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बीजापुर : सीआरपीएफ की मदद से नौ साल बाद परिजनों से मिला सियाराम, जवानों को बेघरों की तरह भटक मिला था, पूछताछ में विक्षिप्त होने और परिवार से बिछड़ने की बात आईं सामने

बीजापुर। बातों ही बातों में 5-6 साल एक छोटा सा समयांतराल प्रतीत होता है , लेकिन हकीकत में ये समय इतना लम्बा होता है कि अपने किसी सदस्य से बिछड़ चुका परिवार पर ये दिन, महीने, साल भारी पड़ते हैं, लेकिन कहते है चमत्कार होते है और ऐसा ही चमत्कार किया है बीजापुर जिले में तैनात 85 बटालियन चेरपाल कैंप के जवानों ने। डीआईजी कोमल सिंह के मार्ग दर्शन, कमान्डेंट जैकब वीतुसिंग के नेतृत्व में।

हाल में जब बीजापुर जिले में नक्सलियों ने जब समाधान सप्ताह मनाने की घोषणा की, तो चेरपाल कैम्प ने कम्पनी कमांडर अविनाश राय, सहायक कमांडेंट सुनील कुमार के नेतृत्व में मोर्चा संभाला। गत 27 सितंबर को संदिग्ध नजर आने पर एक शख्स को कैम्प के मेन गेट के सामने रोका गया । निर्भय वातावरण में उससे बातचीत की गयी ।

जिसमें पता चला कि वह शख्स मानसिक विक्षिप्त है। जवानों ने उसे भोजन कराया। भोजन के बाद उसकी बोलचाल के आधार पर पश्चिमी उत्तर प्रदेश के तराई इलाके की बोली में बातचीत की गई तो पता चला शख्स ने अपना नाम सियाराम, पिता लालता प्रसाद निवासी पीलीभीत ज्ञात हुआ। इसके बाद गूगल की मदद से नजदीक पुलिस स्टेशन बीसलपुर तथा पुलिस चौकी चुर्रा सकतपुर में फोन किया गया। जहां से उसके गांव सोराह के मुखिया से संपर्क साधा गया।

सरपंच समेत परिजनों तथा गाँव वालों को जब सियाराम के जीवित होने की जानकारी मिली तो उन्होंने कम्पनी कमांडर के मोबाइल पर रात में विडियो कॉल करके सियाराम से बात की । सियाराम के बेटे संतोष, सरपंच समेत कुल तीन लोग सियाराम को लेने के लिए अगले दिन 30 सितम्बर को रायपुर पहुचे। रायपुर से बीजापुर आने तथा रहने खाने की व्यवस्था सीआरपीएफ ने की। सेवा और निष्ठा के ध्येय वाक्य को चरितार्थ किया । सियाराम जो कल तक एक विक्षिप्त होने के साथ बेघरों की तरह मारा-मारा फिर रहा था आज परिजनों से मिलकर खुश है। सियाराम तथा उसके परिजनों ने 85 बटालियन सीआरपीएफ को धन्यवाद दिया।

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