Sunday, December 15

Video: जिले के दो शिक्षित दिव्यांगों ने भेंट वार्ता में पहुच कलेक्टर से मांगा रोजगार, अपनी दृढ़ इच्छाशक्ति के दम पर अपने पैरों में होना चाहते है खड़े

बालोद (एजेंसी) | “कहते हैं दिव्यांग का अर्थ शारीरिक दुर्बलता नही, बल्कि मानसिक अपंगता है, यदि दृढ़ इच्छाशक्ति हो तो कोई भी अवरोध हमारा मार्ग अवरुद्ध नही कर सकता”…..उक्त लाइन उन सभी दिव्यांगों को समर्पित है जो अपने अंदर दृढ़ इच्छाशक्ति रख कुछ भी कर गुजरने का हौसला रखते है। जो ज़िंदगी के हर वह मुकाम हासिल करना चाहते है, जिसका सपना हर आम आदमी देखता हैं। दिव्यांग होने का यह कतई मतलब नही की आप कुछ नही कर सकते।

हर मन मे दृढ़ इच्छाशक्ति और लगन हो तो हर मुकाम हासिल किया जा सकता हैं। ऐसी ही कुछ मिसाल जिले के 2 पढ़े लिखे दिव्यांगों की हैं। जो सामान्य आदमी की तरह अपने पैरों पर खड़े होकर कुछ करना चाहते है, किसी पर बोझ नही बनना चाहते हैं। जी हां एक जो दृष्टहीन है और एक पैरों से अपंग।

दिव्यांग दृष्टहीन कमलेश दास मानिकपुरी और दिव्यांग राजेश्वरी साहू रोजगार की मांग को लेकर सोमवार को कलेक्टोरेट में आयोजित जन चौपाल भेंट वार्ता में पहुचे थे। जहां घंटो इंतज़ार के बाद उन्हें अपनी बात रखने का मौका कलेक्टर के समक्ष मिला। फिर कलेक्टर ने दोनो की मांग पर जल्द कार्यवाही करने के निर्देश दिए।

राजेश्वरी ने की दिव्यांग शाला कचांदुर में पुनः सहायक अनुदेशक नियुक्ति की मांग

पैरों से दिव्यांग राजेश्वरी साहू ने गुंडरदेही विकासखण्ड के ग्राम कचांदुर में स्त्तिथ दिव्यांग स्कूल में पुनः सहायक अनुदेशक के पद पर नियुक्ति करने की मांग कलेक्टर से की हैं। दिव्यांग राजेश्वरी साहू पिता स्वर्गीय खोरबाहरा राम साहू निवासी देवरी/क, ने बताया कि वह दोनों पैर से दिव्यांग है। साथ ही बीए में ग्रेजुएट तथा कंप्यूटर का डिप्लोमा भी कर चुकी हैं। सन 2017 में कचांदुर के दिव्यांग स्कूल में तत्कालीन कलेक्टर राजेश राणा ने सहायक अनुदेशक के कार्य पर रखने का आदेश दिया था। लेकिन उसी बीच दिव्यांगों का फंड आना बंद हो गया तथा स्कूल भी बंद हो गया। लेकिन 2019-20 के इस शिक्षा सत्र में फिर से दिव्यांग स्कूल खुल गया है। दिव्यांग राजेश्वरी ने कलेक्टर को अपने आवेदन के माध्यम से बताया कि उक्त स्कूल में सहायक अनुदेशक के रूप में वह कार्य करना चाहती हैं।

शिक्षित दृष्टहीन कमलेश ने मांगा रोजगार

गुंडरदेही विकासखण्ड के ग्राम तिलोदा निवासी दृष्टहीन कमलेश दास मानिकपुरी पिता हमीर दास मानिकपुरी ने बताया कि विगत कई वर्षों से वह रोजगार की तलाश में भटक रहे हैं। मेरी शैक्षणिक योग्यता 12वीं हैं साथ ही मैंने वर्कशाप का भी प्रशिक्षण प्राप्त किया हैं। जिसमें मोमबत्ती, चॉक, फिनाईल बनाना, कुर्सी बुनने का प्रशिक्षण प्राप्त किया हैं। इतना ही नही दृष्टहीन बच्चों को मोबेलिटी की ट्रेंनिग एवं एनजीओ में 1 वर्ष तक दृष्टहीन बच्चों को बेल लिपि के माध्यम से शिक्षा भी दी हैं। दृष्टहीन कमलेश मानिकपुरी ने योग्यता के आधार पर कलेक्टर से रोजगार दिए जाने की मांग की हैं।

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