Thursday, November 25संस्थापक, प्रधान संपादक, स्वामी श्री नवनीत जगतरामका जी
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Author: सुरेंद्र वर्मा (अतिथि लेखक)

पुलिस स्मृति दिवस : खाकी के भीतर धड़कती सांसो से ही हमारी जान में जान है

पुलिस स्मृति दिवस : खाकी के भीतर धड़कती सांसो से ही हमारी जान में जान है

विशेष लेख
प्रायः पुलिस कर्मी को अपना फ़र्ज पूरा करते देखते रहने के बावजूद अक्सर उनकी आलोचनाएं ज्यादा करते हैं, उन पर आरोप भी मढ़ते हैं जिनमें से कुछ सच लेकिन अधिकांशतः गलत होते हैं। पर हम भूल जाते हैं कि ये लोग कितना कठिन काम करते हैं। आज के दिन हमें उनकी सेवा को उस नजरिये से देखने की जुरूरत है कि हमारी पुलिस आम लोगों की जान माल की रक्षा करने में अपनी जिंदगी से किस तरह से सहर्ष समझौता कर लेते हैं और वक्त-ब-वक्त अपनी जिंदगी न्यौछावर करने से भी नहीं चूकतेश्। देश के प्रथम प्रधानमंत्री पंडित नेहरू जी के इस उद्गार को पुलिस के लिए पहला सम्मान माना जा सकता है। मौका था जयपुर राजस्थान में पुलिस स्मारक के लोकार्पण का और तारीख थी साल 1963 के 05 नवंबर का। बहरहाल अगली कड़ी में आज पुलिस स्मृति दिवस के मौके पर हमर छत्तीसगढि़या पुलिस को सब ले बढि़या होने की तर्ज पर सम्मान करने की जुरूरत और जिम्मेदारी हम छत्तीसगढ...
शिक्षक दिवस, 05 सितंबर 2021 के मौक़े पर आई.जी.श्री दाॅगी की जीवनी पर खास पेशकश शिक्षक से महानिरीक्षक तक केवल परीक्षा ही परीक्षा: तब श्रवण पुत्र बन पाए हैं

शिक्षक दिवस, 05 सितंबर 2021 के मौक़े पर आई.जी.श्री दाॅगी की जीवनी पर खास पेशकश शिक्षक से महानिरीक्षक तक केवल परीक्षा ही परीक्षा: तब श्रवण पुत्र बन पाए हैं

विशेष लेख
शिक्षक से महानिरीक्षक बनने के जज्बे को यथार्थ में साबित करना, और अपने समकक्ष तीन अफ़सरों के अलावा दीगर नामचीन पुलिस अधिकारियों के बीच मुकद्दर का सिकंदर कहलाने का श्रेय हासिलात करने की कवायद आसमां से तारे तोड़ लाने जैसे मिसाल को मुक्कम्मल बनाने वाले छत्तीसगढ़ बिलासपुर रेंज के आई.जी.श्री रतन लाल डांगी का नाम बेहद अदब और शउर के साथ लिया जाता है। फिलहाल दो पुलिस रेंज बिलासपुर और सरगुजा के आई.जी. यानि 10 जिलों क्रमशः बिलासपुर, मुंगेली, जीपीएम, जांजगीर-चांपा, कोरबा, रायगढ, अंबिकापुर, बलरामपुर, सूरजपुर, कोरिया के सुपरविजन आफिसर तो हैं ही गुजिश्ता 15 अगस्त को घोषित चार नये जिलों में से सक्ती, सारंगढ़ और मनेन्द्रगढ़ जिले की नई तस्वीर बनाने की साझी जिम्मेदारी भी इन पर है। राजस्थान की जमीन पर जन्म होने के बाद अपनी तकदीर को उंचा बनाने का हौसला और छत्तीसगढ़ की धरती में कदमपोशी की तवारीख से लेकर अब तक के सेवा...
नोबल कविगुरू रबिंद्रनाथ टैगोर की जयंती 07 अगस्त के मौके पर खास पेशकश

