एलपीजी सिलेंडर डिलेवरी बॉय को मिलेगा 5 लाख का मुआवजा, केंद्रीय पेट्रोलियम मंत्री ने ट्वीट कर दी जानकारी

सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनी इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन (आईओसी), बीपीसीएल और एचपीसीएल ने कहा है कि एलपीजी वितरक कर्मचारियों में से किसी भी सदस्य का यदि कारोना वायरस से संक्रमण के कारण निधन होता है तो उसके परिजनों को 5 लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जायेगी।

पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ट्वीट कर इस पहल का स्वागत किया है। प्रधान ने ट्वीट के माध्यम से कहा कि, “इंडियन ऑयल, बीपीसीएल और एचपीसीएल द्वारा उठाए गए मानवीय निर्णय का स्वागत करते हैं। हमारे कार्यकर्ताओं का कल्याण सर्वोपरि है, यह करुणामयी कदम हमारे कार्यबल के सुरक्षा जाल को मजबूत करेगा, जिससे भारत की कोरोना के खिलाफ लड़ाई का समर्थन होगा।”

सोमवार को केंद्रीय पेट्रोलियम एवं प्राकृतिक गैस मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने सार्वजनिक क्षेत्र की तीनों कंपनियों के अधिकारियों के साथ बैठक की जिसके बाद इसका निर्णय लिया गया। इसमें कारोना महामारी को देखते हुए यह निर्णय किया गया है कि वितरण क्षेत्र से जुड़े किसी भी कर्मचारी की कारोना वायरस संक्रमण के कारण मौत होती है तो उसके पति/पत्नी को पांच लाख रुपये की अनुग्रह राशि दी जाएगी।

कंपनी की तरफ से जारी परिपत्र में कहा गया है कि पति/पत्नी के नहीं रहने पर यह राशि निकट परिजन को दी जाएगी। कंपनी के 28 मार्च को जारी परिपत्र में कोरोना वायरस संक्रमण से जोखिम को लेकर एलपीजी वितरण से जुड़े कर्मियों को गैस सिलेंडर और स्टोव शो-रूम में काम करने वाले कर्मचारियों, गोदाम में काम करने वाले, मिस्त्री (मैकेनिक) और डिलिवरी कर्मी की श्रेणी में रखा गया है। ये वे कर्मी है जिन्हें संकट के समय में अपना काम करते रहना है ताकि देश भर में ग्राहकों के लिये एलपीजी सिलेंडर की आपूर्ति बनी रहे।

प्रधानमंत्री राहत कोष में भी प्रधान ने दिए 1 करोड़ रुपए

पेट्रोलियम मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने कारोना वायरस महामारी के खिलाफ जारी अभियान में मदद के लिये प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में एक महीने का वेतन जमा किया है। उन्होंने सांसद स्थानीय क्षेत्र विकास निधि से भी एक करोड़ रुपये जारी किये हैं।

प्रधान ने एक ट्वीट में कहा कि, “आइये इस मुश्किल समय में उनके लिये खड़े होते हैं, जिन्हें अभी सबसे अधिक जरूरत है। मैंने हाशिये के लोगों को मुस्कान देने के लिये प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में एक महीने का वेतन जमा किया है तथा एमपीएलएडी कोष से भी एक करोड़ रुपये जारी किये हैं।”

इससे पहले किरेन रिजिजू, संतोष गंगवार, रवि शंकर प्रसाद, नितिन गडकरी, प्रह्लाद पटेल, मनोज तिवारी, प्रकाश जावड़ेकर, नरेंद्र सिंह तोमर जैसे केंद्रीय मंत्री और सांसद भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में एक महीने का वेतन जमा करा चुके हैं साथ ही सांसद निधि से 1 करोड़ राशि भी दे चुके हैं। उपराष्ट्रपति वेंकैया नायडू ने भी प्रधानमंत्री राष्ट्रीय राहत कोष में अपने एक महीने का वेतन जमा कराया है।

उल्लेखनीय है कि कोरोना वायरस के संक्रमण को रोकने के लिये देश में लागू 21 दिनों के लॉकडाउन के कारण घरेलू परिशोधन संयंत्रों ने क्षमता में कटौती कर दी है। हालांकि इस कटौती का असर एलपीजी के घरेलू उत्पादन पर भी पड़ा है। सऊदी अरब भारत को न केवल कच्चा तेल देता है बल्कि भारत के लिए तरलीकृत पेट्रोलियम गैस (एलपीजी) की आपूर्ति करने वाला सबसे बड़ा स्रोत है। बावजूद इसके मंत्रालय अपनी ओर से हर संभव प्रयास कर रहा है।

पेट्रोलियम कंपनियों ने दिया अब तक की सबसे बड़ी रकम

केंद्रीय मंत्री धर्मेंद्र प्रधान ने ट्वीट कर जानकारी दी कि, सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियों और पेट्रोलियम मंत्रालय के अंतर्गत आने वाले सभी PSUs ने आज प्रधानमंत्री राहत कोष में लगभग 1031.29 करोड़ रुपए देने का संकल्प लिया है। इतना ही नहीं कंपनियों के कर्मचारियों ने भी 61 करोड़ रुपए अपने वेतन से जमा करके राहत कोष में जमा करवाए हैं।”