Tuesday, November 12

छत्तीसगढ़

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72 संगठनों के 2 लाख कर्मी हड़ताल पर, सबकी मांग- रेगुलर करो

72 संगठनों के 2 लाख कर्मी हड़ताल पर, सबकी मांग- रेगुलर करो

छत्तीसगढ़
शिक्षाकर्मियों की मांगे पूरी होने के बाद अब 72 संगठनों के 2 लाख कर्मी हड़ताल पर, सबकी एक ही मांग रेगुलर करो, क्योकि चुनावी साल होने के कारण हड़ताल से सरकार पर दबाव बनेगा और मांगें मान ली जाएंगी। रायपुर |  पंचायत विभाग ने 8 साल की सेवा पूरी करने वाले शिक्षाकर्मियों को भी नियमित करने की प्रक्रिया शुरु कर दी है। शिक्षाकर्मियों को उम्मीद है कि चुनाव आचार संहिता से पहले नियमितिकरण को लेकर कोई घोषणा हो सकती है। इनकी संख्या लगभग 43 हजार है। प्रदेश सरकार ने मई में ही शिक्षाकर्मियों के संविलियन की मांग मान ली थी। इसका असर ये हुआ है कि रेगुलर होने और वेतन बढ़ाने जैसी उन्हीं मांगों को लेकर 54 विभागों के 72 कर्मचारी संगठन पिछले 2 माह से हड़ताल पर हैं। कर्मचारियों को लगता है कि चुनावी साल होने के कारण हड़ताल से सरकार पर दबाव बनेगा और मांगें मान ली जाएंगी। इसलिए प्रदेश में 2 लाख से अधिक कर्मचारी हड़ताल पर
जर्जर स्कूल भवन में जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर है बच्चे

जर्जर स्कूल भवन में जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर है बच्चे

छत्तीसगढ़
महासमुंद जिले के हजारों मासूम बच्चे जर्जर स्कूल भवन में जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर है। स्कूलों की हालत देखकर कभी भी हादसे का डर बना रहता है, बावजूद इसके स्कूल प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं कर रहा। महासमुंद | महासमुंद जिले के हजारों मासूम बच्चे जर्जर स्कूल भवन में जान जोखिम में डालकर पढ़ने को मजबूर है। स्कूलों की हालत देखकर कभी भी हादसे का डर बना रहता है, बावजूद इसके स्कूल प्रशासन कोई कार्यवाही नहीं कर रहा। बता दें महासमुंद की करीब 51 स्कूलों की हालत बेहद गंभीर है। ऐसे में हर समय हादसे की आशंका बनी रहती है, लेकिन जिला प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं है। स्कूली छात्रों मे हमेशा ही भवन की छत या दीवार गिरने का डर बना रहता है। जिसके चलते छात्र सही से पढ़ाई पर भी ध्यान नहीं दे पाते हैं। बावजूद इसके शासकीय स्कूलों में बच्चों को पढ़ाना पालकों के लिए मजबूरी बन गया है और जिला शिक्षा विभाग वही
इस सरकारी स्कूल में बस्ते के बोझ के बिना पढ़ने जाते है बच्चे, अब जिले के 60 स्कूलों को बैगलेस करने की तैयारी

इस सरकारी स्कूल में बस्ते के बोझ के बिना पढ़ने जाते है बच्चे, अब जिले के 60 स्कूलों को बैगलेस करने की तैयारी

छत्तीसगढ़
बैगलेस फॉर्मूले की सफलता को देखकर अब जिला शिक्षा अधिकारी इस साल जिले के 60 स्कूलों को बैगलेस करने की तैयारी में हैं। सूरजपुर | छत्तीसगढ़ के सूरजपुर जिले मे बच्चों के भारी-भरकम बैग का बोझ देख यहां के एक शिक्षक ने खेल के फार्मूले से स्कूल चलाने की नई पहल शुरू की है। स्कूली बच्चों को बैग के बोझ से निजात दिलाने के लिए सूरजपुर के एक सरकारी स्कुल के शिक्षक ने अपने स्कूल को ही बैगलेस कर दिया है। जिसकी वजह से अब बच्चों को स्कूल जाने के लिए भारी बैग की जरूरत नहीं होगी, वह बिना बैग के भी स्कूल जाकर शिक्षा ग्रहण कर सकते हैं। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); वहीं शिक्षक की इस पहल को काफी सराहा जा रहा है। प्रदेश के पहले बैगलेस स्कूल की तर्ज पर ही अब शिक्षा विभाग के अधिकारी कई जिलों में स्कूलों को बैगलेस बनाने की तैयारी कर रहे हैं। रुनियाडीह में बैगलेस हुआ स्कूल सूरजपुर से लग
संचार क्रांति योजना की तारीफ करते हुए कंगना ने कहा, “मोबाइल मिलने से महिलाओं की स्थिति बेहतर होगी”

संचार क्रांति योजना की तारीफ करते हुए कंगना ने कहा, “मोबाइल मिलने से महिलाओं की स्थिति बेहतर होगी”

छत्तीसगढ़
रायपुर (एजेंसी) | सोमवार को मोबाइल तिहार कार्यक्रम में मुख्यमंत्री डॉ. रमन सिंह ने संचार क्रांति योजना का शुभारंभ करते हुए गोठ मोबाइल ऐप को लांच किया। कंगना ने संचार क्रांति योजना की तारीफ करते हुए कहा कि मोबाइल मिलने से महिलाओं की स्थिति बेहतर होगी। राजधानी रायपुर के बूढ़ा तालाब स्थित बलवीर सिंह जुनेजा इनडोर स्टेडियम में हितग्राहियों को स्मार्ट फोन का वितरण किया गया। इस कार्यक्रम के लिए फिल्म अभिनेत्री कंगना रनौत भी पहुंची, जो कार्यक्रम में मुख्य आकर्षण का केंद्र रही  मुख्यमंत्री ने कंगना के हाथों ही हितग्राहियों को मोबाइल फोन का वितरण कराया। (adsbygoogle = window.adsbygoogle || []).push({}); कार्यक्रम में कंगना ने कहा कि मुझे पहली बार रायपुर आने का मौका मिला है। उन्होंने कहा कि छत्तीसगढ़ ऐसा प्रदेश है, जो मुझे अपने गृह प्रदेश हिमाचल की याद दिला देता है। कंगना ने संचार क्रांति योजन