नोबल कविगुरू रबिंद्रनाथ टैगोर की जयंती 07 अगस्त के मौके पर खास पेशकश

विशेष लेख
साल 1890 में बिलासपुर रेल्वे स्टेशन की बिल्डिंग ब्रिटिश हूकूमत के नुमांइदों के द्वारा बनाई गई है। यूरोपियन शैली में बनी इस बिल्डिंग के उपरी मंजिल में चढ़ने उतरने के लिए सीसम लकड़ियां की सीढ़ी का उपयोग अभी हाल के दिनों तक किया गया है। इसी बिल्डिंग की मुख्य दीवार में तत्कालीन डीआरएम श्री बनर्जी द्वारा कविगुरू रबिन्द्र्रनाथ टैगोर रचित एक कविता डिस्पले है । रायगढ़ की प्रख्यात शिक्षाविद् श्रीमति टुम्पा देवाशीष सरकार बताती हैं कि वो खुद बिलासपुर की हैं उनकी दिवंगत श्वसुर इसी रेल्वे विभाग में स्टेशन मास्टर रहे हैं, फलतः स्टेशन से गुजरना नियमित रहा है। हिंदी बांग्ला और अंगे्रजी भाषा में लिखी इस कविता में छुपी भावनाओं को स्पष्ट करती हुई टुम्पा का कहना है कि श्री रबिन्द्र नाथ टैगोर द्वारा फाॅकी एक बहोत ही सुंदर भावनात्मक भरी हार्दिक श्ऱद्धांजलि है, अर्थ है भ्रम (छल)। कविता एक ऐसे वायदे के ईदगिर्द घू...
142वीं जयंती 31 जुलाई 2021 के मौके पर खास पेशकश प्रेमचंद की कहानियों में भारत दर्शन कितना उजला, कितना धुंधला?

142वीं जयंती 31 जुलाई 2021 के मौके पर खास पेशकश प्रेमचंद की कहानियों में भारत दर्शन कितना उजला, कितना धुंधला?

विशेष लेख
नवाब वह होता है, जिसके पास कोई मुल्क हो, हमारे पास मुल्क कहां ?‘‘ बे-मुल्क भी नवाब होते हैं ? ‘‘ यह किसी कहानी का नाम हो जाए तो बुरा नहीं, मगर अपने लिए यह घमंड पूर्ण है। चार पैसे पास नहीं और नाम नवाबराय । इस नवाबी से प्रेम भला, जिसमें ठंडक भी है, संतोष भी। अपनी मुसीबतों पर इस तरह हंसते हुए प्रेमचंद जी ने अपने नवाब को निरर्थक ठहराया। हिंदी साहित्य के कालजयी पत्रिका ‘‘हंस‘‘के मई, 1937 के अंक में प्रकाशित सुदर्शन जी और प्रेमचंद जी के बीच हुए संवाद तब के वक्त में हुआ रहा जब 1909 के दौर में प्रेमचंद की कहानी सोज़े वतन, ज़माना प्रेस, कानपुर की प्रतियां अंग्रेज सरकार ने बगावती लेख मानकर जप्त कर ली थीं। तब उर्दू अख़बार ज़माना के संपादक मुंशी दयानारायण निगम जी ने नवाबराय नाम की जगह प्रेमचंद के नाम से लिखना सुझाये थे। और उसी दौर में सुदर्शन जी ने प्रेमचंद से सवाल किये थे कि आपने नवाबराय नाम क्यूं छो...
93 साल का हुआ आकाशवाणी, प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लोकवाणी से मिली संजीवनी

93 साल का हुआ आकाशवाणी, प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लोकवाणी से मिली संजीवनी

मनोरंजन, राष्ट्रीय, विशेष लेख
आकाशवाणी को 94 साल के उम्रदराज होने की बधाईयां। हिंदुस्तान के आकाश की फ़िजां की हवाएं में घुली मिसरी की डली जैसे मीठी मीठी आवाजों की जादूगरी 23 जुलाई से 1923 से जो शुरू है, इसका तिलस्म आज भी मौजूद है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की ‘मन की बात’ और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी की लोकवाणी कार्यक्रम ने आकाशवाणी की लोकप्रियता को अर्श की उंचाई की तरफ ले जाना भी आकाशवाणी के महत्व और इतिहास को सुनहला बनाये जाने की कवायद एक मिसाल साबित हुई है। आने वाले छः साल में आकाशवाणी के वजूद के 100 साल पूरे होना है। देश के गांव-गांव, देहात-देहात और शहर के मुहल्ले मुहल्ले के अलग अलग लोक भाषा में आकाशवाणी सुननेवालों के अंर्तमन में युवा तरंगे भी हिलोले मारने लगी है। सूबूत है आकाशवाणी की बढ़ती लोकप्रियता और एफ.एम., सामुदायिक रेडियो केन्द्रो की तादाद में इजाफा । बहरहाल आकाशवाणी की बढ़ती कामयाबी...
अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के मौके पर खास पेशकश सहकारिता के जरिये पुलिस परिवार की गृहणियों में सामाजिक लगाव बढ़ाने डीजीपी की एक नई कोशिश

