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स्वरूपानंद महाविद्यालय में अंतर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के उपलक्ष्य में परिचर्चा

स्वामी श्री स्वरूपानंद सरस्वती महाविद्यालय हुडको, भिलाई में 25 नवम्बर अन्तर्राष्ट्रीय महिला हिंसा उन्मूलन दिवस के अवसर पर परिचर्चा का आयोजन महाविद्यालय के महिला सेल व शिक्षा विभाग के संयुक्त तात्वावधान में किया गया।

कार्यक्रम की संयोजिका सहायक प्राध्यामिका श्रीमती उषा साहू ने कार्यक्रम के उद्धेश्यों पर प्रकाश डालते हुए कहा कि पूरे विश्व में महिलाओं के प्रति हिंसा, शोषण व उत्पीड़न की बढ़ती घटनाओं के प्रति जागरूकता करने की आवश्यकता है साथ ही अधिनियमों की जानकारी दी।

शिक्षा विभागा के बी.एड. प्रथम सेमेस्टर के विद्यार्थियों ने परिचर्चा में भाग लिये इस परिचर्चा में रोशन पात्रे ने कहा महिलाओं को हिंसा के उन्मूलन के प्रति जागरूक करने की आवश्यकता हैं। महिलाओं को आत्मनिर्भर होना भी जरूरी है। किसी बात पर सहमति न होना, अशिक्षित होना, आर्थिक स्थिति भी मुख्य कारण हैं। प्रीति सिंह ने कहा 1981 में नारीवादी कार्यकताओं ने हिंसा के खिलाफ आंदोलन छेडा आजतक महिलाओं को जागरूक करने के लिए कार्यक्रम आयोजित किये जा रहे है।

इन्दुसाहू ने विचार व्यक्त करते हुए कहा कि फरवरी 2000 को संयुक्त राष्ट्र द्वारा अन्तर्राष्ट्रीय दिवस के रूप में मान्यता दी जिसमें महिलाओं को जागरूक करने का कार्य करती है जिससे कि महिला हिंसा की शिकार न हो। रानी  ने अपने विचार व्यक्त करते हुए कहा 1993 मे यूनाइटेड महासभा में यह कदम उठाया गया जिसमें नौकरी पेशा महिलाओं व पुरूषों में वेतन पर्याप्त अन्तर होता है नियम व कानूनों की जानकारी होनी चाहिए। तनु साहू ने आकड़ों पर प्रकाश डालते हुए बताया विश्व मे तीन में से एक महिला इस हिंसा का शिकार होती है।
विश्व में 71 प्रतिशत महिला हिंसा से पीड़ित है। हर दिन एक सौ तिरालीस महिलाओं को परिवार के दूसरे सदस्य द्वारा मार दिया जाता है ।
बबली यादव- इस दिन दुनियाभर में महिलाओं को जागरूक करने के लिए यह अन्तर्राष्ट्रीय महिला हिंसा दिवस का आयोजन पच्चीस नवम्बर को हर वर्ष किया जा रहा हैं जिससें जागरूकता फैलाना मुख्य उद्धेश्य है।

महाविद्यालय के मुख्य कार्यकारी अधिकारी डॉ. दीपक शर्मा ने कार्यक्रम की सराहना करते हुए कहा कि यह दिवस विभिन्न मुद्दे के प्रति महिलाओं को जागरूक करने के लिए मनाया जाता हैें।

महाविद्यालय की प्राचार्य डॉ. हंसा शुक्ला ने कहा कि यह दिन महिलाओं के खिलाफ हिंसा को लिंग-आधारित हिंसा का एक रूप है जिसके परिणाम स्वरूप महिलाओं को शारीरिक, यौन व मानसिक नुकसान होता है। महाविद्यालय की उपप्राचार्य डॉ. अज़रा हुसैन ने कहा महिलाओं की सुरक्षा और सशक्तिकरण के लिए सर्वप्रथम महिलाओं को उनके अधिकारों व विभिन्न अधिनियमों की जानकारी होना आवश्यक है।

सहायक प्राध्यापक मंजूषा नामेदव ने कहा महिलाओं के प्रति हिंसा शारीरिक, मानसिक दोनों तरीके से इस तरह की ंिहंसा की रोकथाम के लिये सभी महिलाओं को जागरूक करना उनके अधिकारों के प्रति हिंसा उन्मूलन संबंधी कानूनों की जानकारी प्रदान करने पर विशेष बल दिया। कार्यक्रम का संचालन एवं धन्यवाद ज्ञापन संयोजिका श्रीमती उषा साहू ने दिया।

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