कोरोना की दहशतः सरकारी दफ्तरों में भी 31 तक सार्वजनिक अवकाश की मांग

रायपुर। छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संघ ने कहा कि कोरोना के भय से सरकारी दफ्तरों में कार्यरत अफसर व कर्मचारी खुद को असूरक्षित महसूस कर रहे हैं। संघ ने मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से मांग की है कि प्रदेश के सरकारी दफ्तरों में सार्वजनिक अवकश घोषित किया जाए। संघ ने लंबित महंगाई भत्ता देने की मांग को लेकर रायपुर कलेक्टोरेट में प्रदर्शन भी किया।

छत्तीसगढ़ प्रदेश तृतीय वर्ग कर्मचारी संध के प्रांतीय महामंत्री विजय कुंमार झा एवं जिला शाखा अध्यक्ष इदरीश खान ने कहा कि सरकार ने करोना वायरस के कारण समस्त शासकीय शालाओं, महाविद्यालयों, पार्क, जीम व समूह में रहने वाले स्थलों पर 31 मार्च तक सार्वजनिक अवकाश घोषित कर दिया है। विधानसभा के चल रहे बजट सत्र में को भी 17 से 25 मार्च तक स्थगित करने का निर्णय लिया गया है। ऐसी स्थिति में प्रदेश के समस्त शासकीय कार्यालयों में भी 31 मार्च तक मुख्यमंत्री भूपेश बघेल सार्जवनिक अवकाश घोषित करें। ताकि प्रदेश के शासकीय सेवक भी कोरोना वायरस से बच सकें।

झा व खान ने बताया कि केन्द्रीय मंत्रिमण्डल द्वारा केन्द्रीय अधिकारियों कर्मचारियों को 1 जनवरी 2020 से 4 प्रतिशत मंहगाई भत्ता देने के निर्णय के तत्काल बाद कलेक्टोरेट रायपुर में प्रदर्शन कर प्रदेश के कर्मचारियों को लंबित 9 प्रतिशत मंहगाई भत्ता तत्काल देने की घोषणा करने की मांग मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से की गई। संघ का तर्क है कि छत्तीसगढ़ के अधिकारी कर्मचारी 12 प्रतिशत मंहगाई भत्ते पर ही अटके हैं। केन्द्रीय कर्मचारियों का अब 17 प्रतिशत से बढ़कर 21 प्रतिशत हो जावेगा। इस प्रकार प्रदेश के कर्मचारी जुलाई 2019 का 5 प्रतिशत एवं जनवरी 2020 का 4 प्रतिशत कुल 09 प्रतिशत पीछे रहकर प्रदेश की सेवा कर रहे हैं। केन्द्र व राज्य में भेदभाव की नीति न्यायोचित नहीं है। कर्मचारियों, पेंशनरों व मृत शासकीय सेवकों के परिजनों को आर्थिक क्षति हो रही है।