अंतर्राष्ट्रीय सहकारिता दिवस के मौके पर खास पेशकश सहकारिता के जरिये पुलिस परिवार की गृहणियों में सामाजिक लगाव बढ़ाने डीजीपी की एक नई कोशिश

विशेष लेख
मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल द्वारा सहकारिता उद्यम के माध्यम से प्रदेश की महिलाओं के अर्थ अर्जन के लिए लागू गढ़कलेवा कार्यक्रम के तर्ज पर डीजीपी श्री डी.एम.अवस्थी ने भी सहकारिता के जरिये पुलिस परिवार के गृहणी महिलाओं में उद्यम और सामाजिक लगाव बढ़ाने में एक नई कोशिश की है। विश्व महिला दिवस के सप्ताहंत में 12 माॅर्च को डीजीपी श्री डी.एम.अवस्थी ने जिला बालोद में विभागीय कल्याणार्थ कार्यक्र्रम में शिरकत करने के दौरान अपने उद्बोधन में पुलिस परिवार की गृहस्थ महिलाओं के आर्थिक उपार्जन और आपसी सामाजिक समरसता बढ़ाने के लिए सहकारिता अनुबंधों के तहत महिला स्व-सहायता समूह का गठन करने और पुलिस पेट्रोल पम्प परिसर में शौर्या रेस्टाॅरेंट संचालित करने का ना केवल आव्हान किये बल्कि रेस्टाॅरेंट हाॅल निर्माण के लिए पुलिस कल्याण कोष से 5 लाख रूपये की राशि मुहैया कराने का एलान भी किये। गौरतलब है कि पुलिस परिवा...
विशेष लेख : इंसानी ज़ज्बा से लबरेज़ बदायूं पुलिस का यह मिसाल छ.ग.पुलिस के लिए भी नज़ीर बने – सुरेंद्र वर्मा

विशेष लेख : इंसानी ज़ज्बा से लबरेज़ बदायूं पुलिस का यह मिसाल छ.ग.पुलिस के लिए भी नज़ीर बने – सुरेंद्र वर्मा

विशेष लेख
एक राष्ट्रीय अखबार के पन्ने के हाशिये पर छपी एक खबर की संवेदनशीलता हरेक पाठक के मन में कौतूहल मचाई होगी, यह दावा कमतर हो सकती है। लेकिन खुद के भाव विव्हलतावश इंटरनेट सर्फिग के जरिये जनपद बदायूं के पुलिस अधीक्षक (ग्रामीण) श्री सिद्धार्थ वर्मा से इस न्युज टाॅपिक पर टेलिफोनिक बात करने में कामयाब हो ही गया। शुरूवात में ही छत्तीसगढ़ प्रदेश में इस खबर को पढ़ाने की बात सुनकर श्री सिद्धार्थ अपनी खुशी को हालांकि दबा गये लेकिन सबब जानकर थोड़ी देर बात खुद और अपने मातहतों के मौके की तस्वीर भेजकर अपनी प्रसन्न्ता जाहिर भी की। मौके की एक तस्वीर से यह स्पष्ट है कि एक खाकी वर्दीधारी अपने हाथों के सेज में उठाकर एक वृद्धा को इलाज के लिए ले जाने को तत्पर है और वहीं पर ग्रामीण जन खड़े ख़़ड़े नजारे को देख रहे हैं पर मददगार कोई नहीं हुआ। खबर के मुताबिक ग्राम बिशारतगंज जिला बरेली (उ.प्र.) के रहने वाले ग्रामीण रामना...