Tuesday, September 21संस्थापक, प्रधान संपादक, स्वामी श्री नवनीत जगतरामका जी
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बीजापुर : शिक्षक का मॉर्डन गार्डन, तारबाड़ी पर प्लास्टिक की खाली बोतलों से बना दी फूलवारी , खिले हैं कई प्रजातियों के रंग-बिरंगे फूल, बना आकर्षण का केंद्र

बीजापुर। पौधे उगाने से न केवल आपके आसपास की हवा की क्वालिटी बेहतर होती है , बल्कि यह आपके दिल-दिमाग को शांत करती है। इस सलाह को चेरपाल के रहने वाले शिक्षक तरूण सेमल ने दिल से लिया और अपने घर के आंगन में छोटी सी फूलवारी विकसित कर डाली। जिसमें कई प्रजातियों के दर्जनभर फूलदार पौधे हैं। ये पौधे प्लास्टिक की खाली बोतलों में उगाए हैं, जिन्हें रस्सियों की मदद से आंगन की तारबाड़ी में लटकाया गया है। तरूण सेमल की मानें तो उन्हें बागवानी पसंद है। वे किसान परिवार से भी है और अध्यापन कार्य के साथ खेती-किसानी भी करते हैं। बागवानी का शौक उन्हें पहले से हैं, लेकिन पौधों को प्लास्टिक की खाली बोतलों में उगाकर फूलवारी विकसित करने का ख्याल उन्हें दो साल पहले आया था, जब वे गर्मियों की छुट्टियों में अपने मित्रों के साथ सिक्कम भ्रमण पर गए थे। जहां उन्होंने पहाड़ियों में बसे घर, इको फ्रेंडली लोग और घरांे के आंगन में हेंगिंग गमले देखे थे।

सिक्किम से लौटने के बाद उन्होंने विचार बनाया कि जमीन पर पौधे उगाने के साथ अगर आंगन की तारबाड़ी की मदद से उसमें पौधे लगाए जाए तो बाड़ी सुंदर और आकर्षक लगेगी। फिर क्या था जहां चाह, वहां राह की तर्ज पर उन्होंने घर में उपयोग हुए शीतलपेय समेत प्लास्टिक की अन्य खाली बोतलों का इस्तेमाल करते उनमें मिट्टी, खाद के मिश्रण से पौधे रोपे। नियमित तिमारदारी फलस्वरूप अब पौधे भी बड़े हो गए हैं और उनमें फूल भी खिल चुके हैं। बीजापुर जिला मुख्यालय से लगभग पंद्रह किमी दूर गंगालूर मार्ग पर बसा गांव चेरपाल में शिक्षक तरूण सेमल की यह फूलवारी गांव वालों के लिए अब आकर्षण का केंद्र बन गया है। आस-पड़ोस के लोग उनके इस कारनामे की प्रशंसा करते नहीं थकते।

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