किसी एक के कहने पर नहीं बनेगा राम मंदिर

इस्पात टाइम्स/रायगढ। अयोध्या में राममंदिर का निर्माण किसी एक व्यक्ति के कहने पर नहीं बन पाएगा। इसके लिए सभी संप्रदाय के लोगों को विश्वास में लेना होगा। संत समाज चाह रहा है राम मंदिर श्रीराम जन्मभूमि पर बने,लेकिन इसे राजनैतिक रंग दिया जा रहा है। उक्त बातें स्वामी सत्यप्रज्ञानंद सरस्वती ने यहां पत्रकारों से चर्चा करते हुए कही। उन्होंने कहा कि विश्वात्म चेतना महासम्मेलन एवं श्री श्री विण्णु महायज्ञ में देश के प्रख्यात संत पहुंचेंगे। जहां आध्यात्मिक संदेश देना चाहते हैं। स्वामी सत्यप्रज्ञानंद ने कहा कि महासम्मेलन में प्रासंगिग विषयों पर सत्संग होगा।aaaa
जिले मुख्यालय से लगे औरदा रोड गढ़उमरिया में 12 फरवरी से 17 फरवरी तक होनेवाले विश्वात्म चेतना महासम्मेलन एवं श्री श्री विण्णु महायज्ञ के संबंध में स्वामी सत्यप्रज्ञानंद ने कहा कि इस आयोजन से क्षेत्र की जनता का आध्यात्मिक भविष्य उज्ज्वल होगा। उन्होंने स्थानीय एक होटल में आयोजित पत्रकार वार्ता में चर्चा करते हुए कहा कि समरसता का वातावरण बनाने के संदर्भ में यज्ञ महत्वपूर्ण भूमिका अदा करता है। यज्ञ से औरों के लिए त्याग की प्रेरणा मिलती है। पत्रकारों चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि हिन्दू धर्म को लेकर राजकीय पृष्ठपोसकता की कमी है। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में सनातन धर्म को लेकर कटाक्ष बढ़ते जा रहे हैं। राममंदिर मुद्दे पर उन्होंने कहा कि यह किसी एक व्यक्ति के कहने पर नहीं हो सकता। स्वामी सत्यप्रज्ञानंद ने कहा कि इसके लिए सभी संप्रदाय के लोगों को विश्वास में लेना होगा। उन्होंने चिंता व्यक्त करते हुए कहा कि वोट की राजनीति चल रही है। इस मुद्दे को राजनैतिक रंग दिया जा रहा है। जबकि ऐसा नहीं होना चाहिए। राममंदिर का निर्माण मुसलमानों की उदारता के साथ हो। पत्रकारों से चर्चा करते हुए उन्होंने कहा कि विश्वात्म चेतना महासम्मेलन में सनातन धर्म के आध्यात्मिक प्रमुख पधार रहे हैं। जहां प्रासंगिक विषयों पर प्रतिदिन सत्संग होगा। एकात्मकता, सद्भाव, सहयोग एवं भाईचारा बनाने के लिए इस तरह के आयोजन की प्रासंगिकता अति आवश्यक है।
देर से उठाया गया मामला
शिरडी के सांई बाबा को लेकर शंकराचार्य के विरोध के संबंध में स्वामी सत्यप्रज्ञानंद ने कहा कि इसे काफी देर से उठाया गया मामला कहा जा सकता है। उन्होंने कहा कि जब आम लोगों पर सांई बाबा के प्रति अगाध श्रद्धा है। उस स्थिति में उसे एकाएक खत्म नहीं किया जा सकता। हालांकि उन्होंने कहा कि संत समाज सनातन धर्म के अनुरूप ईश्वर के प्रति अराधना एवं पूजा को महत्व देता है। अपने किसी ईष्ट को भगवान का रूप मानकर उसकी पूजा नहीं होनी चाहिए। पूजा तो भगवान की हो,शंकराचार्य यही कह रहे थे।
परम्परा के नाम पर विभेद
पत्रकार वार्ता में स्वामी सत्याप्रज्ञानंद सरस्वती ने शनि सिगनापुर स्थित शनिमंदिर में महिलाओं के प्रवेश को लेकर मचे बवाल पर कहा कि यह कोई बड़ा मुद्दा नहीं है। सैकडों वर्ष की परम्परा को जारी रखने को लेकर बखेड़ा खड़ा हुआ है। इसके लिए आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने की आवश्यकता ही नहीं है,लेकिन हो रहा है। चूंकि परम्परा के नाम पर विभेद की स्थिति बन गई है।