जंगलों में लगे आग तो कैसे रोकेगा विभाग

इस्पात टाइम्स/रायगढ़। रायगढ़ वन मंडल के जंगल में अगर आगजनी की घटनाएं हो तो उसे रोकने के लिए विभाग की तैयारी शुन्य है। पिछली साल तो २६ जनवरी को ही आगजनी की घटनाएं हो चुकी थी। पर इस साल आगजनी को रोकने अभी विभाग की तैयारी फाइलों में कैद है। जबकि वन प्रबंधन समितियों को आग पर काबू पाने को लेकर ट्रेनिंग देने, नुक्कड़ नाटक के जरिए ग्रामीणों को जागरूक करने, टोल फ्री नंबर का प्रचार प्रसार व अन्य गतिविधियां अभी ठंडे बस्ते में हैं। jangal
रायगढ़ वन मंडल में वर्ष 2015 की तुलना में वर्ष 2016 में आगजनी की घटनाएं ज्यादा हुई थी। जिसकी शुरूआत पिछले वर्ष तो २६ जनवरी से ही हो गई थी। जिसकी पुष्टि विभागीय आंकड़े भी बयां करते हैंं। पर इस साल आगजनी को रोकने विभाग की तैयारी फाइलों में ही कैद है। इस मामले में अभी तक ना तो विभागीय अधिकारी की नींद खुली है और ना ही संबंधित कर्मचारी की। ऐसे में, गर्मी के दस्तक देने के साथ ही अगर आगजनी की घटनाएं हुई तो विभाग को उसपर काबू पाने काफी मशक्कत करनी पड़ सकती है। इस मामले पर विभागीय अधिकारी से चर्चा करने के दौरान उन्होंने बताया कि वन प्रबंधन समितियों को आग पर काबू पाने को लेकर ट्रेनिंग देने, नुक्कड़ नाटक के जरिए ग्रामीणों को जागरूक करने, टोल फ्री नंबर का प्रचार प्रसार व अन्य गतिविधियां की जानकारी दी।
पर अभी कोई भी पहल जमीन पर नहीं उतरने की पुष्टि भी की। विभागीय आंकड़ों की माने तो वर्ष २०१४-१५ में स्थानीय वन मंंडल में जहां आगजनी के २१ प्रकरण दर्ज किए गए। वहीं वहीं २०१५-२०१६ में ४१ प्रकरण दर्ज किए गए। जो पिछले साल के मुकाबले करीब डबल है। जिसमें तमनार में २० जबकि रायगढ़ रेंज में १४ आगजनी के मामले शामिल है। उसके बावजूद भी विभाग की तैयारी अभी फाइलों में है।
रेंजवार उपलब्ध है लीफ ब्लोवर मशीन
विभागीय से मिली जानकारी के अनुसार जंगल में आगजनी की घटना को रोकने के लिए पिछले वर्ष ही रेंजवार एक-एक लीफ ब्लोवर मशीन दी गई है। अगर रायगढ़ रेंज की बात करे यहां दी गई मशीन का अब तक खाता नहीं खुला है। जबकि पिछले वर्ष रेंज में आगजनी की कई घटनाएं हो चुकी है। ऐसे में, प्रशासन की यह बेफ्रिकी कहीं भारी ना पड़ जाए, ऐसी चचार्एं जोरों पर है।