Thursday, September 23संस्थापक, प्रधान संपादक, स्वामी श्री नवनीत जगतरामका जी
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93 साल का हुआ आकाशवाणी, प्रधानमंत्री मोदी के मन की बात और मुख्यमंत्री भूपेश बघेल के लोकवाणी से मिली संजीवनी

आकाशवाणी को 94 साल के उम्रदराज होने की बधाईयां। हिंदुस्तान के आकाश की फ़िजां की हवाएं में घुली मिसरी की डली जैसे मीठी मीठी आवाजों की जादूगरी 23 जुलाई से 1923 से जो शुरू है, इसका तिलस्म आज भी मौजूद है। प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी की ‘मन की बात’ और छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री श्री भूपेश बघेल जी की लोकवाणी कार्यक्रम ने आकाशवाणी की लोकप्रियता को अर्श की उंचाई की तरफ ले जाना भी आकाशवाणी के महत्व और इतिहास को सुनहला बनाये जाने की कवायद एक मिसाल साबित हुई है। आने वाले छः साल में आकाशवाणी के वजूद के 100 साल पूरे होना है।

देश के गांव-गांव, देहात-देहात और शहर के मुहल्ले मुहल्ले के अलग अलग लोक भाषा में आकाशवाणी सुननेवालों के अंर्तमन में युवा तरंगे भी हिलोले मारने लगी है। सूबूत है आकाशवाणी की बढ़ती लोकप्रियता और एफ.एम., सामुदायिक रेडियो केन्द्रो की तादाद में इजाफा । बहरहाल आकाशवाणी की बढ़ती कामयाबी के 93 सालगिरह लिए जुझारू भागीदारों, हिस्सेदारों को स्मरण करते हुए उनके तर्जुबा तरूम से आज रू-ब-रू होने के हम सब मुंतासिर भी हैं।

देश के सबसे पुराने आकाशवाणी केन्द्रों में से अंबिकापुर आकाशवाणी की एक सीनियर एनांउसर की बंगलरू में रहने वाली बेटी शुभि अपनी मां की कसीदें गढ़ती मुखातिब हो बताती हैं कि मेरी मां की रेशमी आवाज से ना केवल आकाशवाणी बिल्डिंग की दीवारें गूंजायमान है, बल्कि सुननेवालों की वो चहेती भी बनी है। वजहों का खुलासा करती हुंई शुभि के मुताबिक उनकी मां को 33 साल हो रहे हैं आकाशवाणी में काम करते करते और गुजिश्ता वक्त में इनके सहयोग और कार्य सर्मपण से उनकी मां की बटोरी खूब सारी सराहनाएं उनके घर के बेशुमार कीमती खजानों में से एक होना शुभि बताती है।

शुभि दुधमुंही बचपना से ही अपनी मां की गोद में आकाशवाणी जाती आती रही हैं वहां के माहौल को देखी सुनी हैं। मुझसे सवाल करती हैं कि आप को याद है 24 को गुरू पूर्णिमा मनाया गया। मैनें उतावले से पूछा मतलब ? मतलब ये आकाशवाणी के अपने कैरियर की शुरूवाती दौर में मिली सीख और प्रशिक्षण के लिए मेरी मां भी अपने वरिष्ठ अधिकारियों आदरणीय श्री रजत सेन जी गुप्ता और श्री राजीव शुक्ला जी को गुरू मानकर उनकी उपासना पूजन कर उन्हें नमन प्रणाम करना नहीं भूलती है, इन्हीं सद्गुण से मेरी मां को ओजस हासिल है और मुझे भी। मेरी मां को आकाशवाणी के जरिये देश के नामचीन फ़नकारों के कार्यक्रमों में एंकरिंग भी करने का फ्रख भी हासिल है।

