लघु वनोपज संग्रहण रैंकिंग में प्रारम्भिक दस स्थान में बस्तर संभाग के 09 वनमण्डल : बस्तर जिले में ईमली की खरीदी 8 हजार 191 क्विंटल से अधिक

बस्तर संभाग वन से अच्छादित है यहां वनोपज संग्रहण करना ग्रामीणों की जीवनशैली का हिस्सा है। छत्तीसगढ़ राज्य लघु वनोपज सहकारी संघ के 31 मई को जारी रिपोर्ट के अनुसार वन मण्डलों की वनोपज संग्रहण लक्ष्य एवं प्रगति रैंकिंग में प्रारम्भिक दस स्थान में बस्तर संभाग के 09 वनमण्डल का स्थान है। रैंकिंग में प्रथम स्थान नारायणपुर, द्वितीय में दंतेवाड़ा के साथ चार से दस स्थान तक बस्तर संभाग के अन्य वनमण्डल शामिल हैं। वन संग्रहण के लक्ष्य एवं संग्रहण के प्रगति तथा संग्रहण-भण्डारण प्रतिशत् के साथ आंकलन किया गया। लघु वनोपज संग्रहण में  बस्तर संभाग के एक लाख 19 हजार 625 संग्राहक शामिल हुए। इन संग्राहकों के मध्य 27 करोड़ 34 लाख से अधिक राषि का भुगतान किया गया।

जिला बस्तर एक ऐतिहासिक शहर के साथ-साथ ईमली उत्पादन ईलाका के रूप में भी पहचान रखता है। बस्तर का पर्यावरण इमली फल के लिए अनुकुल माना जाता है। यहां पैदा होने वाली इमली में गुदा अधिक है साथ ही इसका खट्टा-मीठा स्वाद भी है। बस्तर के हर गांव में इमली का पेड़ अधिक होने के कारण वनोपज में हर साल इसी मात्रा अधिक रहती है। जिसके कारण बस्तर संभाग मुख्यालय में एशिया की सबसे बड़ी इमली मंडी भी स्थापित है। बस्तर की इमली के थाईलैण्ड अफगानिस्तान श्रीलंका सहित खाडी के कई देशों और देश के कई राज्यों में लोग दीवाने हैं। हर साल बस्तर से सैकड़ों टन इमली विदेशों भिजवाई जाती है। बस्तर में इमली का कारोबार लगभग एक हजार से 11 सौ करोड़ रूपए तक का है।

वनोपज संग्रहण के तहत् ईमली 42 हजार 800 क्विंटल का लक्ष्य रखा गया। जिसमें लगभग 8 हजार 191 क्विंटल से अधिक की खरीदी की गई। इसके एवज में खरीदी करने वाले स्व-सहायता समूहों को 2 करोड़ 54 लाख से अधिक राशि का भुगतान किया गया। साथ ही इमली बीज की भी खरीदी की गई जिसमें 1 लाख 85 हजार से अधिक राशि का भुगतान किया गया। राजनगर कि रोशनी महिला स्व-सहायता समूह के सदस्य अनिता बेसाई और पदमा बघेल ने बताया कि समूह के माध्यम से वनोपज संग्रह के खरीदी से मिले रोजगार के इस अवसर से उनके परिवार के लिए आर्थिक विकास में सहायता मिली। समूह के माध्यम से ग्रामीण क्षेत्रों में वनोपज का संग्रहण का कार्य उनके द्वारा किया गया। जिला प्रशासन के मार्गदर्शन में एनआरएलएम के बिहान कार्यक्रम से समूह का गठन किया गया था।