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नक्सलवाद के कुहासे में ओझल हो गया था नर्स बनने का सपना, अब संतान को इंसानियत की सीख देने मोतिन ने तोड़ा नक्सल से नाता

बीजापुर। बस्तर में नक्सलवाद की धुंध में युवाओं के सपने कैसे ओझल हो जाते है, इसकी एक बानगी बुधवार को देखने को मिली। जब एसपी दफतर में गोद में बच्चे को लिए महिला माओवादी समर्पण के लिए पहुंची। नक्सलियों की इंद्रावती एरिया कमेटी में केएएमएस सदस्य मोतीन कवासी की आपबीती सुनने के बाद नक्सलवाद के कुहासे का सच बाहर आ जाता है। नक्सली संगठन का दामन थामने वाली मोतनी एक होनहार छात्रा थी। नारायणपुर में संचालित रामकृष्ण मिषन से 12 वी बोर्ड इम्तिहान उसने प्रथम श्रेणी में उत्तीर्ण किया था। मोतीन आगे चलकर नर्स बनकर लोगों की सेवा करना चाहती थी, लेकिन नक्सलवाद ने उसके इस सपने को साकार होने नहीं दिया। मोतीन की मानें तो गांव में नक्सली दबाव के चलते उसे कलम-किताब से नाता तोड़ नक्सलवाद का दामन थामने मजबूर होना पड़ा। साल 2018 में माड़ इलाके के ग्राम बोड़गा केएएमएस सदस्य के रूप में वह संगठन में शामिल हुई।

तब से वह इसी पद पर संगठन के लिए काम करती रही। संगठन में रहते ही उसने मिलिटी प्लाटून 16 के सदस्य फागु कोवासी को जीवन साथी के रूप में चुना। संगठन में रहते दोनों एक दुजे के हो गए। फागु पर 2 लाख का ईनाम घोषित था। जो 2005 से 2010 तक सीएनएम सदस्य के रूप में सक्रिय रहा फिर जुलाई 2010 में इंद्रावती एलओएस में पीएलजीए सदस्य बनकर चार माह कार्य करने के बाद प्लाटून दस्ते में शामिल हो गया। फागु 2011 में नारायणपुर के पुतनार में पुलिस पार्टी पर एम्बुष लगाकर हमला करने की घटना में शामिल था, जिसमें एक जवान शहीद हो गया था, इसके अलावा 2012 में कोहकामेटा में आईईडी विस्फोट जिसमें तीन जवान शहीद हुए थे, 2014 मं भटबेडा में पुलिस से मुठभेड़, जिसमें एक जवान शहीद हुआ था, वही 2016 में फुण्डरी और बोदली के बीच आईईडी लगाते समय विस्फोट की जद में आने से उसकी हाथ की उंगलिया कट गई। इसके बाद 2019 में वह ताड़बल्ला में माओवादी प्रषिक्षण कैम्प में भी शामिल रहा, जिसमें 10 माओवादी मारे गए थे।

फागु की जीवन संगिनी मोतीन ने अपनी संतान का नाम सौरव रखा है। मोतीन के अनुसार कुछ माह पहले वह अपने भाई के घर उससे मिलने पहुंची थी। उसे पैसों की तंगी थी। आर्थिक तंगी दूर ना हो पाने के साथ ही उसे अपनी संतान के भविष्य की चिंता सता रही थी, कि इसी दौरान भाई की समझाईष पर उसने संगठन से नाता तोड़ संतान को बेहतर कल देने का फैसला किया। इस तरह एक मां का फर्ज निभाने उसने हिंसा का रास्ता छोड़ मुख्यधारा में जुड़ने का साहस दिखाया।

मोतीन अब सौरभ की परवरिष अच्छे से करना चाहती है। उसे अच्छी तालिम देना चाहती है ताकि वो पढ़ लिखकर काबिल इंसान बनें। इतना ही नहीं अब मोतिन भी अपने सपनों को पंख देना चाहती है, जो कभी नक्सलवाद के कुहासे में ओझल हो गई थी। आज समर्पण करने पर एसपी कमलोचन कष्यप, डीआईजी सीआरपीएफ कोमल सिंह ने दम्पत्ति को 10-10 हजार रूपए की प्रोत्साहन राषि देते हुए उनका मनोबल बढ़ाया और बेहतर जीवन देने का भरोसा भी दिया।

बॉक्स मौत छूकर निकली तब फर्क समझ आया

बुधवार को अपनी पत्नी के साथ आत्मसमर्पण करने पुलिस के समक्ष पहुंचा इंद्रावती एरिया कमेटी में सक्रिय नक्सली फागु कोवासी अलग-अलग ऐसे पांच घटनाओं में शामिल था, जिसमें पांच जवान शहीद हुए, परंतु फागु ने 2016 की एक घटना का जिक्र करते हुए बताया कि वह अपने चार नक्सली कमांडरों के साथ जवानांे को निषाना बनाने के लिए बम प्लांट करने भैरमगढ़ के समीप आया हुआ था, वे आए तो पांच लोग थे पर वापस सिर्फ चार लोग ही जा पाएं, वो भी बुरी तरह जख्मी हालत में। फागु ने बताया कि उस दिन तकरीबन रात को 12 बजे डीवीसी सुनील के साथ एरिया कमेटी सदस्य सग्नु, सुखमती और रामलाल के साथ वह फंुडरी के पास बम प्लांट करने आया हुआ था, जहां पर डीवीसी सुनील स्वयं बम प्लांट करने के बाद तार जोड़ रहा था तभी गलती से वो दो तार जुड़ गए जिनके जुड़ने से ब्लास्ट हो जाता है और यही हुआ जिसके चलते डीवीसी सुनील की घटना स्थल पर ही मौत हो गई और सगनु का दाया हाथा पूरी तरह उड़ चुका था और स्वयं फागु की हथेली भी बुरी तरह जख्मी हो गई, जिसके चलते उसके दो उंगलियों को काटना पड़ा था। फागु ने बताया कि इस घटना के बाद से वह बेहद डरा हुआ था और संगठन छोड़ने का सोच रहा था क्योंकि उस दिन की घटना ने उसे झकझोर रहा था और यह स्पष्ट हो चुका था कि नक्सलवाद की जिंदगी में कभी भी अपने साथियों के साथ एक साथ लौटना मुमकिन नहीं।

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