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प्रेस विज्ञप्ति : जिला एवं सत्र न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण 24 अगस्त 2021

राजेश श्रीवास्तव जिला एवं सत्र न्यायाधीश अध्यक्ष जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के मार्गदर्शन एवं मिशन मैं कोविड-19 के संक्रमण को ध्यान में रखते हुए आज दिनांक 28 जून को शैलेश तिवारी विशेष न्यायाधीश आदित्य जोशी अतिरिक्त जिला एवं सत्र न्यायाधीश भानु प्रताप सिंह प्यारी अतिरिक्त जिला एवं सत्र द्वारा ऑनलाइन वीसी के माध्यम से बताया गया कि पुलिस जब 20 तारीख 20 तारीख कर लेती है तो इसका मतलब यह नहीं है कि गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के सारे अधिकार खत्म हो गए अब हम बन गया बल्कि अभी भी उसके काफी अधिकार है जिनके बारे में उसे जाना चाहिए चाहिए उसके कानूनी अधिकारों का वर्णन ना हो भारतीय संविधान द्वारा भारत के नारी को कुछ मूल अधिकार प्रदान किए हैं जिनमें स्वतंत्रता का अधिकार भी शामिल है संविधान के अनुच्छेद टू वन में नागरिकों के प्राण एवं दहेज सफलता का मूल अधिकार दिया है यह तारीख की दशा में गिरफ्तार किए गए व्यक्ति के अधिकार की रक्षा की जा सकती है भारतीय दंड प्रक्रिया 1973 में गिरफ्तारी की प्रक्रिया बताई गई जिसमें विस्तार की है गैलेक्सी के अधिकारियों के तारीख करने वाले पुलिस अधिकारी के अधिकार व कर्तव्य बताए गए हैं गिरने वाले पुलिस अधिकारी का कर्तव्य होगा कि वह अपने नाम का टोकन धारण करें और गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का पंचनामा तैयार करें जिस पर दो व्यक्तियों और यह व्यक्ति के हस्ताक्षर कराएगा विस्तार करते समय गिरफ्तार किए गए व्यक्ति का कोई

रिश्तेदार मौजूद नहीं है तो गिरफ्तार किए गए व्यक्ति को अविलंब ऐसी किस तारीख की सूचना देना धारा 41b एक महिला को केवल महिला कांस्टेबल की उपस्थिति में यह कार्य किया जाना चाहिए और सूर्योदय से प्रदेश सूर्यास्त के बाद कोई भी महिला गिरफ्तार नहीं की जानी चाहिए यह केवल तभी हो सकता है जब व्यक्ति को गिरफ्तार करना बेहद जरूरी है पुलिस अधिकारी गिरफ्तार व्यक्ति को गिरफ्तार करने के तो 4 घंटे के अंदर मजिस्ट्रेट के समक्ष पेश करेगा सीआरपीसी की धारा फोर वन के अनुसार पुलिस किसी भी व्यक्ति को बिना वारंट के गिरफ्तार कर सकती है यदि वह भारत के किसी भी कानून का उल्लंघन कर चुका है या करने वाला है या करने की तैयारी कर रहा है लेकिन ऐसी गिरफ्तारी के लिए भी पुलिस के लिए कुछ नियम है तथा गिरफ्तार व्यक्ति के कुछ अधिकार है जिसका पालन करना आवश्यक है तू जिस किसी को भी अपनी मनमर्जी तरीके से यह सर नहीं कर सकती बल्कि उसे की शादी के लिए पूरी कानूनी प्रक्रिया अपनानी होगी अन्यथा कैसी है तेरी कोई पुलिस किसी को गैरकानूनी तरीके से गिरती है तो भारतीय दंड प्रक्रिया संहिता का उल्लंघन माना जाता है बल्कि यह स्थिति भारतीय संविधान के अनुच्छेद 20 और 102 में दिए गए मौलिक अधिकारों के भी खिलाफ है लिहाजा मौलिक अधिकारों के उल्लंघन पर पीड़ित पक्ष संविधान के अनुच्छेद 32 के तहत सीधे माननीय सुप्रीम कोर्ट या माननीय हाईकोर्ट जा सकता है

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