Wednesday, July 28संस्थापक, प्रधान संपादक, स्वामी श्री नवनीत जगतरामका जी
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पद के लिए देश को भी दांव में लगा देने की दूषित मानसिकता शुरू से ही कांग्रेस की रही है : गौरीशंकर

बलौदाबाज़ार. भारतीय जनता पार्टी ने 25 जून 1975 के मध्यरात्रि को लगाए गए आपातकाल को याद करते हुए इसे काला दिवस के रूप में मनाने का निर्णय लिया, प्रदेश भाजपा ने जिले स्तर पर आपातकाल के विरोध में प्रेस कांफ्रेस आयोजित कर विषय को जन-जन तक पहुंचाने का निर्णय लिया जिस तारतम्य में भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश कोषाध्यक्ष गौरीशंकर अग्रवाल ने जिला भाजपा कार्यालय में आयोजित प्रेस वार्ता में पत्रकारों से चर्चा के दौरान बताया कि 25 जून 1975 से 21 मार्च 1977 तक के उस 21 महीने की अवधि में आपातकाल घोषित था, जिसे तत्कालीन राष्ट्रपति फखरुद्दीन अली अहमद ने तब के प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी के कहने पर भारतीय संविधानबकी धारा 352 के अधीन आपातकाल लगा दिया जो स्वतंत्र भारत के इतिहास में सबसे अलोकतांत्रिक कालखंड के नाम से जाना जाता है, आपातकाल में चुनाव स्थगित हो गए तथा नागरिकों के समस्त अधिकारों को समाप्त करके मनमानी की गई, लोकनायक जयप्रकाश नारायण ने इसे भारतीय इतिहास की सर्वाधिक काली अवधि कहा था।

बलौदाबाज़ार में अग्रवाल ने पत्रकारों से की चर्चा, कहा- देश में आपातकाल के वक्त “कानून का राज” खत्म कर देने वाली कांग्रेस के पदचिन्हों पर छत्तीसगढ़ में चल रहे भूपेश आपातकाल को काला दिवस के रूप में याद कर रही है : भाजपा

श्री अग्रवाल ने प्रेस वार्ता के दौरान बताया कि उक्त अवधि में श्रीमती इंदिरा गांधी की तानाशाही, भ्रस्टाचार एवं तमाम अनियमितता के खिलाफ देश भर में तब भयंकर आक्रोश था, हम सब जानते है कि भारत मे एक सदी भर के लंबे संघर्षों और हजारों हुतात्माओं के बलिदान के बाद हमने आजादी पाई, आजादी उपरांत संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेन्द्र और संविधान के प्रारूप भीमराव अम्बेडकर जिन्हें हम संविधान निर्माता के रूप में समिति के अध्यक्ष के रूप में जानते है ने हमें “लोकतंत्र” उपहार के स्वरूप दिया, बड़े त्याग बलिदान से प्राप्त इस लोकतंत्र को कांग्रेस नेत्री तब की प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी ने आधी रात को खत्म करके देश को फिर से तानाशाही और गुलामी के उसी बियाबान में धकेल दिया था,

1947 जहाँ से निकल कर भारत वापस आया था, आपातकाल के दौरान अभिव्यक्ति की आजादी को भी बुरी तरह कुचल दिया गया था, आपातकाल का बुरा दौर जो गुजर गया कुछ इसी तरह ही छत्तीसगढ़ में आज सरकार संचालित है तबके कांग्रेस के मानसिकता के अनुरूप उनके पदचिन्हों पर चलते हुए आज भूपेश सरकार चल रही यहाँ आज माफिया राज हावी है, कानून का राज समाप्त हो चुका है, पत्रकारों को खुलेआम पीटा जा रहा कांकेर की घटना हमने देखी है, रेत माफिया खुलेआम विरोध करने वालों को दबंगई दिखाते है, यह भी एक तरह से आपातकाल की मनोवृत्ति के ही उदाहरण है,

जब तक कांग्रेस कायम है आपातकाल भले 1977 में खत्म हो गया लेकिन उसकी मानसिकता वाले तत्व और संगठन आज भी मौजूद है, यह इतिहास हमें इसलिए भी बार-बार हर बार स्मरण रखना चाहिए ताकि ऐसा कलंकित इतिहास कभी अब फिर दुहराने का दुस्साहस कांग्रेस या उस मनोवृत्ति वाला कोई दल कभी अब करने में सफल नहीं हो पाए, इस लिये हमें सचेत रहने की जरूरत है। श्री अग्रवाल शुक्रवार को बलौदाबाज़ार में पत्रकारों से बात कर रहे थे।

उक्त अवसर पर प्रमुख रूप से पूर्व विधायक व भाजपा जिलाध्यक्ष डॉ. सनम जांगड़े, प्रदेश कार्यसमिति सदस्य डॉ. अजय राव, वरिष्ठ भाजपा नेता टेसूलाल धुरंधर, विजय केसरवानी, धनंजय साहू, जिपं. उपाध्यक्ष टंकराम वर्मा, नपा अध्यक्ष यशवर्धन वर्मा, कृष्णा अवस्थी, रितेश श्रीवास्तव, पवन वर्मा, डोमन वर्मा, अनिल बघेल, आलोक अग्रवाल, रोहित साहू, जितेन्द्र धुरंधर, परेश वैष्णव, हेमंत टिकरिहा, नरसिंह निर्मलकर, संजय पंजवानी, संजय श्रीवास, दिनेश बाजपेयी, पुरूषोत्तम साहू, संकेत वर्मा, प्रणव अवस्थी, विकास अग्रवाल, योगी वर्मा, आकाश जायसवाल, बालाराम विश्वकर्मा, सुनील यादव सहित भाजपा पदाधिकारी एवं कार्यकर्ता उपस्थित रहे।

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