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दुर्ग : विश्व आदिवासी दिवस पर अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों की सुरक्षा के लिए एससी एसटी एक्ट के संबंध में जानकारी प्रदान की गई

आज दिनांक 9 अगस्त 2021 माननीय श्री राजेश श्रीवास्तव जिला एवं सत्र न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण दुर्ग के मार्गदर्शन एवं निर्देशन में विश्व आदिवासी दिवस दुर्ग जिले के विभिन्न स्थानों में मनाया गया जिसमें आम जन को नालसा (की आदिवासियों के अधिकारी का संरक्षण और परिवर्तन के लिए विधिक सेवाएं) योजनाएं 2015 एवं अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों की सुरक्षा के लिए एससी एसटी एक्ट के संबंध में जानकारी प्रदान करने हेतु विधिक जागरूकता शिविर आयोजित किया गया श्री राहुल शर्मा सचिव जिला विधिक सेवा प्राधिकरण व्यवहारी न्यायाधीश ने ग्राम उरई के उपस्थित होकर बताया कि विश्व आदिवासी दिवस व आदिवासियों के मूलभूत अधिकारों की सामाजिक आर्थिक और न्यायिक सुरक्षा के लिए प्रत्येक वर्ष 9 अगस्त को मनाया जाता है आदिवासी शब्द दो शब्दों आदि और वासी से मिलकर बना है जिसका अर्थ मूलनिवासी होता है

अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति के लोगों की सुरक्षा के लिए एससी एसटी एक्ट पूरे देश में 30 जनवरी 1990 को लागू कर दिया गया इसका उद्देश्य अनुसूचित जाति और अनुसूचित जनजाति वर्ग से ताल्लुक रखने वाले लोगों को सार्वजनिक सुरक्षा मुहैया कराना है तथा इनके खिलाफ समाज में फैले भेदभाव और अत्याचार को रोकना है इस एक्ट का मकसद एससी एसटी वर्ग के लोगों को अन्य वर्गों की ही तरह समान अधिकार दिलाना भी है अनुसूचित जाति जनजाति के लोगों के साथ होने वाले अपराधों की सूरत में इस एक्ट में सुनवाई का विशेषता प्रावधान किया गया है इसके तहत इस समुदाय के लोगों के साथ भेदभाव या अन्याय करने वाले लोगों को कठिन सजा का भी प्रावधान है अनुसूचित जाति जनजाति अत्याचार निवारण अधिनियम 1989 के अनुसार उत्पीड़ित अनुसूचित जाति जनजाति के व्यक्तियों को विभिन्न प्रकार के उत्पीड़न की घटनाओं में आर्थिक सहायता विभिन्न चरणों में दिया जाने का प्रावधान है अनुसूचित जाति के पीड़ित व्यक्ति द्वारा एफ आई आर दर्ज करने पर विभाग द्वारा प्रथम चरण में लाभार्थी को त्वरित आर्थिक सहायता पहुंचाने का प्रावधान किया गया है यह अधिनियम उस प्रत्येक व्यक्ति पर लागू होता है जो अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति का सदस्य नहीं है

तथा वह व्यक्ति इस वर्ग में सदस्यों का उत्पीड़न करता है इस एक्ट के तहत मामलों में जांच और सुनवाई के दौरान पीड़ित और गवाहों की यात्रा और जरूरतों का खर्च सरकार की तरफ से उठाया जाएगा भारतीय संविधान के अनुच्छेद 15 के अंतर्गत किसी भी नागरिक के विरुद्ध केवल धर्म मूल वंश जाति लिंग जन्म स्थान या किसी के आधार पर कोई भी भेदभाव नहीं की जा सकती भारत के संविधान ने पांचवी अनुसूची के जरिए आदिवासी क्षेत्र के तहत एक ऐसी व्यवस्था बनाने की पहल की गई

जिसमें आदिवासी आदिम जनजाति समुदायों के साथ होते रहे अन्याय और उपेक्षा को खत्म किया जा सके और उनकी अश्लीलता की सुरक्षा के साथ वे अपनी व्यवस्थाएं भी बरकरार रख सके इसके तहत आदमी जनजाति मंत्रणा परिषद के गठन की व्यवस्था की गई है वास्तव में भारत के संविधान की पांचवी छठवीं अनुसूची आदिवासी आदमी जाति समुदाय की असीम ताकि सुरक्षा करते हुए भारत के समाज का एक अभिन्न अंग बनाने के मकसद से लागू की गई थी यह एक स्थापित से है कि जनजातियों के निवास स्थान वाले थानों के संसाधनों को अन्य क्षेत्रों के समुदायों के अतिक्रमण या उनके व्यवहार से दखल से सरस्वत किया जाए आज भी यह बहुत बड़ी जरूरत है।

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