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विशेष लेख : श्री लक्ष्मणराव काशीनाथ किर्लोस्कर जयंती, कलर ब्लाइंड थे फिर मैकेनिकल इंजीनियर बने, किर्लोस्कर ग्रुप के संस्थापक, 100 वर्षो पहले ही मेक इन इंडिया ला चुके थे

रायपुर. श्री लक्ष्मणराव काशीनाथ किर्लोस्कर जी का जन्म 20 जून 1869 बेलगाम, तब बंबई में हुआ था। बचपन से इन्हे पेंटिंग का बहुत शौक था, वर्ष 1885 में इन्हे जे जे स्कूल ऑफ़ आर्ट, बॉम्बे में एडमिशन मिला था पर 2 वर्ष बाद वो आंशिक रूप से अंधे हो गए थे. इस वजह से इन्हे कॉलेज से बेदखल कर दिया गया था.

श्री किर्लोस्कर जी ने हार नहीं मानी और मैकेनिकल ड्राइंग की पेंटिंग्स बनाना जारी रखा इनमे रंगो को भरने की जरुरत नहीं होती थी, फिर इन्होने मैकेनिकल स्कूल में दाखिला लिया और इनकी मैकेनिकल ड्राइंग की कला और निपुणता को देख कर इन्हे उसी स्कूल में पढ़ाने की नौकरी भी मिल गयी।

फिर इन्होने बेलगांव में एक सी छोटी साइकिल की दुकान खोली और फिर यहां से उनका जीवन बदल-सा गया। वे 700 रुपये – 1000 रुपये में साइकिल बेचने लगे व 15 रुपये में सिखाने भी लगे। 19वी सदी में एक साइकिल, मोटर कार के बराबर मानी जाती थी।

जिस सड़क पे ये साइकिल दुकान थी इसे किर्लोस्कर रोड के नाम से भी जाना जाता है, किर्लोस्कर जी को अहसास हुआ की कृषि क्षेत्र में किसानो को काफी समस्या है, इन्होने फिर किसान एवं खेती सम्बंधित उत्पाद जैसे लोहे का हल आदि बना कर बेचना शुरू किया।

लक्ष्मणराव किर्लोस्कर न केवल एक व्यापारी थे, बल्कि समाज सुधारक भी थे। समाज में फैली अस्पृश्यता को ख़त्म करने के लिये किर्लोस्कर ने किर्लोस्करवाड़ी कस्बे में छुआछूत को बन्द कराया। कोयम्बटूर में किर्लोस्कर पंप की कंपनी है। इस कंपनी को पूर्णत: महिला इंजीनियर द्वारा संचालित किया जाता है और यह देश की पहली ऐसी कंपनी है।

आज किर्लोस्कर समूह उद्योग जगत में बहुत ही बड़ा नाम है, कृषि उत्पादों के साथ साथ वे सोलर, जनरेटर आदि चीज़ो का भी निर्माण कर रहे है।

सोचिये आज किर्लोस्कर कंपनी का उद्योग लगभग  2.5 बिलियन डॉलर है, कंपनी अंतराष्ट्रीय स्तर की है। कंपनी का जन्म भारत के लक्ष्मणराव काशीनाथ किर्लोस्कर ने साइकिल बेचने के छोटे कारोबार से वर्ष 1888 भारत में ही किया था। और भारत की समकालीन सरकारों ने हमेशा की तरह एक डाक टिकट जारी कर उनसे पल्ला झाड़ लिया।

जब श्री रतन टाटा जी को पद्मा अवार्ड से नवाजा जा चूका है तो किर्लोस्कर जी के नाम से एक उद्योग या मैकेनिकल जगत का कोई अवार्ड ही शुरू कर सकती है वर्त्तमान सरकार। और किर्लोस्कर जी तो महाराष्ट्र से भी आते है। मेक इन इंडिया तो 100 वर्षो से पहले ही भारत आ गया था।

श्री बिशेष दुदानी

इस्पात टाइम्स, रायपुर

लेखक के विचार अपने निजी है।

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