पिछली यादों को तर-ओ-ताज़ा करती हुई शुभि बताती हैं कि मार्निग शिफ्ट की ड्यूटी करने के लिए जाने के पहले हम लोगों के बिस्तर में ट्रांजिस्टर ऑन कर जाती थीं। आकाशवाणी ट्यून सुनकर हम लोग बिस्तर से उठकर स्कूल जाने के लिए तैयार होते थे। अभी उस रोमांच कर याद कर सिहर उठी हूं देखिए ना मेरे हाथों के रोम कैसे खड़े हो उठे हैं फिर उसे याद आता है कि हम लोग वाॅयस काॅल पर हैं शायद शरमा कर झिझक जाती है। शुभि एमबीए करने के बाद निजी क्षेत्र में अपना भविष्य आजमाने की कोशिश में है लेकिन अपनी मां के कर्मक्षेत्र अपनाए जाने की सोच न रखने का मलाल भी उससे हुंई बातचीत में महसूस किया गया।

अलबत्ता बातचीत के आखिर में आकाशवाणी को 93 साल के मुकाम पर पहुंचाने के लिए आकाशवाणी में काम करने वाले, जुडे़ हुए लोगों सहित में शुभि अपनी मा नाम जाहिर करती है, और अपनी मां माधवी वर्मा का इस्तेकबाल करते हुए मुझसे अलविदा होतीं हंै। श्री नीरज प्रभाकर आकाशवाणी केन्द्र रायगढ़ के पिछले 21 सालों से स्टेशन प्रभारी हैं। मास्टर ऑफ़ आर्ट्स (पाॅलिटिकल साईस) के डिग्री होल्डर हैं। इनके पिता श्री कुलभूषण भिलाई स्टील प्लांट के मुलाजिम रहे हैं, जबकि मां श्रीमति विजय लक्ष्मी बीएसपी प्लांट के स्कूल में सीनियर टीचर रहीं हैं। कांपटिशन एक्साम के जरिये फरवरी 1996 को ट्रासंमिशन एक्सीक्यूटिव के पद सलेक्ट किये गये।

अंबिकापुर आकाशवाणी केन्द्र में पहली पोस्टिंग के दौरान इन्हें इनकी गृह-लक्ष्मी भी मिलीं और इसी साल इन्होने एनांउसर जागृति के साथ विवाह बंधन में बंधे। जागृति एक शिक्षाविद् भी हैं और रायगढ में बच्चों का एक स्कूल संचालित करती हैं। नीरज और जागृति को समाज के लिए नज़ीर माने जाने की वजहों से एक वजह यह भी है कि इन्होनें अब तक अनेकों जरूरत मंद बच्चों को शिक्षा मुहैया कराने में अपने धन और मन का गुप्तदान करते रहे है। आकाशवाणी से जुड़ने की अपनी ललक के बारे में नीरज बताते हैं कि दुर्ग काॅलेज में पढ़ाई के दौरान स्टुडेंटस डेलीगेशन के साथ आकाशवाणी रायपुर में एक प्रोग्राम के शिरकत करने की झलक अभी भी उनकी आंखों का आकर्षण है।

बहरहाल नीरज आकाशवाणी के अपने तक के कार्यकाल में साल 2016़ में देश के चुनिंदा 39 आकाशवाणी केन्द्रो में से रायगढ़ को स्थान दिलाने का गौरव हासिल कर चुके हैं । इनके जीवन के यादगार पलों में से उस अमूल्य क्षण का जिकर करते हैं जब उन्हें आकाशवाणी दिल्ली के मुख्यालय में पूर्ववर्ती सी.ई.ओ. जनाब शहरयार जी ने इन्हें सलाम कहकर नवाजा। सलाम के मायने सेल्यूट से है। नीरज अपने कार्यशैली के बारे में बताते हैं कि उन्हंे रोजाना ट्रांसमिशन की मानिटरिंग करना होता है, डेली रिपोर्टिग्र करनी होती है तथा अनांउसर्स, आर्टिस्ट, तकनीकी स्टाॅफ, के प्रस्तुति की ग्रेडिंग देनी भी होती है। यह भी सावधानी बरतनी होती है कि कहीं कोई प्रतिकूलता एअर पर नहीं चली जाए। भारतीय पुलिस सेवा के श्री दीपक झा 2018 में जब एस.पी.रायगढ़ हुआ करते थे तब इस दौरान आकाशवाणी के स्टुडियो में श्री झा की मेहमानी करने का अवसर मिलने से नीरज आल्हादित भी हैं।

