भविष्य में 100 किलो लीटर प्रतिदिन तक विस्तृत किया जायेगा।

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