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बीजापुर : दिव्यांग वृद्धा की मिन्नतों के आगे सिस्टम हुआ पंगु, बदहाली में जीने मजबूर परिवार, तिमेड़ पहुंचकर सीपीआई नेताओं ने ली बुर्जुग की सुध

बीजापुर। आंखों के सामने दुनिया ओझल, चलने फिरने में पांव भी साथ नहीं दे रहें, टूटी है घर की छत, बरसते पानी में तिरपाल तान रहने की मजबूरी। लाचार सिस्टम की ये तस्वीर है बीजापुर जिला मुख्यालय से 56 किमी दूर तिमेड़ की है। जहां 70 वर्षीय वृद्धा कमला झाड़ी एक अदद पक्के मकान की उम्मीद लगाए बैठी है मगर सिस्टम है कि उसे कमला की मजबूरी ना तो दिखती है और ना ही गुहार कानों में सुनाई पड़ती है। भोपालपट्नम ब्लाक के तिमेड़ गांव से सरकारी मशीनरी की नाकामी की जो तस्वीर निकलकर सामने आई है, वाकई चिंतनीय है। यहां तिमेड़ गांव की 70 वर्षीय कमला झाड़ी को प्रशासनिक हुक्मरानों से लेकर जनप्रतिनियिों ने इस कदर दरकिनार कर दिया है कि नेत्रशक्ति खो चुकी यह अपाहिज वृद्धा तिल-तिल कर जीने को मजबूर है।

सत्तासीन नेता-विधायक समेत प्रशासन को जमकर कोसा

अपने 28 वर्षीय पुत्र के साथ तंगहाली में जी रही कमला की सुध लेने ना तो नेता पहुंचे है और ना ही प्रशासन का कोई नुमाइंदा। शुक्रवार को कमला के घर सीपीआई के जिला सचिव कमलेश झाड़ी पहुंचे थे। सीपीआई नेता के पहुंचने के बाद कमला की दर्दभरी आपबीती बाहर आई। पति के गुजर जाने और आंख-पांव से लाचार कमला का सहारा उसका इकलौता पुत्र नरेंद्र है मगर बेरोजगारी के चलते नरेंद्र भी मां की अच्छी तरह से देखभाल करने में सक्षम नहीं हैं। गरीब की वर्षों पुरानी कुटिया दम तोड़ रही है। 2019 में कमला ने अपनी परेषानियों का जिक्र करते एक अर्जी दी थी पक्के आवास के लिए, लेकिन कागजों पर मिन्नतें काम ना आई। दो साल होने को है लेकिन अपाहिज वृद्धा की एक अदद मांग पूरी नहीं हो पाईं। नतीजतन वह अपने बेटे के साथ ढहने की कगार पर पहुंच चुके झोपड़ी में जैसे-तैसे रह रही हैं। दीवार और छत ढहने कभी भी ढह सकते हैं। सिर पर मंडराते खतरे के बावजूद सिस्टम की उदासीनता से बदहाली में जीने की मजबूरी बरकरार है।
नरेंद्र का कहना है कि उनके पिता लक्ष्मैया झाड़ी टीवी से ग्रसित थे। ढाई साल तक बिस्तर पर पड़े रहे, और बाद में उनकी मौत हो गई।

किसी तरह वह 12 वी तक की अपनी पढ़ाई पूरी कर पाया, लेकिन कहीं कोई छोटी नौकरी भी नहीं मिली। अपना और मां का भरण पोषण खेती-किसानी कर कर रहा है, लेकिन आमदनी इतनी नहीं कि दो कमरे का पक्का मकान वह अपने खर्च पर बना पाए। बारिश से बचने ही उसने बाजार से तिरपाल खरीद छत पर तान रखी है, लेकिन दीवार ढहने की कगार पर है, अब तो उन्हें जान का डर भी सताता है। आस-पड़ोस के लोगों का कहना है कि तिमेड़ जिपं सदस्य बसंत ताटी का निर्वाचन क्षेत्र है। विधायक विक्रम मंडावी भी तिमेड़ कई मर्तबा दौरे पर आ चुके हैं, लेकिन उम्रदराज अपाहिज महिला की सुध लेने ना तो नेता-विधायक पहुंचे और ना ही प्रशासन का कोई नुमाइंदा।

इनकी जिंदगी बस उम्मीद में कट रही है। हालांकि परिवार के बारे में सीपीआई नेताओं को जानकारी मिलने के बाद तिमेड़ पहुंचे कमलेश झाड़ी ने कमला की आपबीती सुनने के बाद सिस्टम को कोसते नजर आए। कमलेष के मुताबिक परिवार बेहद परेषान है। बुढ़ी अपाहिज महिला का एकमात्र सहारा उसका बेटा है। अपनी परेषानियों से निजात पाने जनप्रतिनिधियों-प्रशासन से गुहार लगाते थक चुके हैं, लेकिन बड़ी बड़ी डींग हांकने वाले कांग्रेस हो या भाजपा के नेताओं के पास इस लाचार महिला की सुध लेने की फूर्सत तक नहीं। यह सिस्टम की नाकामी को बयां करने के लिए काफी है कि एक अपाहिज महिला की बार-बार गुहार के बाद भी सरकार-प्रषासन के कानों में जु तक नहीं रेंगती। फिर भी सीपीआई कमला को उसका हक दिलाने उसके साथ खड़ी है ।

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