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इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय : कोविड संक्रमण काल में ऑनलाइन वेबिनार के माध्यम से विद्यार्थियों ने जाना योग का महत्व

रायपुर, 21 जून, 2021। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के राष्ट्रीय सेवा योजना इकाई द्वारा अंतराष्ट्रीय योग दिवस के अवसर पर छात्र जीवन शैली में स्वस्थ एवं निरोग जीवन चर्या के निर्माण हेतु ऑनलाइन वेबिनार का आयोजन किया गया। योग दिवस के अवसर पर आयोजित यह वेबिनार ‘‘योग के माध्यम से कायाकल्प’’ एवं ‘‘योग स्वस्थ जीवन का एक रास्ता’’ विषयों पर आधारित था।

वेबिनार का शुभारंभ इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एस.के. पाटील ने किया। वेबिनार में अतिथियों एवं विषय विशेषज्ञों ने विद्यार्थियों को योग के उद्देश्य, महत्व, शरीरिक और मानसिक लाभ के बारे में जानकारी देते हुए निरोग रहने के लिए नियमित योग करने का आव्हान किया। इस आॅनलाईन कार्यक्रम में 250 से अधिक कृषि छात्र उपस्थित थे। इस दौरान राष्ट्रीय सेवा योजना की महिला इकाई के स्वयं सेवकों द्वारा एक सप्ताह के योगाभ्यास की छाया चित्रों के माध्यम से सुंदर प्रस्तुति दी गयी।

कार्यक्रम का शुभारंभ करते हुए इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति डाॅ. एस.के. पाटील ने कहा कि योग का अर्थ होता है ‘जोड़ना’ अर्थात इसके माध्यम से शरीर, मन और आत्मा को जोड़ते हुए स्वस्थ देह, मन और आत्मा को प्राप्त किया जा सकता है। डॉ. पाटिल ने राष्ट्रीय सेवा योजना के लक्ष्य गीत के माध्यम से प्रेरणा देकर योग एवं ध्यान के महत्व, प्रक्रियाओं, मुद्राओं, शरीर के चक्र, कुंडलिनी, योग के लाभ आदि के बारे में छात्रों को  बताया और राष्ट्रीय सेवा योजना के आदर्श वाक्य ‘‘मैं नहीं तुम’’ के माध्यम से इसका प्रसार करने का आव्हान किया। इंदिरा गांधी कृषि विश्वविद्यालय के कुलसचिव डाॅ. प्रभाकर सिंह ने योग के जीवनोपयोगी पहलुओं के बारे में छात्रों को बताते हुए कहा कि आंतरिक चेतना के विस्तार हेतु योग का मनुष्य के जीवन मे महत्वपूर्ण योगदान है।

वेबिनार के मुख्य वक्ता पं. रविशंकर शुक्त विश्वविद्यालय के अधिष्ठाता छात्र कल्याण डाॅ. राजीव चैधरी ने विद्यार्थियों को योग के महत्व एवं स्वास्थय पर पड़ने वाले सकारात्मक प्रभाव के बारे में अवगत कराते हुए उन्हें सूक्ष्म यौगिक क्रियाओं के संबंध में विस्तार से जानकारी दी। अधिष्ठाता छात्र कल्याण डाॅ. जी.के. श्रीवास्तव ने योग के जीवन पर विशेष महत्व पर अपनी बाते रखी और कहा कि योग से तन और मन का सन्तुलन बनता है। अधिष्ठाता द्वय डाॅ. एम.पी. ठाकुर एवं डाॅ. एम.पी. त्रिपाठी ने योग की जनजागरुकता के विषय पर छात्रों का हौसला अफजाई करते हुये योग के अष्टांगिक सिद्धांत एवं नियमों के बारे में छात्रों को बताया।

इस अवसर पर योगाचार्य नवीन पटेल द्वारा षटकर्म के विभिन्न आयामों पर चर्चा कर छात्रों को प्रोत्साहित किया एवं अनेक शोध के निष्कर्षों के अनुरूप दिनचर्या में योगाभ्यास के लिये मार्गदर्शित किया। कार्यक्रम के अंत में एन.एस.एस. के कार्यक्रम अधिकारी सुबही निषाद ने धन्यवाद ज्ञापित करने के पूर्व योग द्वारा रोगों से लडने तथा रोग प्रतिरोध क्षमता को बढ़ाने के विधियो एवं महत्व पर प्रकाश डाला गया। इस अवसर पर अधिष्ठाता, प्राध्यापक, वैज्ञानिक एवं छात्र-छात्राएं उपस्थित थे।

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