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एरोमेटिक कोण्डानार परियोजना ग्राम मयूरडोंगर में हुआ शुभारंभ

कोण्डागांव, 11 अगस्त 2021. आज विकासखण्ड कोण्डागांव के एफआरए क्लस्टर ग्राम मयूरडोंगर में ‘एरोमेटिक कोण्डानार’ (सुगंधित कोण्डानार) परियोजना को विधिवत शुभारंभ विधायक नारायणपुर श्री चन्दन कश्यप के करकमलों से हुआ।

इस मौके पर अपने उदबोधन में उन्होने कहा कि सामुदायिक वन अधिकार के तहत् मयूर डोंगर ग्राम को शामिल किया गया है तकि इस पिछड़े ग्राम पंचायत में कृषि, उद्यानिकी, के्रडा, पशुपालन एवं मत्स्य विभाग के समस्त योजनाओं को एक साथ क्रियान्वित कर विकास के नये माडल के स्थापना किया जा सके। अपने ढ़ाई वर्ष के शासन काल में सरकार ने पिछड़े ग्रामों के सर्वागिण विकास के ध्येय को सर्वोपरि रखा है और उसकी तमाम योजनाए मुख्यतः ग्रामीणों क्षेत्रों पर फोकस रही है। अतः समय आ गया है कि ग्रामीण जन इन योजनाओं में स्वतः भागीदारी दर्शाए क्यूकिं प्रायः यहां देखा जाता है कि ग्रामीण सहभागिता के बिना शासकीय योजना का परिणाम अपेक्षित नहीं रहा है। अतः इस मानसिकता से उबरना जरूरी है।

इसके आगे उन्होने ’एरोमेटिक कोण्डानार’ का जिक्र करते हुए कहा कि सुगंधित एवं औषधीय पौधे का रोपण उसी कृषि नवाचार का हिस्सा है जिसे परपंरागत कृषि से व्यवसायिक कृषि की ओर कदम बढ़ाया जा सके। इस कृषि की सबसे बड़ी खासियत यह है कि यह फसल तीन महिने में तैयार होगी और जिला शासन द्वारा जिस संस्था से अनुबंध किया गया है। उन्ही के द्वारा उठाव और विपणन किया जायेगा। इस प्रकार इससे होने वाले आमदनी का सीधा लाभ किसानों को होगा और इस सुनहरे अवसर का लाभ प्रत्येक किसान को उठाना चाहिए।
कलेक्टर श्री पुष्पेन्द्र कुमार मीणा ने इस मौके पर कहा कि ’एरोमेटिक कोण्डानार’ प्रशासन की एक नई पहल है और एफआरए क्लस्टर ग्रामों के अंतर्गत जिले में मयूरडोंगर और गम्हरी में सुगंधित और औषधी पौधे लेमनग्रास, पचैली, पामरोजा, विटेयर, अमाड़ी, तुलसी जैसे पौधे के रोपण के लिए स्थानीय किसानों को प्रेरित किया जा रहा है। ऐसी भूमि जहां धान की उपज कम हो या नही के बराबर हो वहां ऐसे पौधों की किसानों के लिए अतिरिक्त आय का जरिया बना सकती है। अगर लेमनग्रास की बात करे तो एक एकड़ की उपज में एक लाख की आमदनी निश्चित है। इस प्रकार बस्तर संभाग के अन्य जिलों में भी सुगंधित और औषधी पौधों की कृषि के प्रति उत्साह देखा जा रहा है। अतः स्थानीय कृषकों को भी इसमें रूचि लेकर अपनी आर्थिक खुशहाली का मार्ग चुनना चाहिए।

इसके पूर्व उपसंचालक कृषि देवेन्द्र रामटेके ने विभाग द्वारा डीएमएफ मद से जिले में सुगंधित और औषधी पौधों की खेती कार्ययोजना की संक्षिप्त रूप से जानकारी दी। इसके अलावा अन्य जनप्रतिनिधियों ने भी शासन की योजनाओं मंें शत् प्रतिशत भागीदारी के लिए ग्रामीणों से आग्रह किया। उल्लेखनीय है कि ग्राम मयूरडोंगर में 15 एकड़ पर लेमनग्रास के पौधे लगाये जायेेंगें साथ ही 182 एकड़ में अमाड़ी पौधों का रोपण किया गया है। लेमनग्रास के सत् का उपयोग मुख्यतः सुगंधित तेल, मच्छर रोधी सामग्री एवं आयुर्वेदिक दवाओं में होता है। जबकि अमाड़ी पौधों के पत्तों से चाॅकलेट, चाय, पाउडर, शरबत तथा खाने की सामाग्रियों निर्मित की जाती है। इस मौके पर अध्यक्ष जिला पंचायत श्री शिवलाल मण्डावी, उपाध्यक्ष मनोज सेठिया, सदस्य जिला पंचायत रेश्मा दीवान, सरपंच मयुर डोंगर सगरबत्ती नेताम, सरपंच बम्हनी श्री जागेश्वर कोर्राम, सहायक संचालक कृषि श्री बी.के.शर्मा, अनुविभागीय अधिकारी कृषि श्री उग्रेश देवांगन सहित विभागीय कर्मचारी एवं ग्रामीण जन उपस्थित थे।

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