मोदी और जेटली हो गये कानून कायदों से भी ऊपर, कर रहे बेफिजूल बयानबाजी…

देश आजाद हुआ तब से आज तक का हिसाब चेक करने वाला हूँ – मोदी
लोग ब्लेक मनी से ही सब करना चाहते है, शादी है तो क्या हुआ – जेटली
कुछ भी जो मन में आये बोलते जाना एक देश के प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री का काम नही है, ना ही ऐसा कहने की कोई जरूरत है और ना ही उन्हें शोभा देता है । प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री की हैसियत से बयानबाजी कर रहे मोदी और जेटली जिस भाषा का उपयोग कर रहे है वो उचित नही है और कानूनन सही भी नही है, जो बात कानून में नही है ना ही देश का कोई कानून उन्हें वैसा करने का अधिकार देता है उसे दोनों लोग अपने मन से लोगो में देश की जनता में बिना वजह का भय पैदा करने की नीयत से देश विदेश के मंचो से बड़ी निडरता से ऐसे बोल रहे है जैसे वो ही इस देश का कानून है कायदा है या यूँ कहिये सुल्तान है और देश वासी उनके गुलाम।modi'
आपने एक लोकतान्त्रिक देश की 85% प्रचलित मुद्रा एक झटके में चलन से बाहर कर दी और नई मुद्रा की आपूर्ति कर नही पा रहे है ऐसे में लोगो को हो रही रोजमर्रा की परेशानियों को नजर अंदाज करके आप आपकी जनता का मजाक उड़ा रहे है, धमका रहे है, बिना मतलब के उलूल जुलूल बयानबाजी भाषणबाजी कर रहे है। एक तरफ पूरा देश नगदी की समस्या से बुरी तरह से जूझ रहा है उनकी सुनने वाला कोई नही है लोग अपने बच्चो की शादी में पैसो के इंतजाम को लेकर चिंतित है, रोजमर्रा की जरूरतों की पूर्ति के लिए पैसो के इंतजाम में लगे है, एटीएम से, बैंक से पोस्ट आफिस से कहीं से भी पैसे नही मिल पा रहे है सब परेशान है चाहे वो सत्यवादी हरिश्चन्द्र ही क्यों ना हो परेशान है, कहीं कोई भुगतान नही हो पा रहा, पुरे देश में लोग अभी नेट बैंकिंग, कार्ड स्वेपिंग, डेबिट और क्रेडिट कार्ड आदि के अभ्यस्त नही हुए है और ना ही सब विक्रेताओं के पास आॅनलाइन पेपर लेस पैसो में भुगतान लेने की कोई व्यवस्था है, ऐसे में सभी ओर त्राहि त्राहि मची हुई है। ऐसे में आपको जनता का मजाक उड़ाना कहाँ शोभा देता है। आप कहते है आप और आपकी सरकार ईमानदार के साथ है, तब जो शादी के लिए और अपनी अन्य अति आकाश्यक जरूरतों, आकाश्यक व्यावसायिक जरूरतों के लिए अपने खाते में जमा पैसा निकलना चाहता है तो उसे रूपया क्यों नही दे देते क्या वो भी आपकी नजर में चोर है, अरे बैंक में जमा करे या निकाले वो तो आपके नजर में आ ही गया फिर बेईमान कैसे हो गया। जो बैंक खाते में है वो पूरा सच्चा है उसमें झूठा होने की कोई गुंजाईश ही नही है। ऐसे में क्यों। बे वजह लोगो को परेशान किया जा रहा है, जो जितना जमा करना चाहता है उसे उतना जमा और जो जितना निकलना चाहता है उसे उतना निकालने दिया जाना चाहिए। कोई प्रतिबन्ध नही होना चाहिए। ये लाइन लगाने का काम बंद होना चाहिए। जिसके पास जितनी नगदी है लेकर आये और बैंक में अपने खाते में जमा कर दे । खाता नही है तो केवायसी नार्म देकर खाता खुलवाये और नगदी जमा कर दे और जितनी रकम उसे रोजमर्रा के खर्च के लिए चाहिए उसे मिलनी चाहिए। जब सब बैंक खाते में आ ही गया तो फिर उस आदमी को बाद में सवाल जबाब करके काला पीला नीला सब धन का पता लगाया जा सकता है। 4000 नगद दे रहे है उससे सब काला धन 500/1000 से बदल कर 2000 हो जा रहा है, ऐसे में कई लोगो को नोट बदलने का रोजगार मिला हुआ है, ये अच्छा हुआ की कम से कम गरीब आदमी को दो महीने कुछ कमाने का अवसर मिला है। बड़ो का पैसा काला सफेद जो भी हो क्या फर्क पड़ता है गरीब का पेट भरा ये अच्छा है। सरकार कहती है काला धन आयेगा, कैसे आयेगा जो आया वो सफेद है और जो नही आया वो नही आया तो कैसे और कितना काला धन सरकार के पास आया। नोट बदली होने नही आते है तो सरकार को कोई फायदा नही होगा जिनके पास नोट बच जायेंगे वो नुकसान में रहेंगे पर सरकार को कुछ नही मिलेगा। सरकार तो ये नोटों की अदला बदली में 20000 करोड़ अपनी जेब से लगा चुकी है। आतंकवादियों को फंडिंग भी नये 2000 के नोटों से होने लगी है सुदूर वनांचलों में और घाटी में लोग नोट बदल कर नये नोट ले जा रहे है किसी के चेहरे पर तो लिखा नही है कि वो आतंकवादी है। सरकार उसे रोक नही सकती। नकली नोट नही चलेंगे ऐसा सोचना भी गलत है कुछ ही दिनों में 2000 के नकली नोट आ जायेंगे। कुछ जगह तो आ भी गये है खबरे आ रही है।
सरकार का ये कदम निश्चय ही अच्छा कदम है पर सरकार और सरकारी नुमाइंदे प्रधानमंत्री और वित्तमंत्री अपने पदों की गरिमा समझते हुए पूरे धैर्य से सरकार की योजना के क्रियान्वयन करने और आम जनता को होने वाली परेशानियों को सुलझाने में लगे ना की उलूल जुलूल बयान बाजियों में।
नवनीत जगतरामका
प्रधान संपादक