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मुख्यमंत्री भूपेश बघेल : कोयले आपूर्ति में कमी के लिए केंद्र जिम्मेदार, देश के कई राज्यों में बिजली गुल होने का संकट खड़ा

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल आपूर्ति की कमी के लिए केंद्र सरकार को जिम्मेदार ठहरा रहे हैं। उन्होंने कहा, जब देश को खाद की जरूरत थी तो खाद नहीं मिल पाया। अब कोयले की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। जो विदेश से कोयला आ रहा था, वह भी बंद हो गया। ऐसे में केंद्र सरकार कर क्या रही है। बिजली की कमी होगी तो उद्योग, परिवहन और किसान सभी प्रभावित होंगे। मुख्यमंत्री ने कहा, अधिकारियों ने उन्हें आश्वस्त किया है कि छत्तीसगढ़ में कोयले की कोई कमी नहीं होने दी जाएगी।

देश के कई राज्यों में बत्ती गुल होने का संकट खड़ा हो गया है। यह विद्युत उत्पादन कंपनियों और डिस्कॉम के कुप्रबंधन का नतीजा है। कोरोना काल में जब बिजली की मांग कम थी तो इन कंपनियों ने कोल इंडिया से कोयला लेने में आनाकानी की। यहां तक कि कोयला खरीदी से जुड़े करार को भी रिन्युअल नहीं कराया। जब अगस्त में बिजली की मांग बढ़ी तो कोयले की आपूर्ति की कड़ी टूट गई। इसका असर छत्तीसगढ़, ओडिशा और झारखंड जैसे राज्यों को नहीं पड़ेगा, लेकिन आशंका है कि राजस्थान, उत्तर प्रदेश और दिल्ली जैसे राज्यों में अंधेरा छा सकता है।

छत्तीसगढ़ पूरे देश की जरूरत का 20 प्रतिशत कोयला देता है। यहां कोल इंडिया की सहयोगी कंपनी साउथ-इस्टर्न कोल फील्ड्स लिमिटेड (SECL) की 41 खदानें हैं। इसमें से ओपन कास्ट खदानों की संख्या अधिक है। यहां से सालाना 150 लाख मीट्रिक टन कोयले का उत्पादन होता है। कोरबा जिले की ही खदानों से SECL 130 लाख मीट्रिक टन कोयला निकालती है। अफसरों के मुताबिक, कायदे से बिजली कंपनियों को 24 दिन उपयोग के बराबर कोयला स्टॉक रखना होता है। पिछले साल कोरोना संकट में लॉकडाउन लगा तो बिजली की मांग कम हो गई।

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