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बीजापुर : दिव्यांगता विकास में बाधा में नहीं, समावेशी शिक्षा के तहत दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण का वितरण

बीजापुर। समग्र शिक्षा अभियान के समावेशी शिक्षा तथा पंचायत एवं समाज कल्याण विभाग के सामुहिक प्रयास से बीजापुर ब्लाक के 19 दिव्यांग बच्चों को सहायक उपकरण प्रदान किए गए। पोटाकेबिन बीजापुर परिसर में कार्यक्रम के दौरान जिपं अध्यक्ष शंकर कुड़ियम, जिपं सदस्य एवं बविप्रा सदस्य नीना रावतिया, जपं उपाध्यक्ष सोनू पोटाम, डिप्टी कलेक्टर उमेष पटेल, जिला मिशन समन्वयक विजेन्द्र राठौर मौजूद थे। बच्चों का उत्साह वर्धन करते हुए जिपं अध्यक्ष शंकर कुड़ियम ने अपने उद्गार में कहा कि दिव्यांगता आपके विकास में बाधा नहीं होनी चाहिए इसलिए शासन ने समावेषी शिक्षा के तहत् सहायक उपकरण से लेकर छात्रवृत्ति का प्रावधान किया है। जरूरतमों को इसका लाभ मिले यह हमारी भी प्राथमिकता है।

जिपं सदस्य नीना ने कहा कि दिव्यांग बच्चों के सामाजिक तथा शैक्षणिक समानता के लिए समावेषी षिक्षा एक महत्वपूर्ण कार्यक्रम है। बच्चों को सामान्य बच्चों की तरह स्कूल में समान वातावरण देकर उनके भविष्य को संवारा जाता है। दिव्यांगता जीवन में कभी भी बाधा नहीं बननी चाहिए, बल्कि उनके अंदर विशेष गुणों को पहचान कर उन्हें प्रोत्साहित करते हुए आगे बढ़ने में मदद है। इस दौरान बच्चों को उनकी जरूरतों के हिसाब से किट प्रदान किए गए।

लकवाग्रस्त अमीषा जीवन में भर रही रंग

मिंगाचल नदी के पार बसे गांव चेरकंटी की अमीषा पोटाकेबिन में कक्षा आठवी की छात्रा है । उसे सहायक उपकरण के रूप में कर्चस प्रदान किया गया। अमीषा को लकवा ग्रस्त थी। अपंगता के चलते उसे आम बच्चों की तरह जीवन व्यतीत करने में दिक्कतें पेष आ रही थी। अमीषा के माता-पिता ने उसका हौसला टूटने नहीं दिया। वे उसू कंधे पर लादकर स्कूल पहुंचाया करते थे। कुछ दिनों बाद वह लाठी के सहारे किसी तरह चल पाती थी। पढ़ाई के प्रति उसकी रूचि को देखते हुए जनपद प्राथमिक शाला में उसका दाखिला कराया गया। जहां शिक्षिका काजल चक्रवर्ती के प्रोत्साहन और मार्गदर्शन मिलने के बाद उसका हौसला बढ़ता गया। अपंगता के बावजूद अपनी रूचि अनुरूप पढ़ाई के साथ वह चित्रकारी के जरिए कैनवास के साथ खुद के जीवन में भी रंग भरी है।

ट्राइसिकल से स्कूल की दूरी हुई कम

आग में झुलसने के कारण चिन्नाकवाली का बिच्चेम कोरसा अपंग हो गया। हादसे के बाद उसे चलने-फिरने में दिक्कतें पेष आ रही थी, बावजूद हाथों के सहारे रंगते वह नियमित स्कूल पहुंचा करता था। पढ़ाई के प्रति उसकी लगन को देखकर उसे टाइसिकल मुहैया कराई गइ्र थी। हालांकि कुछ समय बाद टाइसिकल बिगड़ गई। अब उसे दोबारा ट्राइसिकल उपलब्ध करा हौसला अफजाई की गई।

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