आकाशवाणी के 94वें साल की सालगिरह के मौके पर नीरज प्रभाकर गौरवान्वित हैं। माननीय प्रधानमंत्री श्री नरेन्द्र मोदी जी के देश के नाम संबोधनों और संदेशों के प्रयसाण से आकाशवाणी की महत्ता और उपयोगिता बढ़ी है। श्री शशि प्रकाश पांडेय आकाशवाणी केन्द्र रायगढ़ के प्रसारण अधिकारी हैं, वर्ष 1996 से यहीं पदस्थ हैं। श्री पांडेय जी अब तक के अपने कार्यकाल में कोरोना आपदा काल में आकाशवाणी के महत्व को अत्यधिक प्रभावी एवं जन उपयोगी होने के तर्क में बताते हैं कि कोरोना संक्रमण के दौरान आकाशवाणी से सुबह, दोपहर, शाम को लगातार किसानों और मवेशी पालकों को कोरोना संक्रमण फैलाव रोकने के प्रति जागरूकता कार्यक्रम चलाया जाता रहा है, कृषि वैज्ञानिकों, विशेषज्ञों और पशु चिकित्सकों से किसानो और मवेशी पालकों का साक्षात्कार कराया जाता रहा ताकि अनाज उत्पादन और स्वच्छ दुग्ध की आपूर्ति आम जनों को मिलता रहे।

शाॅक सब्जी के जरिये कोरोना संक्रमण के रोकथाम के उपायों के संबंध में सब्जी विक्रेताओं और उपभोक्ताओं को जानकारी दी जाती रही है। खेतों, चारागाहों तथा कोठरों में टी.व्ही और मोबाईल फोन्स की अपेक्षा रेडियो सुनना ज्यादा आसान रहने से आकाशवाणी के कार्यक्रमों की उपयोगिता बढ़ती गई रेडियो सुनने रखने की लोगों की आदत में शुमार हो गया है। खासकर गांव देहात में जहां पर बिजली ना रहने की समस्या रही है। श्री पांडेय के बातचीत यह अहम बात छनकर आई कि टी.व्ही. मोबाईल देखने से आंखों की रोशनी और याददाश्त पर संक्रमण आने की संभावना बनी रहती है।

चिकित्सक और मनोवैज्ञानिक भी इन डिवाईसेस को ज्यादा इस्तेमाल करने से परहेज रखने की सलाह भी देते हैं परन्तु ट्रांजिस्टर को मेढ़ के पेड़ की डाली में टांग दीजिए, कोठार के कांड लकड़ी में लटका दीजिए तकिए के बाजू में रख लिजिए कोई संक्रमण का सवाल ही नहीं बल्कि मनोरंजक गाना गजल, भंक्ति गीत, के साथ साथ माननीय प्रधानमंत्री जी के संबोधनों संदेशों को जानने समझने मौक़ा मिलता रह रहा है। भोपाल, बिलासपुर, रायगढ़ और अंबिकापुर आकाशवाणी को अपने कार्यकाल में नये सोपान पर पहुंचाने वाली श्रीमति कविता सिंह हालांकि रिटायर्ड हो चुकीं है, इस मौके पर स्थानीय लेबल में उन्हें स्मरण करना भी आकाशवाणी के केन्द्रो मंे उनके योगदान को स्मरण करना भी उनका सम्मान करना जैसा है।

बिलासपुर आकाशवाणी केन्द्र के प्रभारी श्री महेश साहू, आकाशवाणी केन्द्र जगदलपुर की वरिष्ठतम एनाउंसर गायत्री आचार्य, आकाशवाणी रायपुर के बरसाती भईया, जनाब मिर्जा मजूद साहब, श्री अरर्विद माथुर सहित अनेकों कर्मवीरों के साथ साथ आकाशवाणी को पहचान देने वाले एनाउंसर जनाब अमीन सयानी, श्री कमल शर्मा की कोशिशें भी आकाशवाणी को साल के 94 पायदान पर पहंुचाने के लिए चिर निरंतर स्मरणीय रहेगें ।

सुरेंद्र वर्मा

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