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बीजापुर : वाडला से लौटने के बाद विधायक से मिले सीपीआई नेता, कार्रवाई का मिला भरोसा, प्रशासन की जांच में आई तेजी

बीजापुर। वाडला पंचायत में चौदहवें वित्त की राशि गबन के मामले में सीपीआई का जांच दल लौटने के बाद प्रशासन स्तर पर मामले की जांच में तेजी आई है। मामले में दोषी बताए जा रहे सचिव पर किसी भी क्षण कार्रवाई हो सकती है। सीईओ जिपं रवि साहू ने फोन पर बताया कि जमीनी पड़ताल के लिए जो टीम गठित की गई थी, वह फील्ड का मुआयना कर लौट आई है। अब मामले में विभागीय जांच शुरू होगी। वही सीपीआई जिला सचिव कमलेश झाड़ी का कहना है कि मामला हाइप्रोफाइल है। मामले में ना सिर्फ पंचायत सचिव हरिगोपाल पर कार्रवाई हो बल्कि तथाकथित अफसरों को भी जांच के दायरे में लाया जाना जरूरी है, जिनके नाम मामले में सामने आ रहे हैं। कमलेश का कहना है कि वाडला की तरह जिले के अन्य पंचायतों में भी बड़े पैमाने पर भ्रष्टाचार की गुंजाइश है। हालांकि जहां सरपंच-सचिव में तालमेल है, वहां से ऐसी खबरें बाहर आने की गुंजाइश भी कम है, बावजूद वाडला प्रकरण के बाद सीपीआई पंचायतों में जारी निर्माण कार्यों में भ्रष्टाचार की जांच के लिए जिला स्तर पर एक मॉनिटरिंग टीम गठित करने वाली है, जो समय-समय पर ऐसे मामलों को सरकार-प्रशासन के सामने उजागर करेगी और कार्रवाई की मांग भी करेगी। भाकपा नेता की मानें तो वाडला मामले में प्रशासनिक कार्रवाई पहले सुस्त थी, लेकिन सीपीआई के हस्तक्षेप के बाद यह मामला सुर्खियांे में आया। मामले की षिकायत पखवाड़े भर पहले हुई थी, बावजूद जांच को लेकर प्रषासन ने पहले गंभीरता नहीं दिखाई थी, लेकिन सीपीआई का जांच दल वाडला पहुंचने के बाद आखिरकार प्रशासन भी हरकत में आया।
वाडला से लौटने के बाद गुरूवार को कमलेश के नेतृत्व में भाकपा कार्यकर्ताओं का प्रतिनिधिमंडल विधायक विक्रम मंडावी से बीजापुर स्थित उनके आवास में मुलाकात की। विधायक को जमीनी हकीकत से अवगत कराने के बाद कमलेश ने पूरे मामले में निष्पक्ष कार्रवाई की मांग की। जिस पर विधायक ने कार्रवाई का भरोसा दिया। बता दें कि मामले में तत्कालिन बड़े अधिकारियों के नाम सामने आ रहे हैं। दरअसल वाडला ग्राम पंचायत े सरपंच, उपसरपंच सहित ग्रामीणों ने कलेक्टर को एक लिखित शिकायत देकर सचिव हरिगोपाल पर अपने बेटे के नाम के फर्म के खाते में करीब 21 लाख रूपए पंचायत की राषि टांसफर कर गबन का आरोप लगायाथा। जिसमें जिपं सीईओ ने एक जांच दल गठित किया और 24 अगस्त को जांच दल षिकायत के आधार पर ग्राम पंचायत वाडला पहुंचा। जांच में बिना कार्य कराए अपने बेटे के नाम से फर्जी फर्म बनाकर रूपए आहरण का मामला सही पाया। उप संचालक पंचायत गीता कुमार सिन्हा की अध्यक्षता में पूरे मामले की जांच करते हुए निर्माण कार्य स्थल तक पहुंचकर निर्माण कार्य स्थल की जांच हेतु रवाना हुए। जिसमें देखा गया कि मुख्य मार्ग से गोखुर तक की ढाई सौ मीटर की सीसी सड़क ही गायब है और वाडला में जुमार नागैया के घर से जुमार लक्ष्मैया के घर तक 200 मीटर की सीसी सड़क भी नहीं है तथा दो पुलिया प्रस्तावित स्थल पर बनना चाहिए था मौके पर एक भी पुलिया नहीं है जबकि इन सारे निर्माण कार्येां की राषि 20 मार्च को ही सचिव ने अपने बेटे के फर्जी फर्म के नाम से आहरण कर लिया था।

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