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कोंडागांव : नेत्र रक्षक की भूमिका में है जिले की स्वास्थ्य टीम

चिकित्सा सूत्रों से प्राप्त जानकारी अनुसार जिला चिकित्सालय में अप्रैल से जुलाई 2021 तक 177 कैटरेक्ट (मोतियाबिंद), ग्लूकोमा के 03 और माईनर ओटी के 12 एवं आंखों में लगे चोट से ‘कार्निया‘ के 05 आॅपरेशनों को सफल अंजाम दिया गया। मोतियाबिंद के मरीजों के निःशुल्क इलाज हेतु लगातार जिला अस्पताल द्वारा अभियान चलाया जा रहा है। गौरतलब है कि पूर्व वर्षों में जिला चिकित्सालय नेत्र विशेषज्ञ की नियुक्ति नहीं की गई थी परन्तु वर्तमान में नव नियुक्त नेत्र सर्जन डाॅ0 कल्पना मीणा की नियुक्ति के पश्चात् नेत्र शिविरों के आयोजन में बढ़ोत्तरी हुई है। इस चिकित्सकीय टीम में डाॅ के. मीणा के नेतृत्व के अलावा जिला नोडल अंधत्व निवारण डाॅ0 हरेन्द्र बघेल, नेत्र सहायक अधिकारी अशोक कश्यप, अनिल वैद्य शामिल हैं। जिन्हें जिला चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी डाॅ टीआर कुंवर एवं सिविल सर्जन डाॅ0 संजय बसाख का मार्गदर्शन भी है।
जिले में नेत्र उपचार के अंतर्गत आधुनिकतम पद्धति के ‘फेको इमल्सीफिकेशन‘ उपकरण द्वारा मरीजों का उपचार किया जाता है। जिसे जिला प्रशासन द्वारा डीएमएफ मद से प्रदाय किया गया है। फलस्वरूप अब जिले के विकासखंडों में सिलसिलेवार शिविर का आयोजन कर मरीजों का उपचार किया जा रहा है। इस क्रम में रोस्टर अनुसार विकासखण्ड के चयनित मरीजों को नियत तिथि पर जिला अस्पताल में लाकर मोतियाबिंद का इलाज आधुनिक मशीनों द्वारा किया जाता है और विगत गुरुवार को ही माकड़ी विकासखंड के दो एवं फरसगांव विकासखंड के 13 मरीजों का सफल ऑपरेशन टीम द्वारा किया गया साथ ही प्रत्येक मोतियाबिंद ऑपरेशन के साथ निःशुल्क लैंस प्रत्यारोपण कर मरीजों का नेत्र सर्जन द्वारा स्लिट लैंप द्वारा जांच करते हुए आवश्यक दवाइयां एवं चश्में भी दिये गये। ज्ञात हो कि सभी मरीजों के निःशुल्क सफल ऑपरेशन के बाद उनके चेहरों पर खुशी देखते ही बनती थी साथ ही उनके परिजनों ने भी चिकित्सकों एवं अस्पताल प्रबंधन का आभार जताया।
चिकित्सकों की टीम ने यह भी बताया कि कोण्डागांव जिले को मोतियाबिंद मुक्त जिला बनाने के लिये टीम द्वारा भरसक प्रयत्न किये जा रहे हैं और आने वाले समय में शिविरों की संख्या को बढ़ाया जायेगा। जिससे नेत्र रोगियों की संख्या में और भी कमी आयेगी।
निःसंदेह अंधत्व के अभिशाप से मुक्त करने की यह मुहिम उन दूरस्थ वन ग्रामों में निवास करने वाले ग्रामीणों के लिये वरदान है जो मोतियाबिंद की बीमारी को जीवन की नियति मान बैठे थे। परंतु उपचार और आॅपरेशन के बाद उनकी दैनिक दिनचर्या पहले जैसी हो गई है और नेत्र रक्षक चिकित्सकों की टीम उनके लिये किसी देवदूत से कम नहीं है जिन्होंने उनके अंधत्व की ओर बढ़ते जीवन में आशा का उजाला भर दिया।
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