Saturday, September 18संस्थापक, प्रधान संपादक, स्वामी श्री नवनीत जगतरामका जी
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इस रक्षा बंधन कलाइयों पर सजेंगी बाँस-ताड़ की राखियां

बीजापुर । भाई-बहन के प्रेम, विश्वास और रक्षा का संकल्प का त्यौहार रक्षाबंधन आने वाला है। जिसे देखते हुये भैरमगढ़ ब्लाक अंतर्गत ग्राम कर्रेमरका और बेलचर की स्व सहायता समूह की महिलायें इन दिनों राखियाँ बनाने में जुटी हुयी हैं। महिलायें विशेष तौर पर *बाँस और ताड़* की राखियाँ बना रही हैं जिसमें मोती, रत्न, ऊन और धागे का उपयोग किया जा रहा है। राखियों के साथ ही महिलायें बाँस की आकर्षक गहने भी बना रहीं हैं। इस बारे में कर्रेमरका की हिंगलाजिन महिला स्व-सहायता समूह की अध्यक्ष रमशीला यादव बताती हैं कि राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन के माध्यम से उनके समूह के सदस्यों को राखी बनाने के लिए उत्कृष्ट डिजाईनरों से प्रशिक्षण प्रदान किया गया था। इसके साथ आवश्यक सहायता भी उपलब्ध करायी गई, जिससे उनका समूह सजावटी आकर्षक राखियां बना रही हैं। उनके समूह को उम्मीद है कि रक्षाबन्धन के त्यौहार से अच्छी आमदनी होगी।

उल्लेखनीय है कि पिछले वर्ष भी महिलाओं के राखियाँ बनायी थी, कोरोना की वजह से लॉकडाउन था बावजूद इसके उन्हें अच्छी खासी आमदनी हुयी थी। राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन बिहान की महिलाओं को पेशेवर डिज़ाइनरों की आकर्षक राखियाँ और गहने बनाने का प्रशिक्षण दिया जा रहा है। जनपद पंचायत सीईओ अरकरा ने बताया कि कलेक्टर रितेश अग्रवाल के मार्गदर्शन में महिला स्व-सहायता समूहों को विभिन्न आयमूलक गतिविधियों के संचालन हेतु प्रशिक्षण देने के साथ ही सहायता उपलब्ध करायी गई है। फलस्वरूप कर्रेमरका एवं बेलचर की महिला समूहों द्वारा करीब 800 आकर्षक एवं सुंदर राखियां बनायी गई हैं। राखियों का विक्रय बिहान मार्ट में किया जायेगा।ऑनलाइन आर्डर भी लिये जाएंगे। महिलाओं को प्रोत्साहित करने अधिक से अधिक राखियाँ बिकवाने के लिये राष्ट्रीय ग्रामीण आजीविका मिशन द्वारा होलसेल व्यवसायी एवं खुदरा दुकानदारों को उपलब्ध करवाया जाएगा।

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