विदेश पैसे भेजने के मामलों को खंगालेगा ईडी

मुंबई। काले धन के खिलाफ मुहिम की अगली कड़ी में प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की नजर विदेश में रकम भेजने के वैध तरीकों पर टिक गई है। निदेशालय के अधिकारियों को संदेह है कि विमुद्रीकरण के दौरान धन बाहर भेजने के लिए उदारीकृत प्रेषण योजना (एलआरएस) और अग्रिम आयात प्रेषण का दुरुपयोग किया गया। ईडी के एक वरिष्ठ अधिकारी ने कहा कि सभी तरीकों से विदेशों में पैसे भेजने के मामलों की जांच की जा रही है। एजेंसी इस बात की पड़ताल कर रही है कि इस संबंध में दी गई जानकारी और पैसा भेजने का उद्देश्य वास्तविक था या नहीं। माना जा रहा है कि ईडी ने रिजर्व बैंक से भी पूछा है कि एलआरएस की सीमा से अधिक पैसा विदेश भेजने के मामलों में उसकी अनुमति ली गई थी या नहीं।
ईडी के निदेशक कर्नल सिंह की अगुआई में 17 से 19 जनवरी तक मुंबई में हुई एजेंसी की बैठक में इस बारे में एक कार्ययोजना तैयार की गई। इस बैठक में शामिल एक अधिकारी ने बताया कि अधिकारियों को पिछले दो महीने के दौरान विदेश पैसे भेजने के सभी मामलों की जांच करने को कहा गया है। एलआरएस के तहत कोई व्यक्ति अधिकतम 2.50 लाख डॉलर तक विदेश भेज सकता है। इस राशि को अचल संपत्ति खरीदने, इक्विटी में निवेश और कर्ज चुकाने, शिक्षा या चिकित्सा पर खर्च किया जा सकता है। आरबीआई के आंकड़ों के अनुसार नवंबर 2016 में एलआरएस के तहत 62.08 करोड़ डॉलर विदेश भेजे गए जबकि एक साल पहले इसी अवधि में यह राशि 33.34 करोड़ डॉलर थी।
यात्रा और करीबी संबंधियों को भेजे जाने वाले खर्चे में हाल के महीनों में भारी उछाल आई है। आगे इस जांच का दायरा बढ़ने की पूरी संभावना है। इस मामले में धन शोधन निरोधक कानूनों और केवाईसी नियमों का उल्लंघन करने के मामलों में कुछ निजी और सरकारी बैकों की भी जांच होगी। ईडी के अधिकारियों का अनुमान है कि विदेशों में पैसा भेजने के विभिन्न तरीकों की आड़ में करीब 2,500 से 3,000 करोड़ रुपये देश से बाहर भेजे गए। इनमें से 700 करोड़ रुपये की पुष्टि हो चुकी है।