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बीजापुर : एड़समेटा कांड के दोषियों को बख्शा ना जाएं, पीड़ित परिवारों को सरकार दे 50-50 लाख का मुआवजा

बीजापुर। एड़समेटा एंकाउंटर की न्यायिक जांच रिपोर्ट सामने आने के बाद पीड़ित परिवारों को आर्थिक मदद के अलावा फर्जी मुठभेड़ को अंजाम देने वाले दोषी जवानों-अफसरों के विरूद्ध दण्डात्मक कार्रवाई की मांग को लेकर बुधवार को सीपीआई जिला ईकाई ने मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा। जिला सचिव कमलेश झाड़ी ने हत्याकांड के जिम्मेदारों पर कड़ी कार्रवाई की मांग की है। पत्रकारों से चर्चा में कमलेश ने कहा कि वर्ष 2013 में एड़समेटा में चार नाबालिग समेत आठ ग्रामीण मारे गए थे। पिछली सरकार ने मृतकों को नक्सली बताया था, जबकि घटना के बाद सीपीआई का जांच दल सबसे पहले एड़समेटा पहुंचा था और तब हमने कह दिया था कि ये फर्जी मुठभेड़ है, जो मारे गए वो नक्सली नहीं बल्कि निर्दोष आदिवासी है। हमारे इस दावे पर जांच रिपोर्ट ने भी मुहर लगा दी। जांच रिपोर्ट में यह स्पष्ट हो गया है कि जो मारे गए थे वे नक्सली नहीं बल्कि आम आदिवासी थे। अब सीपीआई की मांग है कि फर्जी एंकाउंटर में संलिप्त जिम्मेदार अफसरों, जवानों पर दण्डात्मक कार्रवाई हो। साथ ही पीड़ित परिवारों को 50-50 लाख का मुआवजा और परिवार के एक सदस्य को सरकार नौकरी दें। कमलेश का यह भी कहना था कि सारकेगुड़ा और एड़समेटा की घटना में कोई अंतर नहीं हैं। दोनों की जांच रिपोर्ट सामने आ चुकी है। सच से सभी वाकिफ है, बावजूद बस्तर में सरकारें आदिवासियों को वे बुनियादी सुविधाएं नहीं दे रही, जिनके वे हकदार है बल्कि सुरक्षा बलों के जरिए अंदर घुस कर उन्हें मारा जा रहा है। पहले बीजेपी और अब कांग्रेस भी आदिवासियों को मारने का काम ही कर रही है।

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